जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की आज जयंती है। तीस जनवरी को दिल्ली के बिड़ला मंदिर में नाथूराम गोडसे ने उनकी गोली मारकर हत्या कर दी थी। गांधी जी का मेरठ से बेहद लगाव था और तीन बार मेरठ दौरे पर आये थे। वो जब भी आए गढ़ रोड स्थित गांधी आश्रम में जरुर गए। मेरठ कालेज में उनके लिए हवन-यज्ञ भी हुआ था।
राजकीय स्वतंत्रता संग्राम संग्रहालय में उनके द्वारा लिखा गया अंतिम पत्र भी सुरक्षित रखा हुआ है। चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के प्रोफेसर विद्यनेश त्यागी ने बताया कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी यहां मेरठ कॉलेज, जिमखाना, असौड़ा हाउस, डीएन हाईस्कूल में आए थे। डीएन हाईस्कूल से उनकी सवारी घंटाघर तक निकाली गई थी। उन्होंने बताया कि गांधीजी और चौधरी रघुवीर नारायण सिंह के बीच गहरी मित्रता थी।

वह तीन बार मेरठ आए और तीनों बार असौडा हाउस जरुर गए। वहीं शहीद स्मारक में एक पत्र भी रखा हुआ है जिसे लेकर कहा जाता है कि यह महात्मा गांधी के द्वारा लिखा हुआ अंतिम पत्र है। इसके अलावा गांधीजी की तमाम फोटो भी रखी हुई है। दूसरी बार गांधी जी का मेरठ आगमन 1929 में हुआ। इस बार वह मेरठ में सविनय अवज्ञा आंदोलन की अलख जगाने मेरठ आए थे।
इस दौरान गांधी जी मेरठ जेल में बंद कैदियों से भी मिले थे। गांधी जी का अंतिम दौरा मेरठ में 1931 में हुआ। गांधीजी के 1920 के दौरे के बारे में प्रोफेसर केडी शर्मा ने बताया कि गांधीजी 22 जनवरी की सुबह कार से मेरठ पहुंचे। देवनागरी हाईस्कूल में उनका भव्य स्वागत हुआ और फिर एक जुलूस निकाला गया और सभाएं भी हुईं। आठ दिन के गांधीजी के कार्यक्रमों में हिंदू मुस्लिम काफी शामिल हुए थे। हिंदू चांद तारा और मुस्लिम टीका लगाकर चल रहे थे। इससे अंग्रेजी हुकूमत भी परेशान हो गई थी। जुलूस में कई लोग मिश्र, अरब और तुर्की के परिधानों को पहनकर आगे-आगे चल रहे थे।

