- नर्क झेल रही माधवपुरम की जनता की हुई सुनवाई
- पार्क स्थल पर सीवर की लाइन बंद कराने के निर्देश
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: शहर के बदहाल पड़े पार्कों की तरफ नगर निगम अधिकारियों का ध्यान न देने का यह नतीजा निकल रहा है कि पार्क दिनों दिन बदहाल हो रहे हैं। इनमें कूड़े के ढेर व कीचड़ से लोगों का पार्क में घूमने आना दूभर हो गया है। नागरिकों की लगातार शिकायतों पर सालों से कोई सुनवाई नहीं हो रही है। अब नगर निगम के अधिकारियों ने बदहाल पड़े इन पार्कों की सुध लेने का निर्णय लिया है।
और इसकी शुरुआत माधवपुरम के पार्क से की जा रही है। नगर निगम की ओर से माधवपुरम पार्क में सीवर लाइन बंद कराने के निर्देश के साथ यहां झाड़-फूस भी साफ करने के लिए निर्देश दिये गये हैं। यदि ईमानदारी से काम हुआ तो माधवपुरम पार्क में जल्द ही जनता को सहूलियत मुहैया हो सकेगी।
शहर में पार्कों के रखरखाव व उनके निर्माण का जिम्मा नगर निगम को वहन करना पड़ता है। इसके लिए नगर निगम के पास बाकायदा बजट भी होता है, लेकिन कई दशकों से यह पार्क बदहाल पड़े हुए हैं। शुरू में तो पार्कों में बाकायदा झूले और बेंच लगाई गर्इं, लेकिन धीरे-धीरे करके रखखाव के अभाव में यह सभी कबाड़ बनकर रह गये। टूटे हुए झूलों की सुध नहीं ली गई तो मरम्मत न होने से वह ज़ंग खाकर खुद ही गिर गये।
अब हालात यह है कि बदहाल पार्क लोगों की मुसीबत की वजह जरूर बन गया हैं। पार्क में जगह-जगह कूड़े के ढेर के साथ-साथ गायों का चारागाह बना हुआ है। बच्चा पार्क तो गायब ही हो गया है। जबकि लेडीज पार्क में सिर्फ एक बड़े झूले के अलावा कुछ भी नहीं है। यहां की बेंच टूट गई हैं।
बच्चों से सूने हुए सभी पार्क
कभी जो पार्क बच्चों की हंसी-खिलखिलाहट से गुलजार रहते थे, आज बदहाली के चलते सूने हो चुके हैं। कोरोना संक्रमण अब धीरे-धीरे खत्म हो रहा है और लॉकडाउन की पाबंदियां भी समाप्त हो चुकी हैं। ऐसे में, अभिभावक बच्चों को लेकर जब भी पार्कों का रुख करते हैं तो इनकी बदहाली के चलते उनको मायूस होकर वापस लौटना पड़ता है। पार्कों में सुबह-शाम टहलने आने वाले भी यहां आने से कतराते हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि पार्क का सुंदरीकरण हो जाए तो बच्चों समेत बड़ों को भी घूमने-टहलने की सुविधा मिलेगी।
पार्कों में लगे गंदगी-कूड़े के ढेर
विकास पुरी कालोनी में पार्क तो कूड़ा घर बन गये हैं। यही हाल माधवपुरम के पार्कों की है। यहां के सभी पार्क पूरी तरह से बदहाल है। आलम ये है कि कई सालों से यहां स्थित इस पार्क में बैठने के लिए एक बैंच भी नहीं लगाई गई है। पार्क के अधिकतर हिस्से में नजर डालेंगे, तो कूड़ा ही कूड़ा नजर आएगा। साथ ही मलबा और गाय चरती हुई नजर आ रही हैं। यहां के किसी भी पार्क में कोई साफ-सफाई भी नहीं होती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पूरी माधवपुरम आवासीय योजना में चार बड़े पार्क हैं, लेकिन यहां के निवासी इसका उपयोग नहीं कर सकते हैं। लोगों को सुबह-शाम सैर करनी हो तो, यहां ऐसे ही सड़क पर ही चहलकदमी करनी पड़ती है। लेकिन यह सड़कें भी टूट-फूट का शिकार हो रही हैं।
नगर निगम के साथ कई विभागों की टीम ने किया निरीक्षण
सोमवार की सांयकाल नगर आयुक्त अमित पाल शर्मा, अपर नगर आयुक्त ममता मालवीय, सी एंड डीएस जल निगम, डीएफओ, महाप्रबंधक (जल), सहायक अभियन्ता (जल), अवर अभियन्ता (जल) आदि के साथ माधवपुरम ग्रीन बेल्ट को विकसित करने के लिए तैयार किए गये प्रोजेक्ट पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। बनाये गये डीपीआर का अवलोकन करने पर डीएफओ द्वारा परामर्श दिया गया कि सर्वप्रथम सीवर लाइन को ठीक कराने का कार्य किया जाये अन्यथा उपवन में लगाये गये सभी पौधे खराब हो जायेंगे। उचित होगा कि पहले सीवर लाइन का कार्य ठीक कराने आदि का कार्य कराया जाये।
इसके बाद ही उपवन में अच्छी-अच्छी प्रजाति के पेड़ लगाकर आदर्श उपवन के रूप विकसित किया जा सकेगा। इस पर प्रोजेक्ट मैनेजर सी एंड डीएस वीके मौर्य द्वारा सहमति व्यक्त करते हुए नगर आयुक्त से चार दिन का समय मांगा गया। इस पर नगर आयुक्त द्वारा सी एंड डीएस के अधिकारियों व अभियंताओं को समय देते हुए सीवर की समस्या का पूरा विवरण तैयार कर ग्रीन बेल्ट विकसित करने के लिए अन्य विवरण भी लेकर आगामी बैठक उपस्थित होने के लिए निर्देशित किया गया।

