- घर से बुलाकर ले गए थे दोस्त, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल
- कोतवाली थाने से चंद कदम की दूरी पर दिया वारदात को अंजाम
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कोतवाली थाना क्षेत्र के खंदक इलाके में रविवार रात सब्जी का ठेला लगाने वाले एक युवक की चाकुओं से गोदकर निर्मम हत्या कर दी गयी। हत्या की इस वारदात से इलाके में सनसनी फैल गयी। साथ ही घटना को लेकर सुप्तावस्था को लेकर कोतवाली पुलिस की जमकर किरकिरी हो रही है। अब्दुल्ला पुत्र अब्दुल वाहिद निवासी शाहघासा खंदक बाजार में सब्जी का ठेला लगाता है। अपने परिवार का वह इकलौता कमाने वाला था।
उसके पिता की काफी पहले मौत हो चुकी है। रविवार को वह खंदक बाजार में बैठा था। कुछ दूरी पर दबंग प्रवृत्ति के बताए जा रहे कुछ युवक बैठे शराब पी रहे थे। उनकी अब्दुल्ला से कुछ कहासुनी हुई। इन युवकों में से एक उठा और उसने चाकू निकालकर अब्दुल्ला का पेट फाड़ दिया। वह ताबड़तोड़ वार करता रहा। एक वार उसने सीने पर भी किया। घायल युवक सड़क पर गिरकर तड़पने लगा। युवक की हालत देखकर हमलावर मौके से फरार हो गए।
किसी ने सूचना दी तो परिजन आनन-फानन में घटनास्थल पर पहुंच गए। रोते बिखलते परिजन उसको लेकर जिला अस्पताल पहुंचे। व्यापारी नेता और खंदक बाजार हैंडलूम व्यापारी संघ के प्रधान अंकुर गोयल ने आलाधिकारियों को वारदात की सूचना दी। हालांकि जिला अस्पताल में अब्दुल्ला की मौत हो गयी। जिससे परिजनों में कोहराम मच गया।
इलाज के इंतजार में तड़पता रहा और थम गई सांसें
जिला अस्पताल में एक बार फिर सरकारी डाक्टरों की लापरवाही सामने आयी। साथ ही यह भी साबित हो गया कि जिला अस्पताल की इमरजेंसी में डाक्टर नहीं बैठते। दरअसल, घायल अब्दुल्ला को लेकर परिजन जब जिला अस्पताल पहुंचे तो उसकी सांसें चल रही थीं। परिजन वहां मौजदू स्टाफ से बार-बार इलाज शुरू करने की गुहार लगाते रहे, लेकिन पुलिस केस के नाम पर स्टाफ भी हाथ लगाने को तैयार नहीं था।
यहां याद रहे कि सुप्रीम कोर्ट व सूबे की सरकार के स्पष्ट आदेश हैं कि यदि कोई घायल आता है तो सरकारी व प्राइवेट डाक्टर बगैर पुलिस की लिखा-पढ़ी का इंतजार किए बगैर तत्काल घायल का इलाज करें, लेकिन परिजनों का आरोप है कि इलाज करना तो दूर की बात घायल अब्दुल्ला को कोई हाथ तक लगाने को तैयार नहीं था। जिसके चलते उसकी सांसे थम गई।
परिवार का इकलौता सहारा था अब्दुल्ला
अब्दुल्ला विधवा मां शाहिद, भाई अरमान व बहन अलिशा का इकलौता सहारा था। उसके पिता की काफी पहले मौत हो चुकी है। वह सब्जी का ठेला लगाकर परिवार का गुजारा करता था। उसकी मौत के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस परिवार का सहारा कौन बनेगा? मौत से मां और बहन का रो-रोकर बुरा हाल है। अस्पताल में बिखती मां सीओ कोतवाली के पैर पकड़ कर इंसाफ मांग रही थी। हालांकि सीओ मोबाइल पर व्यस्त नजर आए।
कोतवाली पुलिस की बड़ी लापरवाही
हत्या की इस वारदात में कोतवाली पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आयी। दरअसल, हुआ ये है कि घायल युवक को लेकर परिजन तेजी से जिला अस्पताल की ओर भागे। बेहद नाजुक हालत में लाया गया युवक इलाज के डकराता रहा, लेकिन वहां डाक्टर नहीं पहुंचे। कुछ ही देर में उसकी मौत हो गयी। मौत से गुस्साए परिजनों ने वहां हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पर इंस्पेक्टर देहलीगेट विनय कुमार मयफोर्स के पहुंच गए, लेकिन हैरानी ये कि कोतवाली पुलिस तब भी नहीं पहुंची। जब देहलीगेट पुलिस ने उन्हें कॉल किया उसके बाद कहीं जाकर सीओ कोतवाली आशुतोष कुमार व कोतवाली पुलिस वहां पहुंची।

