Wednesday, September 22, 2021
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हाईकोर्ट के दखल के बाद चेयरपर्सन पर गाज गिरना तय

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  • नगर विकास अपर मुख्य सचिव को अवमानना नोटिस
  • हाईकोर्ट ने शासन को दिए एक माह में कार्यवाही के निर्देश

जनवाणी संवाददाता |

मुज़फ्फरनगर: छह सप्ताह के भीतर नगर पालिका चेयरपर्सन पर कार्यवाही करने के आदेश पर अमल ना होने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कडा रूख अपनाया है। नगर विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव को न्यायालय के आदेशों की अवेहलना का दोषी मानते हुए अवमानना नोटिस देने के साथ एक माह की मोहलत देते हुए कार्यवाही के आदेश दिए गए हैं। हाईकोर्ट के दखल के बाद नगर पालिकाध्यक्ष अंजू अग्रवाल पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।

दरअसल नगर पालिका चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल पर वित्तीय अनियमित्ता के आरोप लगाते हुए जनविकास सोसायटी के अध्यक्ष व समाजसेवी मौहम्मद खालिद ने शिकायत शासन को भेजी थी। शासन के निर्देश पर हुई जांच में निर्वतमान जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी जे. ने आरोपों को सही पाए जाने के बाद अंजू अग्रवाल को दोषी मानकर जांच रिपोर्ट शासन को भेजी थी।



इसी बीच चेयरपर्सन अंजू अग्रवाल के भाजपा में जाने के बाद यह जांच रिपोर्ट फाईलों मे दबकर रह गई, जिस पर हाईकोर्ट मे दाखिल की गई पीआईएल पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने नगर विकास विभाग को 6 सप्ताह का समय देते हुए कार्यवाही के आदेश दिए थे।

हाईकोर्ट के आदेश पर अमल नहीं हुआ तो फिर एक याचिका दाखिल की गई। जिसमें याचिका दाखिल करने वाले मोहम्मद खालिद के अधिवक्ता बिरेन्द्र कुमार व आशीष कुमार सिंह ने अपना पक्ष रखा तो न्यायाधीश प्रकाश पाडिया ने न्यायालय के आदेशों की अवेहलना का दोषी मानते हुए अपर मुख्य सचिव रजनीश दुबे को एक माह की मोहलत देते हुए कार्यवाही के आदेश दिए हैं।

जांच में ये सही पाए गए थे आरोप

जांच कमैटी ने नगर पालिका अधिनियम 1916 की धारा 59 व 66 के विपरीत जाकर पद का दुरूपयोग करने व प्रशासनिक अनियमित्ता की श्रेणी मानकर चेयरपर्सन को दोषी माना। इसी के साथ वित्तीय वर्ष 2018 व 2019 में आटो रिक्शा, टैम्पू शुल्क वसूली का ठेका ना छोडने पर 1,31,040 लाख की राजस्व हानि मानते हुए रिपोर्ट शासन को दी गई थी।

जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद शासन से कार्यवाही होना तय माना जा रहा था, लेकिन चेयरपर्सन ने भाजपा का झंडा थामकर पार्टी की सदस्यता ली तो जिला अधिकारी सेल्वा कुमार जे. द्वारा भेजी गई जांच रिपोर्ट फाईलों की धूल फांकने लगी। हाईकोर्ट खंडपीठ ने विगत एक फरवरी 2021 को इस मामले में सुनवाई करते हुए शासन को छह हफ्ते में कार्यवाही के निर्देश दिए थे।

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