जनवाणी ब्यूरो |
नजीबाबाद: गीत गजल संगम एकेडमी के तत्वाधान में एक तरही शेरी नशिस्त का आयोजन सोशल डिस्टेसिंग पर अमल करते हुए किया गया। शेरी नशिस्त में शायरों ने अपना कलाम पेश कर खूब वाहवाही लूटी। तरही नशिस्त में इंतजार काफिया पर शायरों ने अपने कलाम प्रस्तुत किए।
डा. आफताब नोमानी के निवास पर आयोजित शेरी नशिस्त का आगाज उस्ताद बुर्जुग शायर की नात ए पाक से हुआ। नशिस्त को संबोधित करते हुए अध्यक्ष महेन्द्र अश्क व मुख्य अतिथि शनावर किरतपुरी ने कहा कि तरही नशिस्त से उर्दू अदब और अधिक बल मिलता है।
तरही नशिस्तों का होना आज की जरूरत है। उन्होंने उर्दू सीखने और सिखाने पर जोर दिया। डा. इलियास अंसारी ने कहा कि रात भर घर का घर ही सोता रहा/मां ने बस मेरा इंतजार किया। महेन्द्र अश्क ने कहा कि ये तेरे चाहने वाले भी सख्त जां निकले।
शनावर किरतपुरी ने वो दिन गए के तेरी धमकियों से डरते है, के बुजदिलों में हमारा शुमार अब नहीं है। अख्तर मुल्तानी का कलाम वो जिक्र गैर का जब बार बार करता है,कसम खुदा की मेरे दिल पे वार करता है। डा. आफताब नोमानी ने कहा ये कारे सख्त भी दीवाना वार हमने किया, तमाम रात तेरा इंतजार हमने किया। कारी शाकिर रिजवी ने कहा कि हर एक सिम्त से बू आ रही है नफरत की, हमारे दौर के नामा निगार भी ठीक नही।
कुमार मोनू रूबा ने अपने ही घर में खाक उड़ाता हूं रात दिन,बहशी बना दिया है तेरे इंतजार ने। कारी शुऐब नफीस के संचालन में आयोजित शेरी नशिस्त में मास्टर मौ. ताबिश, अब्दुल हई सबा, कारी शुऐब, फरमान अहमद, मुकीम अहमद, नौशाद अहमद साद, मौ. अजहर, आसिफ अंदाज किरतपुरी आदि ने भी अपना कलाम पेश किया। इस अवसर पर अल्ताफ रजा खां, शादाब नोमानी, अब्दुल अजीज, फैज आदि मौजूद रहे।

