हम पूछते हैं कि ये सूचना का अधिकार है किस मर्ज की दवा? कहते हैं कि यह पब्लिक का जानने का अधिकार है। पर सोचने की बात है कि पब्लिक जानकर करेगी क्या? आखिर, ये सूचना का अधिकार क्या गरीब की झोंपड़ी में चूल्हा जलवा सकता है, भले ही वह चूल्हा उज्ज्वला वाली गैस के बिना, जलावन की लकड़ी से ही जलवाना हो। हर्गिज नहीं। बच्चे की स्कूल की फीस, एक दिन की दिहाड़ी या ठोस कुछ भी, आखिर क्या है जो सूचना का अधिकार किसी गरीब को दे सकता है, खामखां में सरकार को सिरदर्द देने के सिवा! इसीलिए, मोदी जी आरटीआई कानून से लेकर, सूचना आयोग तक के साथ जो कर रहे हैं, बिल्कुल सही कर रहे हैं। ये आरटीआई-आरटीआई की रट लगाने वाले हैं ही इसी मांजने के।
अब बताइये, मोदी जी-योगी जी की जुगल जोड़ी के राज में यूपी का जहाज तरक्की के रनवे पर दौड़ रहा है और हवा में उड़ना ही चाहता था, तभी मुए आरटीआई वालों ने टांग अड़ा दी। कहने लगे कि यह हवाई अड्डा ही बंद है।
योगी जी ने ‘आपरेशन लंगड़ा’ का नाम लेकर धमकाया, तो बंदों ने आरटीआई में डबल इंजन सरकार का ही जवाब सामने कर दिया। पढ़ने लगे कि डबल इंजन राज की यूपी में 2021 से लेकर, पांच साल में पूरे सात नए हवाई अड्डे खुले। पर सात में से पूरे छ:जल्द ही बंद भी हो गए। सिर्फ एक हवाई अड्डा है अयोध्या का, जो पांच साल में खुला तो फिर खुला ही रह गया। कम से कम आरटीआइ की जानकारी आने तक बंद नहीं हुआ था।
अब बताइए, खुलने के बाद बंद भी हो जाने वाले हवाई अड्डो के बारे में जानने में, पब्लिक का क्या भला है? आरटीआई ये यह जानकारी नहीं मिलती और डबल इंजन सरकार के प्रचार से नये हवाई अड्डे खुलने की ही जानकारी मिलती, तो क्या बैलगाड़ियों से चलने वाले हवाई अड्डे पर पहुंच जाते, उड़ान भरने के लिए? बेशक, मोदी जी ने खुद हवाई चप्पल वालों को हवाई जहाज में उड़ाने का वादा किया था। हवाई अड्डा होगा तो ही तो हवाई जहाज आएगा और हवाई जहाज आएगा तो ही हवाई चप्पल वाले हवाई यात्रा करेंगे। पर बिचारे नये हवाई अड्डे इंतजार ही करते रह गए, न हवाई जहाज आए और न हवाई चप्पल वाले हवाई जहाज में सवारी करने का टिकट कटाने आए।
हम तो यही कहेंगे कि इसमें हवाई जहाज चलाने का धंधा करने वालों का भी कोई कसूर नहीं है। हवाई जहाज तो तब आते, जब हवाई चप्पल वाले हवाई जहाज में चढ़ने को उतावले होते। सरकार ने हवाई चप्पल वालों को हवाई जहाज में चढ़ने के लिए प्रोत्साहन देने के लिए, बसों से लेकर रेलगाड़ियों तक में उनका चढ़ना मुश्किल भी करा दिया, पर भाई लोगों ने फिर भी हवाई जहाज का टिकट कटाकर नहीं दिया। पर मोदी जी-योगी जी भी हार मानने वालों में नहीं है। हवाई चप्पल वालों को हवाई जहाज में चढ़ाने के लिए वे यूं ही नये हवाई अड्डे बनवाते रहेंगे और पब्लिक का उत्साह बनाए रखने के लिए, सात हिस्सा खाली गिलास को छोडकर, एक हिस्सा भरा दिखाते रहेंगे।

