Tuesday, March 17, 2026
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बिहार मतदाता सूची विवाद: सुप्रीम कोर्ट ने समयसीमा नहीं बढ़ाई, पर 1 सितंबर के बाद भी दावे-आपत्तियां स्वीकारने का रास्ता खुला

नई दिल्ली |

जनवाणी ब्यूरो: सुप्रीम कोर्ट ने शनिवार को बिहार की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची को लेकर चल रहे विवाद में अहम आदेश जारी किया। राजद (RJD) और एआईएमआईएम (AIMIM) द्वारा दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने स्पष्ट किया कि 1 सितंबर की समयसीमा बढ़ाई नहीं जाएगी, लेकिन इसके बाद भी दावे, आपत्तियां और सुधार स्वीकार किए जा सकते हैं, हालांकि उन पर विचार मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन के बाद ही किया जाएगा।

चुनाव आयोग के रुख को माना भरोसेमंद

जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने चुनाव आयोग के उस बयान को रिकॉर्ड पर लिया, जिसमें कहा गया कि “1 सितंबर के बाद भी सुधार और दावे स्वीकार होंगे, लेकिन उन पर कार्यवाही अंतिम सूची प्रकाशित होने के बाद होगी।”

कोर्ट ने इस पर सहमति जताई, लेकिन स्पष्ट किया कि इस वक्त समयसीमा को औपचारिक रूप से बढ़ाने का आदेश नहीं दिया जाएगा।

मतदाताओं की मदद के लिए अर्ध-कानूनी स्वयंसेवकों की नियुक्ति का आदेश

कोर्ट ने बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (BSLSA) को निर्देश दिया है कि वे राज्य के सभी जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों (DLSA) को आदेश जारी करें कि “मतदाताओं और राजनीतिक दलों की मदद के लिए अर्ध-कानूनी स्वयंसेवकों की नियुक्ति की जाए, जो ऑनलाइन दावे, आपत्तियां और सुधार दर्ज करने में तकनीकी सहायता दें।”

इन स्वयंसेवकों को जिला एवं सत्र न्यायाधीश (DLSA के अध्यक्ष) को गोपनीय रिपोर्ट सौंपनी होगी, जो बाद में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा संकलित की जाएगी।

राजनीतिक दलों से सक्रियता की अपील

कोर्ट ने राजनीतिक दलों को भी ‘सक्रिय’ रहने की सलाह दी और कहा कि अगर उन्हें मतदाता सूची में गड़बड़ी की आशंका है, तो वे समय रहते दावे और आपत्तियां दर्ज कराएं।

चुनाव आयोग की दलीलें

चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने कहा समयसीमा में विस्तार से पूरी प्रक्रिया प्रभावित होगी। 2.74 करोड़ मतदाताओं में से 99.5% ने दस्तावेज पूरे कर दिए हैं। राजद द्वारा दावा किए गए 36 मामलों में से केवल 10 दावे दाखिल किए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि बाकी दावे भी आयोग ने स्वीकार कर लिए हैं और जिन मतदाताओं के दस्तावेज अधूरे हैं, उन्हें 7 दिनों में नोटिस जारी किया जाएगा।

8 सितंबर को अगली सुनवाई?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अर्ध-कानूनी स्वयंसेवकों द्वारा दाखिल गोपनीय रिपोर्टों पर विचार किया जाएगा और इस मामले में अगली सुनवाई 8 सितंबर को होगी।

मामले का सारांश?

1 सितंबर की डेडलाइन औपचारिक रूप से नहीं बढ़ाई गई, लेकिन इसके बाद भी आवेदन लिए जाएंगे।

निर्वाचन आयोग ने भरोसा दिलाया कि मतदाता सूची नामांकन की अंतिम तिथि तक अद्यतन हो सकती है।

राजद और AIMIM ने अधिक समय की मांग की थी, जिसे कोर्ट ने फिलहाल नहीं माना।

विधिक स्वयंसेवकों की सहायता से मतदाताओं को सशक्त बनाने का निर्देश दिया गया है।

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