नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। सावन मास का आरंभ होते ही पूरे देश में शिवभक्ति का माहौल छा जाता है। इसी के साथ शुरू हो जाती है कांवड़ यात्रा, जो भगवान शिव के प्रति श्रद्धा, समर्पण और आस्था का प्रतीक मानी जाती है। हर साल लाखों की संख्या में शिवभक्त पवित्र नदियों से जल भरकर पैदल यात्रा करते हैं और उस जल को शिवलिंग या ज्योतिर्लिंग पर अर्पित करते हैं। सावन माह में आने वाले सोमवार, प्रदोष व्रत और शिवरात्रि जैसे विशेष दिनों पर कांवड़ यात्रा का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यता है कि इन शुभ तिथियों पर शिवलिंग पर पवित्र जल चढ़ाने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यदि आप भी इस साल कांवड़ यात्रा में भाग लेने की योजना बना रहे हैं, तो आपको कुछ जरूरी नियमों को ध्यान में रखना होगा।
कांवड़ यात्रा की शुरूआत
इस वर्ष कांवड़ यात्रा की शुरुआत 11 जुलाई 2025, शुक्रवार से होगी, जो कि सावन मास का पहला दिन है। यह यात्रा 23 जुलाई 2025 को सावन शिवरात्रि के दिन जलाभिषेक के साथ पूर्ण होगी। हालांकि देवघर जैसे तीर्थस्थलों पर पूरे सावन माह तक श्रद्धालु जल चढ़ाने के लिए कांवड़ यात्रा करते हैं।
सामग्री
यदि आप पहली बार कांवड़ यात्रा पर जा रहे हैं, तो कुछ वस्तुओं को अपने साथ अवश्य रखें। इसमें कांवड़, गंगा जल भरने के लिए पात्र, सजावट के लिए लाल-पीले वस्त्र और पुष्प, भगवान शिव की मूर्ति, फोटो, त्रिशूल, डमरू, रुद्राक्ष आदि शामिल हैं। इसके साथ ही चलने पर मधुर ध्वनि देने वाली घंटी, भजन, गीत या कीर्तन के लिए ऑडियो सिस्टम, श्रद्धालु के लिए लाल-पीले वस्त्र, गमछा, नी कैप, दातुन भी लेकर जा सकते हैं।
कांवड़ यात्रा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान
कांवड़ यात्रा एक पवित्र धार्मिक अनुष्ठान है, इसलिए इस दौरान धूम्रपान, शराब, भांग या किसी भी नशीली वस्तु से दूरी बनाकर रखें। यात्रा के दौरान शुद्ध आचरण, शुद्ध वाणी और मन की पवित्रता बनाए रखें।

