Sunday, March 22, 2026
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एई, ठेकेदार आपस में थे पाटर्नर

  • नगर निगम में 600 मीटर सड़क भुगतान का मामला
  • कमेटी दो दिन में देगी जांच रिपोर्ट, भ्रष्ट इंजीनियरों पर गाज गिरना तय

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: नगर निगम में सड़क निर्माण को लेकर चल रहे घालमेल और घोटाले के मामले में एई और ठेकेदार आपस में पार्टनर थे। यह तथ्य भी सामने आ रहा है। इसकी यदि सही जांच होती है तो एई की गर्दन भी निश्चित रूप से फंस सकती है। एई नानक चंद का हालांकि यहां से तबादला हो चुका है, लेकिन नानक चंद और ठेकेदार दोनों गाजियाबाद के रहने वाले हैं।

इसी वजह से दोनों के बीच सेटिंग का खेल चलता था। नानक चंद पर्दे के पीछे से ठेकेदार के साथ पाटर्नर थे। इस बात के कहीं सरकारी दस्तावेज तो नहीं है, लेकिन पर्दे के पीछे ठेकेदारी चल रही थी। एई नानक चंद के बीच सेटिंग का खेल चल रहा था।

इसकी आशंका मेयर सुनीता वर्मा ने भी व्यक्त की हैं। यही वजह है कि गाजियाबाद के ही ठेकेदार को एई नानक चंद क्यों काम दिला रहे थे? इस पूरे मामले में जेई राजेंद्र, एई नानक चंद और एक्शन कुराली पूरी तरह से फंस गए हैं। अब देखना यह है कि इसकी जांच रिपोर्ट आने के बाद किस-किस इंजीनियर पर गाज गिरती है?

नगर निगम सड़क घोटाले का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। घोटाले की सड़क का मेयर सुनीता वर्मा ने एक दिन पहले निरीक्षण भी किया था और नाराजगी भी व्यक्त की थी। मेयर का कहना था कि सड़क 600 मीटर की पास कराकर के 300 मीटर की बनाई गई, इसमें इंजीनियरिंग अफसरों ने गलती मानी है। इस तरह से अधिकारियों की पोल खुल गई है। मेयर का कहना है कि इसमें शासन को भी लिखा जाएगा।

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इसमें जांच कराई जाएगी। अधिकारी जेब भर रहे हैं, जो जनता का पैसा है जनता की सड़कों पर खर्च होना चाहिए। जनता के पैसे को अधिकारियों को डकारने नहीं देंगे। ज्यादा से ज्यादा विकास होने चाहिए, यह लक्ष्य मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का भी हैं। भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। नगर निगम के अफसरों ने इसमें बड़ा घोटाला करने की कोशिश की थी। एक कमेटी गठित की गई ह,ै जो एक दिन बाद रिपोर्ट सौंप देगी।

घपले और घोटाले की सड़क में इंजीनियरों पर गाज गिर सकती है । चीफ इंजीनियर और अधिशासी अभियंता भी इस भ्रष्टाचार में घिर गए हैं। एई नानक चंद, जेई राजेंद्र सिंह भी कठघरे में आ गए हैं। इनके खिलाफ एक्शन होना चाहिए। इसके लिए शिकंजा कसा जा रहा है।

300 मीटर की सड़क की 600 मीटर का एस्टीमेट बना दिया। 2.28 करोड़ का एस्टीमेट बना दिया गया और 50 लाख का पेमेंट भी कर दिया गया। इस पूरे मामले को लेकर नगर निगम में खलबली मची हुई है। लखनऊ तक इस पूरे मामले की गूंज पहुंच गई हैं। यह माना जा रहा है कि चारों अफसरों पर निश्चित रूप से गाज गिर सकती है।

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