जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: भोजपुरी सिनेमा के चर्चित अभिनेता और हालिया लोकसभा चुनाव में सुर्खियों में रहे पवन सिंह से चल रहे पारिवारिक विवाद के बीच अब उनकी पत्नी ज्योति सिंह ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में उतरने का ऐलान कर दिया है। सूत्रों के अनुसार, ज्योति सिंह काराकाट विधानसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरेंगी। वह जल्द ही — संभवतः सोमवार को — नामांकन दाखिल कर सकती हैं।
पिता रामबाबू सिंह का बयान?
हाल ही में ज्योति सिंह के पिता रामबाबू सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा कि, “यदि पवन सिंह मेरी बेटी को पत्नी के रूप में स्वीकार कर लेते हैं, तो वह चुनाव नहीं लड़ेंगी। लेकिन यदि ऐसा नहीं हुआ, तो वह काराकाट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतरेंगी।”
गौरतलब है कि ज्योति सिंह बीते लोकसभा चुनाव के दौरान से ही काराकाट क्षेत्र में सक्रिय रही हैं। वे लगातार स्थानीय आयोजनों में भाग ले रही हैं और लोगों से जनसंपर्क कर रही हैं।
प्रशांत किशोर से मुलाकात, लेकिन बात नहीं बनी
कुछ समय पहले यह चर्चा जोरों पर थी कि ज्योति सिंह बिहार की राजनीति में प्रवेश प्रशांत किशोर की ‘जन सुराज’ पार्टी से कर सकती हैं। उनकी प्रशांत किशोर से मुलाकात भी हुई थी, लेकिन सूत्रों के मुताबिक वार्ता सफल नहीं हो सकी, जिसके बाद उन्होंने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का फैसला किया है।
काराकाट में बन सकता है त्रिकोणीय मुकाबला
काराकाट सीट पर पहले से ही चुनावी सरगर्मी तेज है।
भाजपा-माले गठबंधन की ओर से अरुण सिंह
जदयू के पूर्व सांसद महाबली सिंह पहले ही नामांकन दाखिल कर चुके हैं। अब ज्योति सिंह के उतरने से यहां तीनों प्रमुख गुटों के बीच कांटे का मुकाबला देखने को मिल सकता है।
स्थानीय जनता में उत्साह
ज्योति सिंह के चुनावी मैदान में उतरने को लेकर स्थानीय लोगों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है। सासाराम के निवासी चंद्र मोहन पांडे ने कहा “पवन सिंह को लोग ‘दिलफेंक आशिक’ के रूप में देखते हैं। ऐसे में जनता की सहानुभूति स्वाभाविक रूप से ज्योति सिंह के साथ होगी।”
वहीं स्थानीय युवा शशि कुमार का कहना है “लोकसभा चुनाव में पवन सिंह को जो समर्थन मिला था, उसमें ज्योति सिंह की अहम भूमिका रही थी। वो एक सुलझी हुई महिला छवि के रूप में उभर रही हैं और लोगों से सीधे जुड़ने में सफल रही हैं।”
ज्योति सिंह के पक्ष में कौन से फैक्टर काम कर सकते हैं?
सहानुभूति फैक्टर: पवन सिंह से विवाद के चलते महिलाओं और आम मतदाताओं की सहानुभूति।
स्थानीय सक्रियता: लंबे समय से क्षेत्र में मौजूदगी और जनसंपर्क।
भोजपुरी पहचान: भोजपुरी सिनेमा के प्रशंसकों में लोकप्रियता।
राजनीतिक वैक्यूम: त्रिकोणीय मुकाबले में ‘वैकल्पिक चेहरा’ के रूप में उभरने की संभावना।

