जनवाणी ब्यूरो |
लखनऊ: यूट्यूब पर बहुत सारे कम्युनिस्ट चैनल और इसके अलावा बहुत सारे मोदी विरोधी विदेशी मीडिया नेटवर्क अविमुक्तेश्वरानंद नाम के एक फर्जी आदमी को शंकराचार्य बताकर इंटरव्यू चला रहे हैं और वह फर्जी शंकराचार्य प्राण प्रतिष्ठा पर निराधार दावे कर रहा है और गलत तरीके से सवाल खड़े कर रहा है।
अविमुक्तेश्वरानंद खुद को उत्तराखंड के जोशीमठ का शंकराचार्य घोषित करते हैं परंतु असलियत यह है कि जोशीमठ के असली शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती हैं वासुदेवानंद सरस्वती जी श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य भी हैं लेकिन वह शांत प्रवृत्ति के हैं और ज्यादा हो हल्ला हंगामा करने में यकीन नहीं करते हैं। उनका एक बयान यूट्यूब पर मौजूद है जिसमें उन्होंने सारी बातें स्पष्ट की है।
रवीश कुमार ऑफिशल, आशुतोष के सत्य hindi . com, एनडीटीवी के पूर्व कर्मचारियों के चैनल द रेड माइक, बीबीसी के अंग्रेजी चैनल और करण थापर नाम के एक कम्युनिस्ट पत्रकार ने भी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य बताकर उनका इंटरव्यू लिया जबकि सच है कि अविमुक्तेश्वरानंद का मामला सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है और वह शंकराचार्य नहीं है परंतु यह अत्यंत दुख का विषय है कि मोदी विरोधी यूट्यूब चैनल अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य घोषित करके प्रचार कर रहे हैं और हिंदू समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचा रहे हैं।

मामले को जरा और गहराई से समझते हैं। देश में शंकराचार्य की कुछ 4 पीठें हैं गुजरात के द्वारिका पीठ के शंकराचार्य सदानंद सरस्वती जी हैं सदानंद सरस्वती जी जो टाइम्स नाउ नवभारत, इंडिया टीवी, जैसे कई राष्ट्रीय समाचार चैनलों पर लाइव बैठकर प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को अपना समर्थन दे चुके हैं। यह सारे इंटरव्यू यूट्यूब पर उपलब्ध है जिन्हें कोई भी देख सकता है। कर्नाटक के श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य स्वामी भारती तीर्थ जी बहुत कम बोलते हैं। मीडिया के सामने नहीं आते हैं लेकिन उन्होंने पत्र लिखकर के प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम का समर्थन दे दिया है। ओडिशा के जगन्नाथ पुरी पीठ के शंकराचार्य निश्चल आनंद सरस्वती ने भी पत्र लिख करके अपना समर्थन दे दिया है, हालांकि मोदी से निजी खुन्नस के चलते वह विवादित बयान दे रहे हैं लेकिन उनके पत्र में समर्थन की बात स्पष्ट है। जोशीमठ के शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती तो स्वयं श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य हैं और उनका समर्थन तो ट्रस्ट को है ही, लेकिन इसी जोशीमठ के फर्जी शंकराचार्य बन बैठे अविमुक्तेश्वरानंद लगातार कुत्सित प्रचार कर रहे हैं जिसका पुरजोर विरोध होना चाहिए।
प्राण प्रतिष्ठा को लेकर किसी भी तरह का सवाल खड़े करना इसलिए गलत है क्योंकि भगवान राम ने रामेश्वरम में पहले शिवलिंग की स्थापना की और बाद में मंदिर बना, लेकिन कांग्रेस पार्टी को समर्थन देने के लिए फर्जी शंकराचार्य बन बैठे अविमुक्तेश्वरानंद लगातार हिंदू समाज को आहत करने वाले बयान दे रहे हैं।
अगर देखा जाए तो चारों पीठ के सभी असल शंकराचार्यों ने प्राण प्रतिष्ठा को समर्थन दे दिया है। लेकिन इस बात का प्रचार नहीं कर केवल स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के बयान को तूल देना यह साबित करता है कि वामी मीडिया किसी टूलकिट के तहत मोदी विरोध के नाम पर रामद्रोही स्वरूप प्रदर्शित कर रहा है जो राष्ट्रद्रोह है और इनपर कार्रवाई होनी चाहिये।

