जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: पंचकूला की सीबीआई कोर्ट द्वारा उम्रकैद की सजा पाए डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को छत्रपति हत्याकांड में आज हाईकोर्ट ने बरी कर दिया है। हालांकि, इस मामले के अन्य तीन दोषियों कुलदीप, निर्मल और किशन लाल की सजा बरकरार रखी गई है।
हत्याकांड की पृष्ठभूमि
सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति को 24 अक्टूबर 2002 को उनके घर के बाहर गोली मारी गई थी, और 21 नवंबर को उनकी मौत हो गई। इससे पहले अगस्त 2002 में अज्ञात स्रोत से एक पत्र आया था, जिसमें डेरा की साध्वियों के साथ यौन शोषण और दुष्कर्म के आरोप लगाए गए थे। रामचंद्र ने इस पत्र की जानकारी अपने अखबार में प्रकाशित की थी।
जांच और मुकदमा
2003 में छत्रपति के बेटे अंशुल की याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी। नवंबर 2003 में हाईकोर्ट के आदेश के तहत सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की। 2004 में डेरा सच्चा सौदा ने जांच रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दी, जिसे खारिज कर दिया गया।
करीब 16 साल तक यह मामला पंचकूला की स्पेशल सीबीआई कोर्ट में चला। 2018-19 में सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल की। कोर्ट ने इसे सुनियोजित साजिश करार देते हुए गुरमीत राम रहीम, कुलदीप सिंह, निर्मल सिंह और कृष्ण लाल को दोषी ठहराया।
गुरमीत राम रहीम ने 2019 के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी, और आज हाईकोर्ट ने उन्हें बरी कर दिया। फिलहाल, वे दो साध्वियों के साथ दुष्कर्म के मामले में 20 साल की सजा काट रहे हैं और रोहतक की सुनारिया जेल में बंद हैं।

