Tuesday, March 17, 2026
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भाजपा का जातिवादी पैंतरा

Samvad 49

KP MALIKआज देश में जातिवाद और धर्मवाद का भेदभाव जिस प्रकार से फैला है इसके चलते आज एक नफरत की दीवार सी खड़ी हुई है, उसके पीछे सबसे ज्यादा हाथ सियासत का ही है। कुछ जाति विशेष के लोगों की वजह से भी जातिवाद और धर्मवाद की दीवार आज हर शहर और हर गांव में भी पहुंच चुकी है। ये एक प्रकार से मानव समाज में फूट है, जिसका फायदा कुछ राजनीतिक लोग ही उठाते आए हैं और आज भी उठा रहे हैं। एक तरफ पिछले कई महीनों से राहुल गांधी जाति जनगणना पर जोर दे रहे हैं और इसके पीछे उनका मकसद जितनी जिसकी हिस्सेदारी, उतनी उसकी भागीदारी के हिसाब से सबको हक दिलाने का है, जिसका कि वो दावा करते हैं? क्या हुआ वास्तव में इनका इनका हक दिलाना चाहते हैं या वह भी अपनी सियासी रोटियां जाति जनगणना के तवे पर सेकना चाहते हैं? क्योंकि विरोधियों का यह भी कहना है कि लंबे समय तक कांग्रेस की ही सरकार थी तो तब कांग्रेस ने जातीय जनगणना क्यों नहीं कराई?

दरअसल, जातीय जनगणना और आरक्षण का ये मुद्दा कुछ राज्यों में लोकसभा चुनाव से पहले और कुछ राज्यों जैसे राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ आदि के विधानसभा चुनाव में जाति जनगणना का बिगुल इंडिया गठबंधन ने तब फूंका था, जब नीतिश कुमार भी इंडिया गठबंधन में थे। लेकिन भाजपा तो बिना जाति जनगणना का बिगुल फूंके ही जातिवाद और धर्मवाद को हर चुनाव में मुद्दा बनाती रही है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण 2014 का हरियाणा का विधानसभा चुनाव है, जहां भाजपा ने 35 एक का जातीय फार्मूला चलाया था। अब एक बार फिर हरियाणा में विधानसभा चुनाव के चलते भाजपा और संघ ने जीत का कोई चारा न देखते हुए, और भाजपा में मची भगदड़ के मद्देनजर रणनीति बनाई है कि हरियाणा में एक बार फिर जातीय समीकरणों को बिगाड़ कर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को जातिवाद के चक्रव्यूह में उलझाकर अपनी पार्टी को किसी भी तरह से जीत दिलाई जाए। हरियाणा में हुए पिछले दोनो चुनावों में भाजपा ने इसी जातिवाद के कार्ड को खेलकर आसानी से चुनाव जीते थे।

साल 2014 में और साल 2019 में भाजपा ने सबसे बड़ी आबादी वाले जाट समाज को अन्य जातियों से अलग करने का काम बखूबी किया था। अब भाजपा फिर से वही पैंतरा दोबारा चलकर जीत हासिल करना चाहती है। इसी के मद्देनजर भाजपा ने अपने और संघ के कार्यकर्ताओं को इस काम पर लगाया है कि वो लोगों के बारे में पता करें कि उनकी भाजपा के प्रति क्या राय है और उनमें जातिवाद का जहर कितना है और कितना ज्यादा से ज्यादा भरा जा सकता है। सूत्र बताते हैं कि जिले और तहसीलों में इस तरह की बैठकें लगातार चल रही हैं, जिनमें रणनीति बनाई जा रही है। जातिवाद का खेल खेलकर जीत हासिल करने के लिए भाजपा और संघ के कार्यकर्ता घर-घर जा रहे हैं और कोशिश कर रहे हैं कि लोग किसी भी तरह भाजपा को वोट करें।

सामाजिक कार्यकर्ता और विचारक फूल सिंह मलिक कहते हैं कि हर हल्के में हर एक जाति की टीम बनाई गई हैं, जो अपनी ही जाति के लोगों के एक-एक घर में जाएगी और अपनी जाति के लोगों को भाजपा के पक्ष में वोट डालने की अपील तो करेगी ही, साथ ही उस जाति के लोगों को प्रलोभन देगी। हल्के के हर गांव के, हर बूथ का पिछले चार विधानसभा चुनावों का यह डेटा-एनालिसिस किया गया है कि कौन से बूथ पर किस जाति से, किस उम्मीदवार को कितने वोट मिलते रहे हैं। इन जातीय टीमों को गांवों में बूथ के हिसाब से ये पता करने की जिम्मेदारी दी गई है कि फलां गांव के फलां बूथ पर फलां जाति के फलां घर ने फलां पार्टी को फलां साल वाले विधानसभा चुनाव में कितने वोट दिए थे। फिर उनमें जो हर बार पार्टी बदलते रहे या एक ही पार्टी पर चले आ रहे हैं, उनको छांटा गया और इस प्रकार से जो पार्टी बदलते रहे, उनको अपनी तरफ यानि भाजपा की तरफ करने की खास कोशिश की जा रही है, उनका मान मुनव्वल और मनुहारें करके उन्हें कई तरह के दिवास्वप्न दिखाकर और उनका महिमा मंडन करके किसी भी प्रकार उनको भाजपा के उम्मीदवार को वोट डालने के लिए मनाने की कोशिश की जानी है। इस प्रकार जो अब तक कांग्रेस, जजपा या इनेलो को वोट देते रहे हैं, उनको भाजपा की तरफ लाने का भरपूर प्रयास जाएगा। ये कार्यकर्ता हर घर, हर वोट को दूसरी पार्टी को वोट करके जिताने पर ये समझाएंगे कि उनके लिए दूसरी पार्टियों की जीत के बाद तरह-तरह के भय और समस्याओं का सामना करना करना पड़ेगा। इस प्रकार से ये कार्यकर्ता वोटर्स को भय, संशय और लालच देने का काम शुरू भी कर चुके हैं। मसलन, क्या आप कांग्रेस लाकर हरियाणा को भी पंजाब बनाना चाहते हो? इस प्रकार से इन कार्यकर्ताओं का इशारा खालिस्तान की तरफ रहेगा। दूसरा कहेंगे कि क्या कांग्रेस को लेकर मुस्लिमों को बढ़ावा देना चाहते हो? और इस प्रकार से ये कार्यकर्ता लोगों को इस तरह बहकाएंगे। यानि इनका मकसद एक ही होगा कि किसी भी तरह से वोटर्स को डराओ और हाथ से खिसकती हुई सत्ता को वापस लो।

इसी प्रकार से पूरे राज्य में कोशिश की जाए कि नॉन-जाट मतदाताओं को इस भरम में डाला जाए कि जाट भी भाजपा को वोट करते हैं, इसलिए ये न माना जाए कि जाट हमारे विरुद्ध ही खड़ा है और हमारे पक्ष में नहीं है यानि कि भरम में डाल दो कि भाजपा के साथ तो संख्या में सबसे ज्यादा जाट भी खड़े हैं और अगर आप वोट नहीं दोगे, तो भी भाजपा जीत रही है, लेकिन उसके बाद तुम्हें क्या मिलेगा? हारी हुई पार्टियों को जिताने में क्या मिलेगा? इसके अलावा कहा जाएगा कि आपको वोट राज्य के विधानसभा चुनाव को देख के नहीं, बल्कि राष्ट्रवाद देख कर राष्ट्रहित में वोट देना है यानि कि मतदाताओं की भावनाओं के थोथे झाड़ पर टांगकर ये लोग वोट मांगे। ये भी कहें कि क्या आप यह चाहते हो कि मुस्लिम या ईसाई आप पर या इस देश पर फिर से कब्जा कर लें? ये भी कहें कि किसान आंदोलन से लेकर पहलवान आंदोलन तक, सब विदेशों से फंडेड थे, जिसमें चीन, अमेरिका और पाकिस्तान इन सब आंदोलनों के पीछे खड़े हैं। यानि कि लोगों में झूठा प्रचार करके उनमें भ्रम और डर दोनों पैदा करके किसी तरह से वोट खींचो।

राजनीति के जानकारों की मानें, तो भाजपा और संघ के कार्यकर्ताओं को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस मामले को भाजपा के केंद्र, जिला, हल्का और पंचायत के स्तर के हर नेता, कार्यकर्त्ता और वोटर तक पहुंचाएं, ताकि वो न सिर्फ इससे सचेत रहें, बल्कि भाजपा के नेता और कार्यकर्ता जिस भी घर में वोट मांगने जाएं, तो यह मानकर जाएं कि भाजपा और संघ के कार्यकर्ता उस घर के वोटर्स को न्यूनतम यह सब बातें बोल के गया होगा और अब वोटर्स को बस फिर से पंप करना है यानि उसे भाजपा को वोट देने के लिए पूरी तरह मनाना है। भाजपा के एजेंडे में कहीं भी बेरोजगारी, महंगाई, आरक्षण, भागीदारी और विकास आदि की बात नहीं हैं और लोगों की इन बड़ी समस्याओं को भाजपा और संघ ने भी इस बार के हरियाणा के चुनाव प्रचार से कोसों दूर रखा है, जिससे लोगों को एक बार फिर से जाति और धर्म के चक्कर में फंसाकर अपने पक्ष में वोटिंग करवाई जा सके और किसी तरह हरियाणा की सत्ता छिनने से बचाई जा सके।

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