Friday, March 27, 2026
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रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने में भारत की मदद करेगा अमेरिका

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने में अमेरिका अहम भूमिका निभाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की सरकार भारत को हथियार और साजोसामान मुहैया कराकर सैन्य और तकनीकी सहयोग को और गहरा कर रही है। साथ ही अमेरिकी सरकार भारत को अपना रक्षा औद्योगिक आधार विकसित करने में भी मदद कर रही है। पेंटागन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमेरिकी सांसदों की एक समिति के समक्ष कहा, भारत अमेरिका का असली और उभरता हुआ साझेदार है।

हिंद-प्रशांत सुरक्षा से जुड़े मामलों के कार्यकारी सहायक रक्षा सचिव डेविड हेल्वे ने सांसदों से कहा, ‘हथियार और साजोसामान मुहैया कराने के लिए हम भारत के साथ सैन्य एवं तकनीकी सहयोग को और गहरा करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि हम परस्पर सहयोगी सुरक्षा बलों और क्षमताओं का निर्माण कर सकें और भारत के रक्षा औद्योगिक आधार विकसित करने में मदद कर सकें।’

इसका मकसद यह है कि भारत अपनी जरूरतों के हिसाब से साजोसामान का उत्पादन कर सके और हमारे तथा क्षेत्र के अन्य देशों के साथ मिलकर काम कर सके। सदन की सशस्त्र सेवा समिति के समक्ष सुनवाई के दौरान सांसद डौग लैंबोर्न के सवालों के जवाब में हेल्वी ने कहा, ‘2016 में अमेरिका ने भारत को एक प्रमुख रक्षा साझेदार का दर्जा दिया था। इसके तहत अमेरिका लगातार भारत को प्रौद्योगिकी साझा करने की दिशा में काम करता रहेगा। अमेरिका यह कदम उसी तरह उठा रहा है, जैसा वह अपने करीबी सहयोगियों और साझेदारों के साथ करता है।’

रक्षा साझेदारी को बढ़ाने की तलाशी जा रही राह

हेल्वे ने कहा, ‘अमेरिका जिन चीजों को प्राथमिकता दे रहा है, उनमें से एक यह है कि भारत के साथ रक्षा साझेदारी को बढ़ाने की राह तलाशी जा रही है, ताकि दोनों देश रक्षा हितों के आधार पर साझा रणनीतिक हितों को देखते हुए रक्षा क्षेत्र में एक साथ काम कर सकें।’

अमेरिकी रक्षा मंत्री 19-21 मार्च को आएंगे

हेल्वे ने यह बयान अमेरिका के रक्षा मंत्री जनरल लॉयड जे ऑस्टिन की भारत यात्रा से पहले दिया है। ऑस्टिन 19-21 मार्च को अपने पहले भारत दौरे पर आएंगे। इस दौरान दोनों पक्षों द्वारा स्वतंत्र एवं खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बनाए रखने के तरीकों और रक्षा संबंधों को मजबूत करने की उम्मीद है। ऑस्टिन ने कहा था कि वह भारत यात्रा के दौरान अमेरिका और भारत के बीच रक्षा साझेदारी को गहरा करने और दोनों देशों के बीच सहयोग को आगे बढ़ाने के लिएद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और दूसरे राष्ट्रीय सुरक्षा से जुडे़ नेताओं से मुलाकात करेंगे।

यह पूछा था सवाल…चीन के जवाब में क्या है बाइडन की योजना

दरअसल, सांसद लैंबोर्न ने पूछा था कि मुझे लगता है कि हम सभी इस बात से सहमत हैं कि चीन के जवाब में एक बेहतर साझेदार बनाए जाने की जरूरत है। ऐसे में भारत के साथ सैन्य और आर्थिक रूप से एक मजबूत साझेदारी बनाने के लिए बाइडन प्रशासन की क्या योजना है?

इस पर हेल्वे ने कहा, सूचना सुरक्षा और साजोसामान की व्यवस्था जैसे कई मूलभूत समझौतों पर हम आगे बढे़ हैं, ताकि जिन खतरों का हम सामूहिक रूप से सामना कर रहे हैं, उनसे निपटा जा सके। इसके अलावा, हम हिंद महासागर क्षेत्र और उससे इतर भी अमेरिका और भारत ने अपनी सेनाओं का बेहतर इस्तेमाल किया है। चाहे वह समुद्री सुरक्षा हो या मानवीय सहायता।

वहीं, अमेरिका भारत-प्रशांत कमान के कमांडर एडमिरल फिल डेविडसन ने कहा, हमें समुद्री क्षेत्र में सहयोग करने और सूचना साझा करने में मदद मिली और भारत को भी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर चुनौतियों से पार पाने में मदद मिली।

आज पहली बार वर्चुअल मिलेंगे मोदी और बाइडन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को चार देशों (भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया) के समूह क्वॉड फ्रेमवर्क के पहले ऑनलाइन शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन भी हिस्सा ले रहे हैं। यह पहला मौका होगा जब पीएम मोदी बाइडन से पहली बार वर्चुअल तौर पर मिलेंगे।

बैठक में बाइडन के अलावा ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन और जापान के उनके समकक्ष योशिहिदे सुगा भी शामिल होंगे। सभी नेता कोविड के टीके की उपलब्धता समेत क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में जहाजों की स्वतंत्र, निर्बाध और समग्र आवाजाही को सुनिश्चित करने पर भी चर्चा करेंगे।

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