- मेरठ सहित देश भर के र्इंट भट्ठा संचालक हुए लामबंद
- कोयले के साथ जीएसटी स्लैब में कमी करने की मांग
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: केन्द्र सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ आखिरकार देश भर के र्इंट भट्ठा संचालकों ने आन्दोलन का बिगुल बजा दिया है। इस संबध में दैनिक जनवाणी ने अपने तीन अगस्त के अंक में इस समाचार को प्रमुखता के साथ प्रकाशित भी किया था। अभी फिलहाल 17 सितम्बर तक मेरठ सहित देश भर के विभिन्न भट्ठों पर से र्इंटों की बिक्री प्रतिबंधित की है।

मेरठ जनपद र्इंट निर्माता समिति के महामंत्री सतीश गुप्ता और मीडिया प्रभारी संजय गोयल ने बताया कि इस समय र्इंट भट्ठा संचालकोें की एक तो जीएसटी के बढ़े हुए स्लैब ने कमर तोड़ दी है दूसरा जो कोयला उन्हे असम से मिलता था उसकी आपूर्ति बंद कर दी गई है ओर उन्हें यूएसए से आयात किया गया कोयला दिया जा रहा है। संजय गोयल के अनुसार असम का कोयला उन्हें सस्ता पड़ता था जो कि लगभग पांच हजार रुपये टन आता था, लेकिन यूएसए का कोयला उन्हें 26 हजार रुपये टन मिल रहा है।

उन्होंने सरकार पर मोनोपोली का आरोप लगाते हुए मांग की कि एक तो उन्हे पुराने स्लैब के आधार पर ही जीएसटी की सुविधा उपलब्ध कराई जाए और दूसरा उन्हे यूएसए की जगह असम का कोयला ही उपलब्ध कराया जाए। जनपद र्इंट निर्माता समिति के पदाधिकारियों के अनुसार इन्ही सब दुश्वारियों को देखते हुए ही उत्तर प्रदेश र्इंट निर्माता समिति लखनऊ व आॅल इण्डिया र्इंट एंड टाइल्स मैन्यूफैक्चरिंग फैडेरेशन ने भी अखिल भारतीय स्तर पर र्इंट भट्ठों को बंद करने का फैसला लिया है। बताते चले कि मेरठ में लगभग सवा दो से ढाई सौ र्इंट-भट्ठे हैं।

