जनवाणी संवाददाता |
सहारनपुर: चमनलाल महाविद्यालय में आयोजित 7वें उत्तराखण्ड राजनीति विज्ञान अधिवेशन एवं दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी (17–18 मार्च 2026) के समापन अवसर पर प्रख्यात शिक्षाविद् एवं शोधकर्ता राजीव उपाध्याय ‘यायावर’ को “सर्वश्रेष्ठ शोध प्रस्तुति सम्मान” से नवाजा गया। यह सम्मान उत्तराखण्ड के पूर्व मुख्यमंत्री एवं भारत सरकार के पूर्व शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक द्वारा प्रदान किया गया।
राजीव उपाध्याय ‘यायावर’ ने यह पुरस्कार अपने शोध-पत्र “कश्मीर की बौद्धिक स्मृति और सांस्कृतिक पहचान : ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में स्रोत समीक्षा” के लिए प्राप्त किया। उनके शोध में कश्मीर की प्राचीन बौद्धिक परंपरा, सांस्कृतिक समृद्धि और दार्शनिक विरासत का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया। शोध में उन्होंने राजतरंगिणी, नीलमत पुराण, शारदा पीठ, वसुगुप्त, अभिनवगुप्त, सोमानंद, उत्पलदेव, क्षेमेन्द्र, सोमदेव और मम्मट जैसे महत्त्वपूर्ण आचार्यों एवं साहित्यिक परंपराओं का उल्लेख किया।
राष्ट्रीय संगोष्ठी में हरियाणा, उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्यप्रदेश एवं हिमाचल प्रदेश से 200 से अधिक शोधार्थियों ने शोध-पत्र प्रस्तुत किए। चयनित शोध-पत्रों पर आधारित तीन ग्रंथों का विमोचन समापन समारोह में किया गया।
समारोह में उत्तराखण्ड पॉलिटिकल साइंस एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. एम. एम. सेमवाल, सेंटर फॉर जम्मू एंड कश्मीर स्टडीज के निदेशक डॉ. आशुतोष भटनागर, चमनलाल महाविद्यालय के प्रबंधक रामकुमार शर्मा, प्राचार्य डॉ. सुशील उपाध्याय, प्रोफेसर आशा राणा, डॉ. प्रकाश लाखेड़ा, डॉ. गुंजन जैन और डॉ. राखी पंचोला सहित अनेक विद्वान और शिक्षाविद् उपस्थित रहे।

