Monday, March 30, 2026
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यूपी का विनर ईवीएम में ‘लॉक’

  • अब पहले चरण का कौन होगा विनर? यह हो गया सबसे महत्वपूर्ण

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कहा यह जा रहा है कि प्रथम चरण के चुनाव में यूपी का विनर ‘लॉक’ हो गया हैं। इस दावे में दम कितना हैं, यह आंकड़े बताते हैं। अब पहले चरण का विनर कौन होगा? यह बेहद महत्वपूर्ण हो गया हैं। इस पर ही सभी की निगाहें लगी हुई हैं। दरअसल, पिछले तीन चुनावों के आंकड़ों पर दृष्टिपात करें तो यह तथ्य भी निकलकर सामने आ रहा है कि आखिर प्रथम चरण के चुनाव में विनर रहने वाली पार्टी ही यूपी में सरकार बनाती हैं। राजनीतिक पंडितों का भी यहीं कहना हैं। विनर जो भी हो, वह लॉक हो गया हैं। विनर ईवीएम में कैद हो गया हैं, जो दस मार्च को ‘अनलॉक’ होगा।

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वर्ष 2017 के काल खंड पर दृष्टिपात करे तो मालूम होता है कि 58 सीटों के लिए चुनाव हुआ था, तब भाजपा ने 53 सीटें जीती थी। सपा को दो, बसपा को दो और आरएलडी को एक सीट मिली थी। इसलिए भाजपा ने प्रथम चरण से ही बढ़ भी ली और यूपी में सरकार बनाई। ये आंकड़े बता रहे हैं। पहले चरण में जिसने विजय पताका फहराई, उसी की सरकार भी बनी।

2017 काल खंड में ही ऐसा नहीं हुआ, बल्कि 2012 काल खंड में भी कुछ वैसा ही हुआ। तब 55 सीटों पर चुनाव हुआ था। उस दौरान भाजपा ने पांच सीटे जीती थी, जबकि सपा ने 41 सीटें जीती थी। बीएसपी ने पांच सीटें जीती थी तथा आरएलडी ने एक सीट जीती तथा कांग्रेस ने तीन सीटों पर विजय हासिल की थी। इस तरह से काल खंड 2012 में सपा ने सर्वाधिक 41 सीटें जीती तथा सरकार भी सपा की बनी थी।

तब अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने थे। सपा को तब बंफर 41 सीट मिली थी। तभी तय हो गया था कि यूपी में सपा की सरकार बनेगी तो तब सपा की सरकार बनी भी। पहले चरण में सपा आगे निकली तो उसी ने सरकार भी बनाई। काल खंड 2007 की बात करते हैं, तब क्या रहा था प्रथम चरण के चुनाव में। भाजपा ने आठ सीटें जीती थी, सपा ने 14 सीटें जीती थी। बीएसपी ने उस चुनाव में प्रथम चरण में सर्वाधिक 33 सीटें जीतकर बढ़त बनाई थी। आरएलडी ने तब तीन सीटें तीजी तथा कांग्रेस ने चार सीटों पर जीत दर्ज की थी।

इस तरह से देखा जाए तो 2007 के काल खंड में बसपा ने प्रथम चरण के चुनाव में सर्वाधिक 33 सीटें जीतकर बढ़त तो बनाई, फिर लखनऊ में सरकार भी बनाई थी। इसलिए यह महत्वपूर्ण तथ्य है कि यूपी का विनर कौन होगा? यह ईवीएम में बंद हो गया हैं। जो आंकड़े बता रहे हैं, उससे तो यहीं लग रहा है। जो भी पार्टी प्रथम चरण में बढ़ता बनाती है, यूपी में सरकार उसी की बनती हैं। विनर कौन होगा?

यह तो दस मार्च को ही पता चल सकेगा, लेकिन प्रथम चरण में जो मतदान हुआ है, उससे स्पष्ट हो गया है कि विनर ईवीएम में लॉक हो गया है। अब यह दस मार्च को ही अनलॉक होगा। महत्वपूर्ण यह है कि पश्चिमी यूपी में महिलाओं के मत प्रतिशत को लेकर भी चुनाव की हार-जीत निर्भर करती हैं। देखा जाए तो वर्ष 2007 में बीएसपी को महिलाओं का मत मिला 16 प्रतिशत, सपा को महिलाओं का मत प्रतिशत मिला 26 और बीएसपी को मिला 27 प्रतिशत। इसी को देखिये, तब बसपा की सरकार बनी।

2012 में बीएसपी को 25 प्रतिशत महिलाओं का वोट मिला तथा सपा को 31 प्रतिशत वोट महिलाओं का मिला। भाजपा को 14 प्रतिशत महिलाओं का वोट मिला। इस तरह से नंबर वन पर रही सपा तथा सरकार भी सपा की बनी। 2017 में बीएसपी को 23 प्रतिशत, सपा का 20 प्रतिशत और भाजपा को 41 प्रतिशत महिलाओं का वोट मिला। यह वोट बेहद महत्वपूर्ण रहा। इस तरह से देखा जाए तो महिलाओं का मत प्रतिशत बेहद अहम है, वहीं से जीत का रास्ता निकलता हैं। इस पर इस बार कांग्रेस ने फोकस भी किया था, लेकिन 2022 में कौन विनर होगा? लॉक हुए ईवीएम के प्रथम चरण में यह बंद हो गया है।

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