- नगर निगम में कमाऊ कर्मचारियों पर हुई फिर मेहरबानी
- निगम में पिछले कई दशकों से एक छत्र चल रहा राज
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: नगर निगम में हमेशा की तरह इस बार भी मठाधीशों की कुर्सियां तक नहीं हिल सकी और उन पर मेहरबानियां करते हुए ट्रांसफर की रस्म अदायगी भी कर दी गई। नगर निगम में पिछले कई दशकों से मठाधीशों का एक छत्र राज चल रहा है। नगर निगम के सभी अनुभागों में यह मठाधीश काबिज हैं। हाउस टैक्स अनुभाग में तो हर सीट की बाकायदा बोली तक लगती है। फिर यहां आने के बाद वह कर्मचारी खुलकर वसूली के धंधे में लग जाता है। वह लोगों से बिल कम करने के नाम पर खुले आम वसूली करता है और अधिकार शिकायत आने के बाद भी चुप्पी साधकर बैठ जाते हैं।
इसी तरह जलकल अनुभाग में भी सेटिंग-गेटिंग का खेल चलता है। निर्माण अनुभाग भी इससे अछूता नहीं है। यहां भी मनमाफिक सीट पर ट्रांसफर और फिर उसी पर जमे रहने के लिए अलग-अलग बोलियां लगती हैं। फिर मजाल नहीं कि कोई आपकी कुर्सी भी हिला सके। भले ही कितनी भी शिकायते होती रहें। अधिकारी सब अनसुनी कर देंगे। अधिकारियों को अपने को पाक साफ दिखाना है तथा यह भी दिखाना है कि वह दूसरे सरकारी विभागों की तरह शासन की गाइड लाइन का पालन भी करते हैं। शनिवार को ऐसा ही कारनामा नगर निगम में अंजाम दिया गया।
विधि विभाग में कार्यरत मुकेश गेहरा को यहां से पशु चिकित्सक एवं कल्याण अधिकारी डा. हरपाल सिंह के कार्यालय भेजा गया है। जबकि यहां तैनात बाबू ललित स्टीफन को विधि विभाग भेजा गया है। ललित स्टीफन को अभी छह माह पूर्व ही नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. गजेन्द्र सिंह के कार्यालय से डा. हरपाल सिंह के कार्यालय में भेजा गया था और छह माह में ही फिर ट्रांसफर कर दिया गया। जबकि नगर निगम में कार्यरत मठाधीशों की कुर्सियां तक हिलाई नहीं गई हैं। वह जहां अपनी मनमाफिक सीट पर रहकर वसूली कर रहे थे, अब भी वह अपनी पुरानी सीट पर रहकर वसूली के धंधे में लिप्त हैं।
एमएलसी का नाम सुन खिसक लिए अपर नगरायुक्त
डेयरी संचालक ने जब अपने को भाजपा एमएलसी का करीबी बताया तो इसे बंद कराने पहुंचे अपर नगर आयुक्त डर कर वहां से खिसक गये। नागरिक गंदगी की शिकायत करते रह गये और अपर नगर आयुक्त डेयरी संचालक को 10 दिन की मोहलत भी दे गये। वार्ड-67 कैलाशपुरी में लगातार नालियो में गोबर बहने से नालियां व नाले चोक हो जाने के कारण क्षेत्र में गंदगी व बदबू से अनेको बीमारियां जन्म ले रही है।
जिसकी शिकायत कई क्षेत्रवासियों द्वारा किए जाने पर नगर निगम के वाट्सएप नम्बर द्वारा सब स्थिति से नगर निगम को सूचित करवाया गया। शिकायत दर्ज करवाने के 15 दिन बाद शनिवार को जब अपर नगर आयुक्त पंकज यादव वार्ड के दौरे पर पहुंचे तो उन्होंने क्षेत्र में गोबर से चोक नाली व नालो की स्थिति को देखा। जिसके बाद अपर नगर आयुक्त ने क्षेत्र में मकबरे के पास संचालित 5-6 डेरियों का निरीक्षण किया तो वहां से गोबर नालियों में बहता पाया। वहां संचालित डेरी मालिक ने जैसे ही खुद को एक एमएलसी का करीबी रिश्तेदार बताया तो अपर नगर आयुक्त केवल बात को घुमा फिरा कर डेरी संचालक को 10 दिन का समय देकर बिना किसी कार्यवाही के वापस लौट गए।
जब नगर निगम ने डेयरी को नगर निगम छेत्र से बाहर करने के लिये आदेश किया था तो फिर आखिर किस की शह पर शहर मे डेरी चल रही है। मालूम हो कि वर्ष 2022 में सभी डेरी वालों पर मुकदमा भी दर्ज हुआ था, लेकिन उस रिपोर्ट मे भी कोई चार्जशीट नहीं लगाई गई सरकार को बदनाम करने का काम पुलिस और नगर निगम कर रहा है।

