Wednesday, March 25, 2026
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आखिर बिना शह के कैसे फल-फूल रहा धंधा

  • तस्करी की शराब ने सवाल किए खड़े, आबकारी और पुलिस के संरक्षण के बिना कैसे दिया जा रहा अंजाम

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कैंट का चैपल स्ट्रीट और चर्च रोड तो वानगी भर है। हकीकत तो ये है कि तस्करी की शराब ने पूरे शहर को मयखाने में तब्दील कर रख दिया है। हालात ये हो गयी है कि तस्करी की शराब की भारी भरकम कमाई के लालच में पुरुष ही नहीं बल्कि महिलाएं भी इसमें हाथ आजमा रही हैं।

बाकायदा संगठित गिरोह के तर्ज पर मेरठ ही नहीं बल्कि आसपास के इलाकों में भी अवैध शराब का धंधा फल-फूल रहा है। आबकारी विभाग और पुलिस भले ही अंजाम रहने का दावा करती हो, लेकिन जानकारों की मानें तो आबकारी व पुलिस के संरक्षण व हफ्ता वूसली के बगैर कोई भी ज्यादा दिन तक धंधा नहीं कर पाता।

शाम ढलते ही शहर मयखाने में तब्दील

हरियाणा और दूसरे राज्यों से तस्करी कर लायी जाने वाली प्रतिबंधित शराब के चलते शाम ढलते ही पूरा शहर मयखाने में तब्दील हो जाता है। जगह-जगह पीने पिलाने के शौकीन बोतलें खोलकर बैठ जाते हैं। न आबकारी का खौफ न पुलिस के पकडेÞ जाने का डर। जो नजारा होता है उसे देखकर मेरठ नहीं बल्कि गोवा सरीखे किसी राज्य का गुमान होता है या फिर किसी फिल्मी बस्ती सरीखा नजरा शहर के कई खासतौर से पिछले इलाकों में नजर आता है।

सरकार की नाक के नीचे गोरखधंधा

शहर को मयखाने में तब्दील कर देने वाला अवैध शराब का ये गोरखधंधा सरकार की नाक के नीचे चलता है। आबकारी विभाग और पुलिस की जिम्मेदारी है अवैध शराब के तस्करों पर अंकुश लगाने की, लेकिन जो हालात नजर आते हैं उन्हें देखकर तो यही कहा जा सकता है कि कार्रवाई के बजाए यहां तो अवैध शराब के धंधेबाजों का आबकारी व पुलिस का खुला संरक्षण हासिल है। जिसके चलते अवैध शराब का धंधा नित नए आयाम स्थापित कर रहा है।

छोटी मछलियों पर ही कार्रवाई

आबकारी व पुलिस की यदि कार्रवाई की बात की जाए तो कार्रवाई के नाम पर सिर्फ छोटी मछलियों पर ही जाल डाला जाता है। इस धंधे के बडेÞ लोगों पर पिछले एक साल के दौरान कोई कार्रवाई की गयी हो ऐसा याद नहीं आता। ज्यादातर कार्रवाई उनके खिलाफ की गयी हैं जो दो चार पेटियां लेकर आ रहे होते हैं। रमेश प्रधान या फिर सोनिया सरीखों के गोदामों पर पिछले एक साल में कोई बड़ी कार्रवाई ध्यान नहीं आती। कार्रवाई के पर 10-20 बोतलें लेकर चलने वालों को ही दबोच कर फाइल को दुरुस्त रखने का काम किया जाता है।

एक आध नहीं, पूरे शहर पर कब्जा

अवैध शराब के धंधे से लगे लोगों की यदि बात की जाए तो धंधा कितना संगठित होकर किया जा रहा है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ऐसे लोगों का शहर के दो चार नहीं बल्कि पूरे शहर और देहात के इलाकों पर कब्जा है। किया सिर्फ इतना गया है कि इलाकों को अवैध शराब के धंधे बाजों ने बांट लिया है। शायद यही कारण है जो शाम ढलते ही पूरा शहर मयखाना नजर आता है। जगह जगह स्ट्रीट बार खुल जाते हैं।

ये कहना है डीईओ का

इस संबंध में जिला आबकारी अधिकारी आलोक कुमार का कहना है कि अवैध शराब के धंधे पर सख्ती से अंकुश लगाया गया है। किसी भी कीमत पर इसको पनपने नहीं दिया जाएगा। प्रवर्तन दल आए दिन कार्रवाई करता रहता है। यदि कोई सूचना है तो उस पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी।

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