Monday, March 16, 2026
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बेहाल स्मार्ट सिटी: पुल जोगियान से पुरानी चुंगी तक भयंकर भ्रष्टाचार ?

  • मानकों के विपरीत हो रहा है डिवाइडर निर्माण, अधिकारी मौन

जनवाणी संवादाता |

सहारनपुर: नगर निगम के ठेकेदार अफसरों से मिलकर निर्माण कार्यों में जैसा भ्रष्टाचार कर रहे हैं, वह शर्मनाक है। जनता हालांकि, सब कुछ चुपचाप देख रही है। लेकिन, अफसरों, ठेकेदारों और पार्षदों तक का ऐसा गठजोड़ है कि हर कोई चुप्पी साधे है। कुल मिलाकर पूरे कुएं में भांग पड़ी है। पर कोई देखने वाला नहीं है।

स्मार्ट सिटी के नाम पर मिले मोटे बजट को किस कदर ठिकाने लगाया जा रहा है, इसके कई सारे उदाहरण हैं। पार्कों की पुरानी टाइल्स भले ही खराब न हुई हों, उन्हें तोड़कर नई टाइल्स लगाई जा रही हैं। यही हाल डिवाइडर निर्माण का है। शुगर मिल से मानकमऊ पुलिस तक बिना पुराना डिवाइडर तोड़े नया बनाया जा रहा है।

इसमें घटिया सामग्री का प्रयोग किया जा रहा। सरिया हो या सीमेंटे कोई गुणवत्ता पर खरा नहीं है। जनवाणी ने इस बाबत खबर छापी तो नगर निगम में खलबली मच गई। बहरहाल, यह काम रुकने का नाम नहीं ले रहा। सूत्र बताते हैं कि जो ठेकेदार इसका निर्माण कराया है, उसकी निगम अफसरों और मेयर तक पहुंच है। बहरहारल, अभी तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

फिलहाल, सहारनपुर को मिले बजट की बंदरबाट का एक और नमूना आपको पुल जोगियान से पुरानी चुंगी तक साफ नजर आ जाएगा। यहां भी पुराने डिवाइडर को बिना तोड़े ही निर्माण कार्य चल रहा है। डिवाइडर निर्माण में नियमों की अनदेखी की जा रही है। पुराने डिवाइडर में नाइट रिफ्लेक्टर तक उतारे नहीं गये हैं।

2012 से 2017 तक रही समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान सहारनपुर के महानगर क्षेत्र में नगर निगम द्वारा यातायात को व्यवस्थित करने के लिए चिल्काना रोड, चकराता रोड, पुराना शुगर मिल से मानकमऊ पुलिया होते हुए पूर्वी यमुना नहर,पुल जोगियान से पुरानी चुंगी, पुराना घास कांटा,बेहट बस स्टैंड, बेहट रोड़ स्थित रसूलपुर और घन्टाघर से अंबाला रोड पर डिवाइडर का निर्माण कराया गया था।

अब जबकि स्मार्ट सिटी योजना में शामिल किये गए सहारनपुर की सूरत संवारने के लिए करोड़ों रुपए का बजट आया हुआ है तो इसे ठिकाने लगाया जा रहा है। बजाय सहारनपुर को स्वच्छ ,सुंदर और व्यवस्थित बनाने के नगर निगम का पूरा अमला बजट की बंदरबांट में लगा हुआ है।

पुल जोगियान से पुरानी चुंगी तक चकराता रोड पर पहले से ही बने डिवाइडर के ऊपर बिना तोड़े ही बड़े डिवाइडर बनाए जा रहे हैं। यहां पर भी निर्माण मानकों को ताक पर रखकर काम जारी है।डिवाडर में लगाया जा रहा सरिया भी हल्का है और मैटीरियल भी मानक के अनुरूप नहीं है।

नियम के अनुसार निर्माण के दौरान अवर अभियंता को मौके पर मौजूद रहना चाहिए, इसके बावजूद यहां पर नगर निगम का कोई अधिकारी या कर्मचारी मौजूद नहीं होता। ठेकेदार के आदमी अपनी मर्जी के मुताबिक कार्य करते हैं। मानकों के विपरीत घटिया सामग्री का प्रयोग किया जाता है।

चकराता रोड पर पुराने डिवाइडर को बिना तोड़े ही बड़े डिवाइडर बनाए जा रहे हैं। पुराने डिवाइडर में लगे नाईट रिफ्लेक्टर तक भी नहीं हटाए गए हैं। पुराने शुगर मिल रोड से मानकमऊ पुलिया होते हुए बनाए जा रहे डिवाइडर की भी स्थिति ऐसी है। इस संबंध में आलोक श्रीवास्तव का कहना है कि इसकी जांच कराई जाएगी और उपयुक्त कार्रवाई अमल में लायी जाएगी।

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