सुबह छह बजकर 58 मिनट से 12 बजकर 34 मिनट तक शुभ मुर्हर्त
जनवाणी ब्यूरो |
बिजनौर: मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का बसंत पंचमी का त्यौहार बडे ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है। इस तिथि को विशेष महत्व इसलिए भी होता है क्योंकि ऋतुराज बंसत की शुरुआत इसी दिन से होती है। इस वर्ष 16 फरवरी को बसंत पंचमी का शुभ मुहूर्त प्रात छह बजकर 58 मिनट से लेकर 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा।
धार्मिक संस्थान विष्णुलोक के ज्योतिषविद् पंडित ललित शर्मा ने बताया कि बसंत पंचमी के दिन अबूझ मुहूर्त होता है। इस दिन शुभ कार्य को करने के लिए किसी मुहूर्त को देखने की आवश्यकता नही होती। माद्य शुक्ल पंचमी को बुद्धि, ज्ञान और कला की देवी मां शारदे की विधि-विधान से पूजा करने से बुद्धि का विकास होता है। मूलत बसंत ऋतु छह ऋतु और सर्वश्रेष्ठ इसलिए मानी जाती है, क्योंकि आज के ही दिन सृष्टि के सबसे बडे वैज्ञानिक बुझा ने मनुष्य के कल्याण के लिए बुद्धि, ज्ञान, विवेक की जननी माता सरस्वती का प्राकट्य किया था। अंग्रेजी कलेंडर के अनुसार यह पर्व जनवरी फरवरी में आता है, परंतु हिंदू कलेंडर के अनुसार माद्य मास की कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है।
बसंत ऋतु यानि पेड-पौधों के झूमने, गाने और खिलखिलाने का वक्त। जब प्रकृति चारों तरफ अपने रंग बिखेरती है, हर कोई इस ऋतु का आगमन प्रकृति को बासंती रंग से सराबोर कर जाता है। चारों ओर पीला ही पीला दिखाई देता है। पीले रंग का परिधान हमारे मस्तिष्क के उस हिस्से को अधिक अलर्ट करते है जो हमे सोचने समझने में मदद करता है, पीला रंग खुशी का भी एहसास कराता है।
पौराणिक गंरथों के अनुसार भगवान श्रीनारायण ने बाल्मीकि को सरस्वती का मंत्र बताया था जिसके जप से उनमें कवित्व शक्ति उत्पन्न हुर्ई थी। बसंत पंचमी के दिन स्नान आदि से निवृत्त होकर पूजा स्नान की सफाई करके मां सरस्वती की मूर्ति को स्थापित कर दे। इसके उपरांत मां शारदा की पूजा करे, उनको गंगाजल से स्नान कराए। पीले पुष्प, अक्षत, दीप, धूप आदि अर्पित करे। पीले फूलों की माला पहलाए, पीले फल अर्पित करे।

