Friday, March 20, 2026
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वेस्ट यूपी में विरोधी स्वर तेज, देवबंद फिलहाल चुप

  • गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के सरकारी सर्वे का मामला
  • उलेमा बोले-सरकार सभी शैक्षिक संस्थानों का करे सर्वे, सिर्फ मदरसों पर ही शक क्यों?

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: उत्तर प्रदेश सरकार ने गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के सर्वे की बात क्या कही, भूचाल आ गया। देवबंद की चुप्पी के बीच वेस्ट यूपी के कई बड़े मदरसे सरकार के इस फैसले का जमकर विरोध कर रहे हैं। इस संबध में दारुल उलूम देवबंद के जनसम्पर्क अधिकारी अशरफ उस्मानी ने सिर्फ इतना कहा कि प्रकरण पर जब भी दारुल उलूम का कोई बयान तैयार होगा तो अवगत करा दिया जाएगा।

यूपी मदरसा बोर्ड के पूर्व चेयरमेन व मेरठ के शहर काजी प्रो. जैनुस साजेदीन भी सरकार की इस मंशा से जरा भी इत्तेफाक नहीं रखते। उधर, बरेली की विश्व प्रसिद्ध दरगाह आला हजरत के मौलाना शाहबुद्दीन रजवी बरेलवी ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़ा किया है। वेस्ट यूपी के बड़े मदरसों में शुमार हापुड़ के मदरसा जामिया अरबिया खादिम उल इस्लाम के मोहतमिम (कुलपति) मौलाना अब्दुल कदीम व इसी मदरसे के मौलाना अजमल सरकार के इस फैसले को धार्मिक आजादी में मदाखलत (हस्तक्षेप) बता रहे हैं।

इसके अलावा मेरठ के प्रसिद्ध मदरसे इमदादुल इस्लाम (सदर) के मोहतमिम मौलाना मशहूद उर रहमान शाहीन जमाली चतुर्वेदी इस मामले पर तटस्थ हैं। उनका मानना है कि यह सब सरकार की सोंच पर निर्भर है। मदरसा जामिया मदनिया (हापुड़ रोड) के मोहतमिम कारी अफ्फान कासमी का मानना है कि सिर्फ मदरसों के सर्वे से समाज में गलत मैसेज जाएगा।

हापुड़ मदरसे ने भी दर्ज कराया विरोध

मेरठ/हापुड़: गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के सर्वे को लेकर वेस्ट यूपी के बड़े मदरसों में शुमार हापुड़ के मदरसा जामिया अरबिया खादिम उल इस्लाम के मोहतमिम मौलाना अब्दुल कदीम व इसी मदरसे के मौलाना अजमल सरकार की इस मंशा से इत्तेफाक नहीं रखते। उनका मानना है कि सरकार का यह आदेश मुसलमानों की धार्मिक आजादी में हस्तक्षेप है और जब सरकार ही कानून को फॉलो नहीं कर रही तो इसमें हम सिवाए विरोध के और कर भी क्या सकते हैं। मौलाना अब्दुल कदीम के अनुसार सरकार को इस तरह गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के सर्वे का कोई संवैधानिक अधिकार ही नहीं है।

सर्वे से हमें कोई एतराज नहीं, लेकिन फिर यह सभी धर्मों की शिक्षण संस्थाओं का होना चाहिए। पाठशालाओं का भी हो और सरस्वती शिशु मन्दिरों का भी हो। सिर्फ हम पर ही शक क्यों? हम किसी पर अंगुली नहीं उठा रहे सिर्फ इंसाफ की बात कह रहे हैं। -प्रो. जैनुस साजेदीन (पूर्व चेयरमैन यूपी मदरसा बोर्ड)

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय से संबधित मंत्रियों व मदरसा बोर्ड के अधिकारियों की उर्दू को लेकर जानकारी शून्य है। सरकार जंग ए आजादी में मदरसों के किरदार को भूल कर उनमें आतंकी कनेक्शन ढूंढ रही है। सरकार की मंशा और नियत दोनों पर हमें शक है। -मौलाना शाहबुद्दीन रजवी बरेलवी, (दरगाह, आला हजरत, बरेली)

मदरसे नैतिक मूल्यों एवं मानवता के प्रेरक व रक्षक हैं। मदरसों के छात्रों ने देश की आजादी के लिए अपनी जानें कुर्बान की। सर्वे के मामले में सरकार की सोंच सकारात्मक है तो किसी को कोई आॅब्जेक्शन नहीं लेकिन अगर सोंच नकारात्मक है तो फिर सर्वे पर हमें एतराज है। -मौलाना मशहूद उर रहमान चतुर्वेदी, (मोहतमिम, मदरसा इमदादुल इस्लाम मेरठ)

अगर बात तालीमी इदारों की है तो क्या कमी सिर्फ मदरसों में ही दिख रही है। सरकार की इस मंशा से समाज में यही मैसेज जाएगा कि मदरसों में ही असामाजिक गतिविधियां होती हैं। इसलिए सरकार को चाहिए कि अगर सर्वे जरुरी है तो सभी शैक्षिक संस्थाओं का हो। -कारी अफ्फान कासमी, (मोहतमिम, मदरसा जामिया मदनिया, मेरठ)

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