- शहर के 32 बड़े अवैध निर्माणों को अब तक एमडीए ने गिराया
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: अवैध निर्माणों को लेकर कमिश्नर सुरेन्द्र सिंह पूरी सख्ती किये हुए हैं। सख्ती होनी भी चाहिए, लेकिन निर्माण ग्राउंड स्तर से लिंटर तक कैसे पहुंच गए? इसके लिए जिम्मेदार कौन हैं? क्या जिम्मेदारों पर कमिश्नर कार्रवाई करेंगे? बड़े-बड़े अवैध निर्माण गिराये जा रहे हैं, क्या कमिश्नर और एमडीए वीसी ने यह इंजीनियरों से पूछने की चेष्टा कि है कि ये अवैध निर्माण एक-दो दिन में तो हो नहीं गए, बल्कि छह-छह माह तक अवैध निर्माण चलते रहे। फिर भी एमडीए इंजीनियरों ने इन पर कार्रवाई क्यों नहीं की?
इनको निर्माण करने के लिए खुली छूट दी गई? आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि अवैध निर्माण चलने दिये? आॅन रिकॉर्ड एमडीए ने नोटिस भेजे, ऐसा करने से इंजीनियर ने अपनी नौकरी बचाने की कोशिश की, लेकिन तभी ध्वस्तीकरण क्यों नहीं किया गया, यह बड़ा सवाल हैं। दो सप्ताह के भीतर कमिश्नर के निर्देशर पर एमडीए ने 32 बड़े निर्माणों को गिराया हैं। कुछ में एमडीए इंजीनियरों ने खानापूर्ति कर दी। क्योंकि जिसका निर्माण पहले बनवाया गया, उसे पूरा गिरा कैसे सकते हैं, इसमें लोग बवाल कर देंगे।
इंजीनियरों की भूमिका पर उंगली उठने लगेगी। मामला फिर कमिश्नर तक पहुंच सकता हैं। ऐसे में भ्रष्टाचार के मामले भी इंजीनियरों के खिलाफ दर्ज कराये जा सकते हैं। इसी वजह से यह सब किया जा रहा हैं। अभी तो 32 अवैध निर्माणों को गिराया गया हैं, लेकिन कमिश्नर के पास एक ऐसी सूची है, जिसमें एक हजार से ज्यादा अवैध निर्माण शहर में एक वर्ष के भीतर खड़े हो गए हैं। इन निर्माणों में शॉपिंग कॉप्लेक्स तक खुल गए हैं। दुकानदारी की जा रही हैं। कहीं मकान बन गए हैं, लोग रहने लगे हैं।
अब उनको गिराया जाना मुश्किल होगा। क्योंकि उसको लेकर बवाल भी शहर में हो सकता हैं। बड़ा सवाल यह है कि जब ग्राउंड स्तर पर निर्माण शुरू किया जाता हैं, तभी उसको क्यों नहीं रोका जाता हैं। तब यदि निर्माण रोक दिया जाता तो फिर तोड़ने की नौबत ही नहीं आती। एक तो ध्वस्तीकरण के दौरान एमडीए की तीन जेसीबी मशीन क्षतिग्रस्त हो गई हैं। जेसीबी की कीमत लाखों में हैं, ऐसे में मशीन भी खराब हो रही है और समय भी नष्ट हो रहा हैं। एक लंबी फौज अवैध निर्माण को गिराने में लगी हुई हैं।
अवैध निर्माण कितने भी प्रभावशाली व्यक्ति को हो, उसे गिराया जाएगा। प्रयास ये होंगे कि अवैध निर्माण को ग्राउंड स्तर पर ही रोका जाए तथा अवैध निर्माण के जिम्मेदार इंजीनियरों की रिपोर्ट ली जाएगी,

जिनके खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। -सुरेन्द्र सिंह, कमिश्नर मेरठ मंडल

