Sunday, May 26, 2024
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घूसखोर ब्रांच इंचार्ज गिरफ्तार

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  • वित्त निगम की अधीक्षिका पर एंटी करप्शन ने की कार्रवाई
  • करीब 12 दिन से रिटायर्ड फौजी वित्त निगम के चक्कर लगा रहा था

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: एंटी करप्शन की टीम ने वित्त निगम की कार्यालय अधीक्षिका को लैंड यूज सर्टिफिकेट देने के नाम पर आठ हजार रुपये मांगने के आरोप में रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। टीम ने अधीक्षिका के कब्जे से आठ हजार रुपये बरामद करते हुए उसे कब्जे में ले लिया। सिविल लाइन थाने में मुकदमा दर्ज कराया है। उत्तराखंड, गोपेश्वर रोड चमौली निवासी राजेन्द्र प्रसाद सेमवाल ने वर्ष 2010 में उत्तर प्रदेश वित्त निगम से नीलामी की 500 वर्गमीटर जमीन खरीदी थी।

आईटीबीपी से रिटायर्ड फौजी राजेन्द्र सेमवाल ने अपनी पत्नी के नाम से जमीन खरीद की थी। उक्त जमीन पर दूसरे पक्ष की ओर से एसडीएम कोर्ट उत्तराखंड में वाद दायर किया गया था। जिस पर राजेन्द्र सेमवाल से उक्त जमीन के लिए लैंड यूज सर्टिफिकेट वित्त निगम से मांगा गया था। राजेन्द्र ने सर्टिफिकेट बनाने के लिए पांडव नगर स्थित उत्तर प्रदेश वित्त निगम में कार्यालय अधीक्षिका कुसुम लता से चार जनवरी को संपर्क किया।

उसके बाद दस जनवरी को राजेन्द्र पांडव नगर वित्त निगम के आॅफिस पहुंचे और सर्टिफिकेट के लिए अधीक्षिका से बातचीत की। राजेन्द्र प्रसाद के अनुसार कार्यालय अधीक्षिका कुसुम ने सर्टिफिकेट बनाने के 10 हजार रुपये मांगे। कई बार वित्त निगम के चक्कर लगाने के बाद सर्टिफिकेट का सौदा आठ हजार में तय हुआ। राजेन्द्र ने रिश्वत के आठ हजार रुपये मांगे जाने पर एंटी करप्शन के अधिकारियों से संपर्क साधा और पूरे मामले की जानकारी दी।

बुधवार को राजेन्द्र प्रसाद सेमवाल को अधीक्षिका कुसुम लता ने फोन किया कि वह गाजियाबाद से बस अड्डे पहुंच गई है। आप पांडव नगर स्थित गन्ना भवन पर मिलो। करीब एक बजकर दस मिनट पर कुसुम लता जैसे ही सिविल लाइन क्षेत्र पांडव नगर स्थित गन्ना भवन पर राजेन्द्र प्रसाद से मिलने पहुंची और आठ हजार रुपये हाथ में थामे।

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वैसे ही एंटी करप्शन की टीम ने घेराबंदी कर उसे रंगेहाथ रिश्वत लेते गिरफ्तार कर लिया। एंटी करप्शन टीम कार्यालय अधीक्षिका को पकड़कर सिविल लाइन थाने ले गई। एंटी करप्शन की ओर से सिविल लाइन थाने में धारा 7 भ्रष्टाचार अधिनियम 1988 के तहत मुकदमा पंजीकृत कराया गया है।

ये था पूरा मामला

उत्तराखंड निवासी राजेन्द्र प्रसाद सेमवाल ने वर्ष 2010 में 500 वर्गमीटर की जमीन वित्त निगम की ओर से नीलामी के दौरान खरीदी थी। उक्त जमीन कुल साढ़े तीन सौ वर्गमीटर का कब्जा राजेन्द्र को मिला था। चूंंकि जमीन पर उत्तरांखड निवासी नारायरण सिंह ने 1987 में वित्त निगम से दस लाख का लोन लिया था, लेकिन लोन चुकता न होने पर वित्त निगम ने उसे अपने कब्जे में ले लिया था।

उस जमीन को नीलामी के तौर पर रिटायर्ड फौजी राजेन्द्र ने अपनी पत्नी के नाम पर बैनामा कराया था, लेकिन एक पक्ष इकबाल ने उक्त जमीन के डेढ़ सौ वर्गमीटर जमीन पर कब्जा कर रखा है। इकबाल की ओर से उत्तराखंड में एसडीएम के यहां वाद दायर किया था।

जिसको लेकर एसडीएम कोर्ट में राजेन्द्र प्रसाद को लैंड यूज सर्टिफिकेट जमा करना था। राजेन्द्र के अनुसार लैंड यूज सर्टिफिकेट के लिए उसने वित्त निगम में कुसुम लता से संपर्क किया था। राजेन्द्र के अनुसार वित्त निगम से लैंड यूज सर्टिफिकेट नहीं बनना था, लेकिन अधीक्षिका फिर भी उसे गुमराह कर रिश्वत मांग रही थी।

हत्या के आरोप में दोषमुक्त

न्यायालय पर जिला जज कोर्ट नंबर-1 मेरठ सुरेश चंद्र द्वितीय ने हत्या के आरोप में आरोपी आसिफ पुत्र यूसुफ, मोहम्मद इलियास पुत्र अनवर व एजाज पुत्र हमीद निवासीगण लिसाड़ी गेट मेरठ का को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त किया। आरोपी के अधिवक्ता नितिन कौशिक और एडवोकेट रवि कर मावी ने बताया कि वादी मुकदमा मोहम्मद साबिर ने थाना लिसाड़ी गेट मेरठ में रिपोर्ट दर्ज कराई कि दिनांक 18 मार्च 2020 को उसका भाई जावेद पहलवान इलियास के साथ स्कूटी से फतेउल्लाहपुर चौक पर जा रहा था।

तभी आरोपी आसिफ अपने साथियों के साथ आया और जावेद की स्कूटी रोक ली। तभी जावेद स्कूटी छोड़कर पवन की दुकान में घुसने लगा तो आरोपी व उसके साथी ने अवैध हथियार से जावेद की गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कर लिया।अभियुक्त गण के अधिवक्ता ने न्यायालय में उनके बेगुनाह होने के सबूत पेश किए। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुनकर आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त किया।

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