- दशलक्षण धर्म का पालन करते हुए आत्मा निर्मल बनाए ….
- श्री दिगम्बर जैन मंदिर पंचायती व सरजायती मे हो रहे पूजा पाठ
जनवाणी ब्यूरो |
नजीबाबाद: श्री दिगम्बर जैन समाज के तत्वावधान में आयोजित दशलक्षण पर्व कार्यक्रम में चौथे दिन सोशल डिस्टैंस के साथ पूजन पाठ का आयोजन किया गया। इस मौके पर धर्म चर्चा करते हुए उत्तम सत्य धर्म के संबध में बताते हुए वक्ताओं ने कहा कि दश्लक्षण पर्व अपनी आत्मा को निर्मल करने का पर्व है।
बुधवार को श्री दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर में सामूहिक पूजन कार्यक्रम में धर्मचर्चा करते हुए पूर्व प्रधान जिनेश्वरदास जैन ने कहा कि दशलक्षण पर्व के सभी दस अंगो का पालन अपनी आत्मा से करना चाहिए।
आत्म शुद्धि करने का पर्व दशलक्षण पर्व कहलाता है। उन्होने कहा कि जैन धर्म के दशलक्षण पर्व आत्मा को निर्मल बनाने के पर्व है। अजय ने कहा कि दशलक्षण पर्व के जो भी दस अंग है उन सबके पीछे उत्तम शब्द का विशेषण लगे होने का अर्थ यही है कि जब हम इन दस अंगों को अपनी आत्मा मे उतार लेते हैं तब ये विशेष धर्म यानि उत्तम सत्य बन जाता है।
सत्य वचन को ही मात्र सत्य नहीं कहा जा सकता जो लोग केवल बोलने मात्र को ही सत्य मानते है वह केवल एक समिति दायरा है। जबकि उत्तम सत्य धर्म का पालन करने वाला इस सत्य गुण को अपनी आत्मा में उतार लेता है और जब यह सत्य धर्म आत्मा का धर्म बन जाता है तो उत्तम सत्य कहलाता है। इसके साथ श्रीजी का सामूहिक अभिषेक किया और सामूहिक पूजन किया गया।
इस मौके पर जिनेश्वरदास जैन, अजय जैन, राजीव जैन, नमन जैन, दीपक जैन, जितेन्द्र जैन,अनुभव जैन, आदि जैन आदि ने सामूहिक अभिषेक व पूजन में भाग लिया। मूल नायक चन्द्रप्रभु भगवान की वेदी पर जिनेश्वरदास जैन, नमन जैन, दीपक जैन, आदि जैन, अनुभव जैन ने महावीर की वेदी पर अजय जैन ने सरजायती जैन मंदिर मे राजीव जैन, जितेन्द्र जैन ने पूजा की। पूजन कार्यक्रम में समला जैन, सुनीता जैन, संध्या जैन, सुषमा जैन, अलका जैन, रैना जैन, मंजू जैन, सुशीला जैन, सुनीता जैन रश्मि जैन, कुमकुम जैन मानवी जैन, वंदना जैन आदि ने श्री दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर में पूजन किया।

