जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: आज सोमवार को प्रवर्तन निदेशालय यानि ईडी की कस्टडी खत्म होने के बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को न्यायिक हिरासत में तिहाड़ जेल भेज दिया गया है। दिल्ली शराब घोटाले के मामले में गिरफ्तार हुए सीएम की ईडी ने आगे कस्टडी की मांग नहीं की। जिसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजने का निर्णय लिया गया।
सीएम तिहाड़ के जेल संख्या-2 में रहेंगे। यहीं से वो दिल्ली सरकार भी चलाएंगे। सीएम से पहले जेल सख्या- 2 में आम आदमी पार्टी के सीनियर लीडर संजय सिंह को रखा गया था। अरविंद केजरीवाल के लिए यहां जगह बनाने के लिए जेल प्रशासन ने संजय सिंह को अब जेल संख्या-5 में शिफ्ट कर दिया है। सीएम इस सेल में अकेले रहेंगे।
उधर, दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय से कहा है कि वह धनशोधन मामले में हिरासत में रहने के दौरान मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल द्वारा आदेश पारित करने के मुद्दे पर विशेष न्यायाधीश को ब्यौरा सौंपे। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मनमोहन और न्यायमूर्ति मनप्रीत पीएस अरोड़ा की पीठ ने कहा कि धनशोधन मामले को देख रहे विशेष न्यायाधीश को निर्देश दिया जाता है कि अगर जरूरी है तो मामले पर कानून के तहत आदेश जारी करें। धनशोधन के इस मामले में ही केजरीवाल गिरफ्तार हुए हैं।
अदालत ने उस जनहित याचिका का निपटारा कर दिया जिसमें केजरीवाल को ईडी की हिरासत में रहते हुए मुख्यमंत्री के तौर पर आदेश जारी करने से रोकने का निर्देश देने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान ईडी के वकील ने कहा कि एजेंसी को याचिका में उठाए गए मुद्दे की जानकारी है। ईडी ने दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि वह केजरीवाल के हिरासत में रहने के दौरान मुख्यमंत्री की हैसियत से आदेश पारित करने के लिए उन्हें कोई सुविधा उपलब्ध नहीं करा रहे हैं।
केजरीवाल का प्रतिनिधित्व करने वाले वकील ने याचिका का जोरदार विरोध किया। उन्होंने कहा कि याचिका सुनवाई योग्य नहीं है और ईडी इस मामले से निपटने में सक्षम है। याचिकाकर्ता सुरजीत सिंह यादव ने जनहित याचिका में कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में केजरीवाल द्वारा इस तरह के आदेश जारी करना कानूनी ढांचे के साथ-साथ निष्पक्ष और उचित जांच के सिद्धांत के खिलाफ है। याचिका में ईडी को यह निर्देश देने का आग्रह किया गया था कि वह केजरीवाल को टाइपिस्ट, कंप्यूटर और प्रिंटर आदि उपलब्ध नहीं कराए।

