Monday, March 16, 2026
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तीन अंडरपास व ओवरब्रिज निर्माण को सेना की हरी झंडी

  • अगले माह जारी किए जाएंगे टेंडर, कैंट के फाजलपुर रेलवे फाटक को 10-15 मिनट तक करना पड़ता था बंद

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: छावनी क्षेत्र में बने चार रेलवे फाटकों के बंद होने से परेशान लोगों को अगले वर्ष राहत मिलेगी। सेना ने तीन फाटकों के नीचे अंडरपास और एक फाटक के ऊपर से ओवरब्रिज के निर्माण को हरी झंडी दे दी है। अगले माह इस योजना पर कार्य शुरू करने के लिए टेंडर जारी कर दिए जाएंगे। कैंट में फाजलपुर रेलवे फाटक नंबर 27, आर्मी गोल्फ कोर्स रेलवे फाटक नंबर 28, कासमपुर रेलवे फाटक नंबर 29 और शराब फैक्ट्री के पास स्थित फाटक नंबर 29 ए मैनुअल आपरेटेड हैं, यानी इनपर गेट मैन तैनात रहते हैं।

यात्री ट्रेन या माल गाड़ी या खाली इंजन के यहां से गुजरने पर इन फाटकों को गेट मैन बंद करते हैं और ट्रेन गुजरने के बाद खोलते हैं। गेट बंद होने पर वहां से गुजरने वाले राहगीरों को परेशानी होती है। कई बार लगातार दो या तीनों ट्रेनों के चंद मिनटों में गुजरने को लेकर फाटकों को 10-15 मिनट तक बंद करना पड़ता है। इस बीच लोग बेचैन हो जाते हैं। कई बार फाटक खुलवाने के लिए लोग गेट मैन से अभद्रता करते हैं। कुछ लोग हंगामा भी करते हैं। कई बार तो लोग गेटमैन के साथ मारपीट भी करते हैं। दोपहिया वाहन सवार कुछ लोग ट्रेन आने के दौरान बैरियर के नीचे से निकालकर रेलवे लाइन पार करते हैं।

ऐसे में लोग ट्रेन की चपेट में आकर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं। इस तरह की दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और फाटक बंद होने के दौरान लोगों को होने वाली परेशानी से निजात दिलाने के लिए रेलवे द्वारा फाटकों के नीचे अंडरपास या रेलवे लाइन के ऊपर से ओवरब्रिज का निर्माण कराया जा रहा है। रेलवे ने न्यू गाजियाबाद से टपरी सहारनपुर रेलवे ट्रैक पर मेरठ कैंट क्षेत्र में तीन रेलवे फाटकों के नीचे अंडरपास बनाने और कासमपुर स्थित शराब फैक्ट्री के पास स्थित रेलवे फाटक के ऊपर से ओवरब्रिज बनाने का प्रस्ताव तैयार करके रेलवे मुख्यालय भेजा था।

मुख्यालय से इस प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी गई। दरअसल, ये रेलवे फाटक सेना के क्षेत्र में स्थित हैं, इसलिए सेना से एनओसी मांगी गई थी। हाल ही में सेना ने रेलवे को एनओसी दे दी। जनवरी में टेंडर की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। टेंडर पास होने के बाद निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। 2025 में उक्त अंडरपास व ओवरब्रिज के निर्माण कार्य के पूरा करने की उम्मीद की जा रही है।

इन रेलवे फाटक पर होगा निर्माण कार्य

  • फाटक नंबर 27 फाजलपुर के नीचे अंडरपास का निर्माण।
  • फाटक नंबर 28 गोल्फ कोर्स के नीचे अंडरपास का निर्माण।
  • फाटक नंबर 29 स्पेशल कासमपुर के नीचे अंडरपास का निर्माण।
  • फाटक नंबर 29ए शराब फाटक के नीचे अंडरपास का निर्माण।

कांप्लेक्स को ध्वस्तीकरण कर आवास विकास जमीन का करेगा अधिग्रहण

मेरठ: सेंट्रल मार्केट को ध्वस्त करने के लिए आवास विकास परिषद ने अपनी तैयारी पूरी कर ली है। कांप्लेक्स की दुकान खरीदने वाले सभी 22 दुकानदारों से रजिस्ट्री की कापी मांगी गई है। वरिष्ठ अधिवक्ताओं का कहना है कि बहुत जल्द ही आवास विकास परिषद ध्वस्तीकरण करके उसकी जमीन का अधिग्रहण कर लेगा। इसके बाद जिसके नाम नीचे की दुकानों के बैनामे हैं। उसके पुराने रेट पर मुआवजा दिया जाएगा। जिससे दुकानदारों में खलबली मची हुई है।

सेंट्रल मार्केट सेक्टर-छह में आवासीय भूखंड पर बने तीन मंजिला कांप्लेक्स के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट ने ध्वस्तीकरण का आदेश जारी कर दिया है। जिससे उसमें शोरूम व दुकान करने वाले दुकानदारों में खलबली मची हुई है। शनिवार को आवास विकास ने तीन महिला समेत 11 लोगों को तीन माह के अंदर शोरूम खाली करने का नोटिस भी चस्पा कर दिया है। अब आवास विकास अधिकारियों ने कांप्लेक्स में बनी 22 दुकानें व शोरूम मालिकों से कांप्लेक्स में दुकाने खरीदने की रजिस्ट्री कापी मांगी है।

आवास विकास अधिकारियों का कहना है कि अवैध बने कांप्लेक्स को तीन माह में खाली करा लिया जाएगा। दो हफ्ते में इसका ध्वस्तीकरण कर दिया जाएगा। अधिवक्ता राहुल शर्मा का कहना है कि नियमानुसार अवैध कांप्लेक्स को ध्वस्तीकरण कर 362 गज के आवासीय भूखंड को अधिग्रहण कर लिया जाएगा। जिनके नाम बैनामे हुए है उनको मुआवजा दे दिया जाएगा। कांप्लेक्स के फर्स्ट, सेकंड व थर्ड फ्लोर पर दुकानें है, उन्हें मुआवजा मिलने में दिक्कत आ सकती है।

भैंसों की डेयरी तोड़कर बनाया था कांप्लेक्स

बताया गया कि 1990 के समय इस भूखंड पर काजीपुर के रहने वाले ने भैंसों की डायरी खोल रखी थी। इसके बाद उसने आगे का हिस्सा कुछ लोगों को बेच दिया। पिछले हिस्से में डायरी खोल ली। इसके बाद धीरे-धीरे आगे के हिस्से में दुकानें बन गई। इसके बाद वीरसिंह ने पीछे के हिस्सा भी बेच दिया। वहां पर यह कांप्लेक्स खड़ा कर दिया गया। इसके निर्माण को लेकर आवास विकास परिषद क अधिकारियों से मारपीट भी हुई। इसके बाद मामला बिगड़ता चला गया। आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने इसे ध्वस्तीकरण का आदेश दे दिया। आर्डर में भी कांप्लेक्स मालिक का आवास विकास अधिकारियों के साथ मारपीट का जिक्र किया गया।

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