- वन विभाग के अफसरों पर आरोप, मिलीभगत से संचालित की जा रहीं आरा मशीनें
- एफआईआर दर्ज होने के बावजूद भी नही बाज आ रहे दबंग संचालक
जनवाणी संवाददाता |
सरूरपुर: सरूरपुर क्षेत्र में वन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत के बूते पर प्रतिबंधित आरा मशीन का संचालन अवैध रूप से जमकर चलाया जा रहा है। हालांकि इस संबंध में वन विभाग के अफसरों ने भले ही जिम्मेदारी से बचने के लिए के एक माह पहले दो आरा मशीन संचालकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा कर इतिश्री कर ली, लेकिन बावजूद इसके अफसरों की आंखों में धूल झोंक कर फिर से आरा मशीन को चलाया जा रहा है।
वन विभाग व शासन स्तर से द्वारा आरा मशीन के संचालन पर पूर्ण रूप से कई सालों से रोक लगी हुई है। बावजूद इसके सरूरपुर क्षेत्र के दो गांवों में आरा मशीन का अवैध रूप से संचालन किया जा रहा है। आरोप है कि वन अधिनियम व शासन के आदेश को ताक पर रखकर स्थानीय वन विभाग व पुलिस की मिलीभगत के बूते पर गांव खेड़ी कला में दो आरा मशीन व कस्बा हर्रा में एक आरा मशीन का संचालन अवैध रूप से मालिकों द्वारा किया जा रहा है। यहां वन विभाग की बेशकीमती हरी लकड़ी चोरी छुपे लाकर खा पाई जा रही है। इसकी एवज में आरा मशीन संचालक कौड़ी के भाव खरीद कर मोटी रकम कमा रहे हैं।
इस धंधे में अच्छी कमाई और कम लागत के चलते आरा मशीन संचालकों के हौसले काफी बुलंद है और स्थानीय पुलिस व वन विभाग की मिलीभगत से सालों से धंधा चमकाते आ रहे हैं। जबकि शासन व विभाग की ओर से रोक लगाई गयी है।
हालांकि इस संबंध में एक महीने पहले नवंबर को स्थानीय वन विभाग के वन रक्षक गुलशन कुमार की ओर से गांव खेड़ी कलां निवासी आरा मशीन का संचालन करने वाले दो सगे भाइयों आसिफ व खालिद पुत्रगण इलियास के खिलाफ आरा मशीन स्थापना और विनियम नियमावली 1978 तथा भारतीय वन अधिनियम 1927 के तहत मामला दर्ज कर किया गया था। लेकिन बावजूद इसके एक बार फिर से अवैध रूप से संचालित हो रही आरा मशीनों के मालिकों ने तमाम नियम कायदे ताक पर रखते हुए धंधा चालू कर लिया है। यहां वन विभाग की चोरी छुपे आने वाली लकड़ी की कटाई, चिराई का काम किया जा रहा है।
इस संबंध में जब सरधना के रेंजर संजय कुमार से बात की गई तो उन्होंने बताया कि वन विभाग की और से एक माह पहले आरा मशीन संचालकों खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। बावजूद इसके यदि फिर से आरा मशीन संचालित की जा रही है, तो वह इस मामले को दिखाकर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे। उन्होंने अफसरों की मिलीभगत के आरोप से साफ इंकार किया है।

