- जंग खा रहा कबाड़ का जुगाड़, नगरायुक्त के आवास से चंद कदम की दूरी पर ही आपको हो जाएगा भ्रष्टाचार से सामना
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सौंदर्यकरण के नाम पर भ्रष्टाचार देखना है तो नगरायुक्त के आवास से चंद कदम की दूरी पर आ जाईये। यहां भ्रष्टाचार के सबूत भी मिल जाएंगे और भ्रष्टाचार का सौंदर्यीकरण किस तरह से फल-फूल रहा हैं, ये भी पता चल जाएगा। कमिश्नर आॅफिस चौराहे से सटकर नगरायुक्त आवास हैं। इसी से सटकर मेरठ कॉलेज हैं। इसके मुख्य द्वार के पास नगर निगम ने कबाड़ से सौंदर्यीकरण किया था। एक छोटा सा पार्क विकसित किया था। इसकी बाउंड्री ते कबाड़ से बनाई गयी थी, लेकिन पार्क के भीतर भी कबाड़ से सौंदर्यीकरण किया गया था।
ये तमाम सौंदर्यीकरण के उपकरण गल-सड़ गए हैं। इन पर पेटिंग तक नहीं की गई। सफाई इनकी कभी नहीं हुई। लगने के बाद से ऐसे ही ये उपकरण लगे हुए हैं। इनकी देख-रेख नहीं हुई। ये हाल तो कमिश्नर और नगरायुक्त के आवास नजदीक होने के बावजूद है। दूरदराज में जो सौंदर्यीकरण पार्क में किया गया, वहां तो कोई जाता ही नहीं होगा। उपकरण भी हो सकता है चोरी हो गए होंगे। पार्क में मोर पंखड़ी के पेड़ लगाये गए थे। ये पेड़ एक-दो नहीं, बल्कि 30 से ज्यादा लगाये गए हैं। ये भी लापरवाही के चलते सूख गए हैं।
इनमें पानी तक नहीं दिया गया। पानी नहीं मिलने से हरे-भरे पेड़ दम तोड़ गए, लेकिन इसका नगरायुक्त की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता। इस तरह से शहर स्मार्ट कैसे हो पाएगा? ये बड़ा सवाल हैं। नगर निगम के पास तमाम संशाधन हैं, पेड़ों में पानी देने के लिए। टैंक भी हैं और कर्मचारी भी। फिर पानी इन पेड़ों में क्यों नहीं दिया गया? इसके लिए जिम्मेदार कौन हैं? अभी कुछ पौधे हरे हैं, इनको अभी पानी मिल गया तो शायद इनको बचाया जा सकता हैं। कर्मचारियों को समय से वेतन भी मिल रहा हैं। कहने को नगर निगम के पास माली भी हैं,
लेकिन उनकी ड्यूटी अफसरों ने अपने घरों पर बैगार करने के लिए लगा रखी हैं। इसी वजह से पार्क में लगे पौधे सूख रहे हैं। इसके लिए जवाबदेही तो तय होनी चाहिए, लेकिन जब से डा. अमित पाल शर्मा नगरायुक्त बने है, तब से पूरा सिस्टम ही पटरी से नीचे उतरा हुआ हैं। भ्रष्टाचार खूब चल रहा हैं, जिसको लेकर एंटी करप्शन की टीम कई बार छापे मारकर कर्मचारियें को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ चुकी हैं,
लेकिन फिर भी लगता है कि नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों ने नहीं सुधरने की कसम खा ली हैं, तभी तो सौंदर्यीकरण के नाम पर भी भ्रष्टाचार सामने आ रहा हैं। जब नगर निगम ने पार्क डवलप किय हैं तो उसके देख-रेख की जिम्मेदारी भी नगर निगम के अफसरों की बनती हैं। खाली कबाड़ से सौंदर्यीकरण के नाम पर वाहवाही लूटना ही नहीं, बल्कि उसके देख-रेख की भी जिम्मेदारी बनती हैं।

