जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: किसानों की नाराजगी दूर करने के लिए केंद्र सरकार ने कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा तो कर दी, मगर भाजपा के सामने अब चुनौती खासकर चुनावी राज्यों में इस फैसले के दम पर किसानों को मनाने की है।
पार्टी और सरकार की मुश्किल यह है कि इस मामले में विपक्ष अब हमलावर है तो किसान संगठनों ने एमएसपी पर कानूनी गारंटी की मांग के साथ गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी के खिलाफ कार्रवाई करने की शर्त रख दी है। इसके अलावा कई किसान संगठन सरकार के इस फैसले से नाराज भी हैं।
बहरहाल प्रधानमंत्री द्वारा कृषि कानूनों की वापसी की घोषणा के बाद भाजपा ने इसे अपने पक्ष में भुनाने की बड़ी रणनीति तैयार की है।
चुनावी राज्य यूपी और उत्तराखंड सरकार और पार्टी संगठन को किसानों से सीधा संवाद साधने का निर्देश दिया गया है। जबकि पंजाब की राज्य इकाई के साथ हरियाणा सरकार को भी इस मोर्चे पर उतरने का निर्देश दिया गया है।
पार्टी की ओर से निर्देश दिया गया है कि संगठन और सरकार किसान वर्ग से सीधा संवाद करे। एमएसपी पर कानूनी गारंटी के मामले में पीएम की ओर से कमेटी गठित करने की घोषणा की जानकारी दी।
इस क्रम में शुक्रवार को जहां पश्चिम उत्तर प्रदेश में केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान ने डेरा डाला। वहीं यूपी और हरियाणा के सीएम ने किसान संगठनों से आंदोलन खत्म करने की अपील की।
मंत्री की विदाई तय
अगर किसान संगठन गृह राज्य मंत्री अजय मिश्रा के मंत्रिमंडल से इस्तीफे पर अड़े रहे तो सरकार उनका इस्तीफा ले सकती है। गौरतलब है कि लखीमपुर खीरी में किसानों पर कार चढ़ाने के मामले में मिश्रा किसान संगठनों के निशाने पर हैं।
शीत सत्र में मिल सकता है किसानों को तोहफा
- किसान वर्ग को साधने के लिए सरकार इसी महीने के आखिर में शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र में बड़ी घोषणा कर सकती है।
- एक केंद्रीय मंत्री के मुताबिक कई तरह के प्रस्ताव हैं। इसमें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि में बढ़ोतरी से जुड़ा प्रस्ताव भी है। सत्र में कृषि कानून की वापसी के संबंध में पेश होने वाले बिल पर चर्चा के जवाब में पीएम कृषि क्षेत्र और किसानों के लिए कई तरह की राहतों की घोषणा करेंगे।
- पीएम इसी दौरान कमेटी के स्वरूप की जानकारी देने के साथ इसी कमेटी द्वारा एमएसपी पर कानूनी गारंटी के मामले में भी रिपोर्ट मांगने की घोषणा कर सकते हैं।

