Monday, May 17, 2021
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आक्सीजन प्लांटों के चक्कर लगा रहे सेना के जवान

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  • हालात बद से बदतर, अन्य प्लांटों पर नहीं आॅक्सीजन
  • माहेश्वरी प्लांट आॅक्सीजन लेने पहुंचे सेना के जवान

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: आम आदमी को अच्छे दिनों का सपना दिखाने वाली सरकार के बाशिंदों को अब मुंह छिपाकर बैठ जाना चाहिए या फिर अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए। अब इससे बुरे दिनों की कोई कल्पना भी नहीं कर सकता कि अपने प्राणों को न्योछावर करके देश की रक्षा करने वाली सेना को ही आॅक्सीजन के लिये मारे मारे फिरना पड़ेगा। यह हाल सोमवार को माहेश्वरी आॅक्सीजन प्लांट पर देखन को मिले। सेना के जवान यहां जवानों के लिये आॅक्सीजन लेने के लिये ट्रक लेकर पहुंचे। उन्हें बड़ी मुश्किल से आॅक्सीजन उपलब्ध कराई गई।

सेना को लेकर और देश की रक्षा करने को लेकर बड़ी बड़ी बाते करने वाले नेता आज दिखाई नहीं दे रहे हैं। अपने कमरों पर बैठकर देश के हालातों पर चर्चा करना और बात हैं और जमीन पर पहुंचकर हकीकत जानना और बात है। आज किसी के पास इतनी हिम्मत नहीं बची है कि वह सड़कों पर उतरे और लोगों का हाल जाने।

बात सिर्फ मेरठ की करें तो यहां प्रशासन के दावे भी पूरी तरह से फेल नजर आ रहे हैं। सोमवार को जो आॅक्सीजन प्लांट पर देखने को मिला वो शायद ही कहीं हो। भारतीय सेना जो अपनी जान पर खेलकर देश की रक्षा करती है। अपनी जान गंवाकर देशवासियों और आम लोगों को चैन की नींद साने देती है आज उसी सेना के लिये आॅक्सीजन सिलेंडर नहीं मिल पा रहे हैं।

रिठानी रोड स्थित माहेश्वरी आॅक्सीजन प्लांट पर आम आमदी को आॅक्सीजन मुहैया कराई जा रही है। सोमवार को यहां सेना के जवान भी आॅक्सीजन लेने पहुंचे। सेना के जवान अंकित से जब बात की गई तो उन्होंने बताया कि किसी अन्य प्लांट पर आॅक्सीजन उपलब्ध न होने पर उन्हें यहां आॅक्सीजन लेने आना पड़ा।

अब आप खुद ही सोच लीजिये कि सेना को आॅक्सीजन सीधे उनके कैंप या अस्पताल में पहुंचानी चाहिए थी, लेकिन उसके बावजूद सेना के जवानों को खुद ही आॅक्सीजन के लिये चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। ऐसे में आम आदमी के तो हालात ही खराब हैं वह तो मरने के लिये इस समय लाइन में लगा है।

सुबह पांच बजे पहुंचे सिलेंडर लेने शाम को मिला

माहेश्वरी प्लांट को खुले एक ही दिन हुआ है। यहां हालात इस कदर खराब है कि लोग सुबह पांच बजे ही लाइन में आकर लग गये। यहां लोगों को टोन बांटे गये उसके बाद सिलेंडर दिये गये। ब्रह्मपुरी निवासी रिक्शा चालक राकेश ने बताया कि उन्होंने पूरा शहर छान मारा, लेकिन किसी प्लांट पर उन्हे आॅक्सीजन सिलेंडर नहीं मिल पाया।

जब उन्हें पता चला कि माहेश्वरी प्लांट पर लोगों को आॅक्सीजन दी जा रही है तो वह यहां सुबह पांच बजे ही पहुंच गये। उन्होंने बताया कि 11 बजे तक तो आॅक्सीजन बंटनी ही शुरू नहीं हुई। उसके बाद पहले टोकन दिया गया बाद में उनका नंबर शाम को पांच बजे के बाद आया। एक आॅक्सीजन सिलेंडर मिलने के बाद उनकी जान में जान आई। उन्होंने बताया कि वह अपने पिता जी के लिये आॅक्सीजन लेने आये हैं।

स्टॉक करने के लिये आॅक्सीजन लेने पहुंचे लोग

लोग अपनों को सांसे देने के लिये आॅक्सीजन लेने के लिये लाइन में लगे हैं तो यहां कुछ लोग ऐसे भी हैं जिनके घर में कोई बीमार नहीं है। लेकिन बीमारी का डर उनके अंदर इतना है कि वह आॅक्सीजन का स्टॉक करने में लगे हैं। जागृति विहार निवासी अमित ने बताया कि वह यहां आॅक्सीजन लेने सिर्फ इसलिये आये हैं कि वह अपने घरवालों की रक्षा करने के लिये आॅक्सीजन को स्टॉक करके रख सकें। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में न जाने कब आॅक्सीजन की आवश्यकता पड़ जाये इसलिये वह आॅक्सीजन का स्टॉक कर रहे हैं।

प्लांट के बाहर लगाई गई बैरिकेडिंग

आसपास के लोगों के हंगाम के बाद माहेश्वरी प्लांट के बाहर बैरिकेडिंग की व्यवस्था कर दी गई है। बता दें कि रविवार को प्लांट का संचालन शुरू होते ही यहां लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गई थी। जिसके बाद लोगों ने यहां बीमारी का डर होने के कारण हंगामा कर दिया था। हंगामे की सूचना के बाद यहां प्लांट संचालकों की ओर से बैरिकेडिंग की व्यवस्था कर दी गई है। इसके अलावा पुलिस प्रशासन की ओर से यहां व्यवस्था बनने के लिये पुलिस बल भी तैनात कर दिया गया है।

अस्पतालों में भी आॅक्सीजन के लिये मारामारी

अस्पतालों में भी आॅक्सीजन की कमी के कारण रोजना मरीज दम तोड़ रहे हैं। आये दिन मरीजों के परिजन आॅक्सीजन की कमी होने पर हंगामा कर रहे हैं, लेकिन बावजूद उसके व्यवस्था ठीक प्रकार से नहीं हो पा रही है। सोमवार को भी रिठानी रोड स्थित कृष्ण एयर प्रोडक्ट के बाहर वाहनों की लंबी लाइन लगी रही।

यहां सिर्फ अस्पताल संचालकों को ही आॅक्सीजन दी जा रही है, लेकिन अगर आॅक्सीजन दी जा रही है तो लोग मर क्यों रहे हैं इस सवाल का जवाब किसी के पास नहीं है। प्रशासन की ओर से व्यवस्था की गई है कि यहां तीन प्लांटों पर सिर्फ अस्पताल संचाकों को ही आॅक्सीजन दी जाए, लेकिन प्लांटों से अस्पतालों के लिये भी ठीक प्रकार से आॅक्सीजन सप्लाई नहीं हो पा रही है। अगर आॅक्सीजन अस्पतालों में पहुंचाई जा रही है जो लोग आॅक्सीजन की कमी के कारण मर क्यों रहे हैं।

बिजौली स्थित मेरठ मेडिमेक्स और कृष्णा एयर प्रोडक्ट पर सोमवार को वाहनों की लाइन लगी थी। यहां अस्पतालों से आये वाहनों में आॅक्सीजन दी जा रही है, लेकिन कुछ लोगों का आरोप है कि यह आॅक्सीजन अस्पतालों तक पहुंच ही नहीं पाती। अगर अस्पतालों में ठीक प्रकार से आॅक्सीजन जाये तो यहां आॅक्सीजन की कमी ही न हो और लोग आॅक्सीजन के लिये परेशान ही ना हों।

आज प्लांटों से हुई 2941 सिलेंडरों की आपूर्ति

शहर में स्थित आॅक्सीजन प्लांटों से सोमवार को 2941 आॅक्सीजन सिलेंडरों की आपूर्ति की गई। जिसमें कन्सल गैस एजेंसी से 1051 आॅक्सीजन सिलेंडरों, हापुड़ रोड बिजौली स्थित मेरठ मेडिआॅक्सी से 1132, अग्रवाल गैस से 388, कृष्ण गैस एजेंसी से 112, महेश्वरी गैस एजेंसी से 258 सिलेंडरों की आपूर्ति अस्पतालों व अन्य व्यक्तियों को की गई। कुल मिलाकर सभी प्लांटों से 2941 सिलेंडर लोगों को बांटे गये। वहीं, दूसरी ओर सोमवार को अग्रवाल गैस को 6 टन, मेडिआॅक्सी मेरठ को 15 टन, कन्सल गैस एजेंसी को 10 टन व कृष्ण गैस को 4 टन आॅक्सीजन उपलब्ध कराई गई।

तीसरे दिन भी बिना आॅक्सीजन के वापस लौटे लोग

शहर में अब पांच प्लांटों पर आॅक्सीजन मिल रही है। जिनमें से तीन प्लांटों पर अस्पताल संचालकों को और दो प्लांटों पर आम आदमी को आॅक्सीजन दी जा रही है। लेकिन अस्पताल संचलकों को भी आॅक्सीजन के लिये लाइन में लगना पड़ रहा है। उधर, अग्रवाल गैस पर तीसरे दिन भी लोग बिना आॅक्सीजन सिलेंडर के ही वापस लौट गये। कुछ लोग तो ऐसे थे जो दो दिन से यहां लाइन में लगे थे, लेकिन उन्हें आॅक्सीजन नहीं मिल पाई।

उद्योगपुरम स्थित अग्रवाल गैस प्लांट पर पिछले दो दिन से आॅक्सीजन नहीं है। ऐसे में यहां आॅक्सीजन की आस में लगे लोगों को सोमवार को बिना आॅक्सीजन के ही वापस लौटना पड़ा। लोगों का कहना है कि संचालक दो-दो घंटे का समय देते हैं कि कैप्सूल आ जायेगा, इंतजार करो। लोग भी इसी आस में इंतजार करते रहते हैं कि आॅक्सीजन आ ही जाएगी और मिल भी जाएगी। यहां प्लांट संचालक ने ही नो स्टॉक का बोर्ड लगा रखा है उसके बावजूद लोग यहां आॅक्सीजन की चाह में खड़े हैं। लोगोंं का कहना है कि प्रशासन ने वादा किया था कि आॅक्सीजन की कमी नहीं होगी, लेकिन यहां हालात बद से बदतर हो चुके हैं। हम लोग सुबह से लाइन में लगे हैं, लेकिन यही नहीं मालूम कि आॅक्सीजन आयेगी की नहीं।

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