- जनसंघ और बीकेडी के प्रत्याशियों ने वापस ले लिए थे पर्चेे
- कांग्रेस दफ्तर में चपरासी का काम करते थे रामदयाल
- आज जिले में कांग्रेस के हिस्से में नहीं आई कोई सीट
बृजवीर चौधरी |
बिजनौर: एक समय कांग्रेस पार्टी का बिजनौर में ऐसा भी दबदबा रहा कि कांग्रेस पार्टी के एक चपरासी को निर्विरोध सांसद चुन लिया गया। जनसंघ और बीकेडी जैसी पार्टी के प्रत्याशियों ने अपने पर्चे वापस ले लिए। कांग्रेस के दफ्तर में रामदयाल चपरासी का काम देखते थे और निर्विरोध सांसद चुने गए। आज हालात बदल गए और गठबंधन में बिजनौर जिले में कांगे्रेस के हिस्से में कोई सीट तक नहीं आई। वर्षों से यहां पर कांग्रेस का कोई प्रतिनिधि चुनाव भी नहीं जीत सका।
वर्ष2024 लोकसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी। जिले की बिजनौर व नगीना लोकसभा सीट पर पहले चरण 19 अप्रैल में मतदान और चार जून को मतगणना होगी। वर्ष 1971 में लोकसभा चुनाव हुआ था। इस चुनाव में कांगे्रस के रामानंद शास्त्री सांसद चुने गए थे। इलेक्शन कमीशन के आंकड़ों पर नजर डाले तो रामानंद शास्त्री ने बीकेडी के महिलाल सिंह को एक लाख से अधिक मतों से पराजित किया था। इसके बाद रामानंद शास्त्री बीमार रहने लगे और बीमारी के बाद सांसद का निधन हो गया। बिजनौर सीट खाली होने पर वर्ष 1974 में बिजनौर लोकसभा सीट पर उपचुनाव हुआ। जनपद में कांग्रेस से लीडर क्रांति कुमार का पूरे प्रदेश में दबदबा था। क्रांति कुमार उस समय एमएलसी थे। सांसद बनाने के लिए प्रत्याशी की तलाश शुरू हुई और कांग्रेस दफ्तर में काम करने वाले शहबाजपुर रतन निवासी रामदयाल के नाम पर विचार विमर्श किया गया। रामदयाल से कहा गया कि सभी को चाय पिला दो तो तुम्हारा नाम प्रत्याशी के लिए भेज दिया जाएगा। रामदयाल से सभी लोगों को चाय पिलाई और कांगे्रस के प्रत्याशी घोषित हो गए। इसके बाद कई लोगों ने रामदयाल के सामने पर्चे भर दिए।
क्रांति कुमार की जिले से लेकर लखनऊ और दिल्ली तक गहरी पकड़ थी। क्रांति कुमार ने रणनीति के तहत जनसंघ के मंगू सिंह और बीकेडी के हरफूल सिंह का पर्चा वापस करा दिया। इसके बाद कांग्रेस दफ्तर में काम करने वाले रामदयाल निर्विरोध सांसद चुन लिए गए। जनपद में इसके बाद या पहले कभी कोई सांसद निर्विरोध नहीं चुना गया।
इलेक्शन कमीशन के आंकड़े बताते हैं कि कन्नौज से डिंपल यादव भी वर्ष 2012 में निर्विरोध सांसद चुनी गई थी।
बिजनौर से चुने गए सांसद
1973 तक कांग्रेस के रामानंद शास्त्री, 1974 में कांग्रेस के रामदयाल, 1977 में महिलाल 1980 में मंगलराम प्रेमी, 1984 में गिरधारी लाल, 1985 में कांग्रेस से मीरा कुमार, 1989 में बसपा की मायावती, 1991 और 1996 में भाजपा से मंगलराम प्रेमी, 1998 में सपा से ओमवती, 1999 में भाजपा से शीशराम रवि, 2004 में रालोद से मुंशीराम पाल, 2009 में रालोद से संजय चौहान, 1914 में भाजपा से भारतेंद्र और 2019 में बसपा से मलूक नागर सांसद चुने गए।

