- सालाना 100 करोड़ के टर्नओवर वाले खद्दर के कारोबारी हैं बेहाल
- करीब तीन लाख को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार है मिलता
- कश्मीर से कन्याकुमारी तक होता है माल सप्लाई
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: कोरोना के चलते लागू किए गए लॉकडाउन से धंधे पर मंदी की बुरी मार के चलते खद्दर के थोक कारोबारियों को सीजन में भी ग्राहकों की बाट जोहनी पड़ रही है। खद्दर के बडे कारोबारी जिनका पूरे देश में कश्मीर से कन्याकुमारी तक माल जाता है उनका कहना है कि अक्टूबर माह से लेकर जनवरी माह तक भरपूर सीजन होता है।
हालत यह होती है कि तड़के से लेकर देर रात तक माल की बुकिंग, ढुलाई और लदान करते हैं, उसके बाद भी माल के आर्डर पूरे नहीं कर पाते हैं, लेकिन इस बार मानों धंधे को नजर लग गयी है। ये दिन सीजन के होते हैं, लेकिन अफसोस की बात तो यह है कि सीजन होते हुए भी ग्राहकों का इंतजार करना पड़ रहा है।
कारोबारी हालात बद से बदतर बने हुए हैं। नौबत यह आ गयी है कि जन कारोबारियों ने बैंक से लोन लिया हुआ है उनकी किश्ते रुक गयी हैं। बैंक ब्याज पर ब्याज वसूल रहा है। शोरूम को किराया तक नहीं निकल पा रहा है। जो नियमित खर्चे हैं सो अलग। कारोबार में इतना बुरा दौर इससे पहले कभी नहीं देखा।

लूम, सूत व रंग कारोबार भी बेहाल
सीजन के पिट जाने का असर केवल खंदक मार्केट पर ही नहीं पड़ा है। खंदक के कारोबार से पावर लूट, सूत और रंग के कारोबारियों का सीधा जुड़ा होता है। दरअसल ये तमाम कारोबार एक दूसरे के पूरक है। जब खंदक की थोक मार्केट में आर्डर आता है तभी पावरलूम कारोबारियों को आर्डर मिलता है। पावरलूम कारोबारियों को आर्डर मिलता है तो फिर सूत व रंगाई वालों का भी काम चलता है। इस साल ऐसी बुरी मंदी देखने को मिल रही है कि सभी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।
तीन लाख परिवारों का जलता है चूल्हा
यूं कहने को खंदक में करीब पांच सौ छोटे बडे प्रतिष्ठान हैं। खंदक के अलावा शहर में अन्य इलाकों जिनमें नौचंदी व लिसाड़ीगेट तथा सरधना सरीखे इलाके भी शामिल हैं। यहां के कारोबारी वो चाहे खद्दर कारोबारी हो या फिर पावरलूम व रंग तथा सूत के कारीगर सभी के तार एक दूसरे से जुडे हैं। एक अनुमान के अनुसार ये सब मिलकर प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से करीब तीन लाख की रोटी रोजी का जरिया हैं। लेकिन इस साल धंधे पर मंदी की मार के चलते सबके चूल्हे ठंडेÞ पडेÞ हैं।
पूरे देश में बजता है डंका
मेरठ के खद्दर कारोबार की यदि बात की जाए तो इसका डंका देश ही नहीं बल्कि पड़ोसी मुल्कों में भी बजता है। मेरठ की खंदक मंड़ी से माल की बुकिंग कराने वाले कई ऐजेंट तो ऐसे भी हैं जो बंगलादेश और नेपालउ सरीखे देशों में भी मेरठ में तैयार होने वाले कपड़ा भेजा करते हैं। देश का कोई ऐसा राज्य नहीं जहां मेरठ से थोड़ में कपड़ा न जाता हो।
सरकार को राजस्व की हानि
खंदक के खद्दर मार्केट में इस साल पिछले साल सरीखा काम न होने की वजह से सरकार को भी भारी भरकम राजस्व का नुकसान हो रहा है। केवल खद्दर मार्केट में माल की बुकिंग से ही जीएसटी के रूप में राजस्व नहीं मिलता, बल्कि पावरलूम चलती हैं तो बिजली बिलों के रूप में राजस्व मिलता है। इसी प्रकार से तमाम तरीके हैं जिनसे राजस्व की प्राप्ति होती है।
कश्मीर से कन्याकुमारी तक सप्लाई
खंदक के खद्दर मार्केट के कारोबार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कश्मीर से कन्याकुमारी तक माल की सप्लाई की जाती है। देश का कोई राज्य ऐसा नहीं जहां बुकिंग एजेंट खंदक से माल न भेजते हैं। सीजन में हालात चौबीस घंटे काम के होत हैं। माल की बुकिंग से लेकर उसकी पैकिंग, काउंटिंग, खंदक से सिटी स्टेशन और वहां से दूसरे राज्यों के लिए माल का लदान। चार महीने का सीजन पूरे साल की कसर पूरी कर देता है।
लॉकडाउन ने पीट दिया सीजन
कारोबारी बताते कि इस साल का सीजन कोरोना संक्रमण के कारण लगाए गए लॉकडाउन की वजह से बुरी तरह से पिटा हुआ है। हालांकि सरकार ने अनलॉक की घोषणा कर दी है, लेकिन अभी भी कई ऐसे दूरदराज खासतौर से देश के पश्चिमोत्तर राज्य वहां से माल की बुकिंग के ऐजेंट नहीं आ पा रहे हैं। थोड़ा बहुत जो काम है वो मोबाइल पर वाट्सएप के जरिये सैंपल भेजकर चल रहा है। इसके अलावा जो माल बुक हो रहा है पूरी क्षमता से टेÑनें न चलने की वजह से माल की ढुलाई पर बुरा असर पड़ रहा है।
राहत पैकेज की दरकार
खंदक के कारोबारियों का कहना है कि जो कारोबारी हालात बने हुए हैं उसके मददे नजर खद्दर कारोबार से जुडेÞ तमाम छोटे बड़े उद्यमियों के लिए सरकार की ओर से राहत पैकेज की घोषणा करनी चाहिए। यदि सरकार ने इस वक्त राहत पैकेज का एलान नहीं किया तो इससे प्रत्यक्ष व परोक्ष जुडेÞ कारोबारियों की कमर टूट जाएगी। कारोबारी हालात पर जनवाणी संवाददाता ने खंदक के कुछ कारोबारियों से बात भी की।
सीजन में ग्राहक का इंतजार
व्यापार संघ के मंत्री व खद्दर कारोबारी अंकुर गोयल का कहना है कि हर साल इन दिनों में कारोबारियों को खाना खाने तक की फुर्सत नहीं हुआ करती थी, लेकिन इस साल ऐसा बुरा मंदा है कि ग्राहक के लिए सीजन में इंतजार करना पड़ रहा है।
राहत पैकेज की घोषणा की जाए
नई सड़क व्यापार संघ के अध्यक्ष सचिन गुप्ता का कहना है कि उनके बाजार में कपडे के अनेक कारोबारी हैं। कपड़ा कारोबारियों के हालात देखते हुए उनके लिए सरकार की ओर से यदि राहतों का एलान कर दिया गया तो काफी मदद मिल जाएगी। सरकार इस संबंध में गंभीरता से विचार करे।
लोन की किश्त पड़ रही भारी
खंदक के शिवम टैक्सटाइल के मालिक व खद्दर कारोबारी नवीन अरोरा का कहना है कि इस साल का सीजन बुरी तरह से पिट गया है। इससे पहले लॉकडाउन के चलते काम पर बुरा असर पड़ा था। लॉकडाउन के बाद प्रशासन ने खंदक बाजार खुलवाने में भी काफी देरी की। जिससे धंधा पिट गया और बैंक की किश्तें मुसीबत बनी हैं।
एक-दूसरे से जुडे हैं
खद्दर कारोबारी नवकार टैक्सटाइल के रोहित जैन बताते हैं कि खंदक के कपडे का कारोबार है कि उससे लूम, सूत और रंग वालों के अलावा ताना बाना सरीखे कारीगर समेत दर्जनों छोटे बडे काम वाले जुडे हैं। जब बाजार में ही काम नहीं तो किसी का भी काम नही हैं।
यह सीजन हो गया खराब
वर्धमान टैक्सटाइल के सौरभ जैन का कहना है कि केवल खंदक बाजार के कारोबारी का ही नहीं बल्कि सभी का इस साल का सीजन लॉकडाउन की भेंट चढ़ गया है। यह पूरा साल बर्बाद हो गया है। अब तो अगले सीजन पर ही उम्मीद टिकी है।
सब्र करने के अलावा नहीं कोई रास्ता: श्री शांति नाथ खादी भंडार के मालिक सुभाष चंद का कहना है कि यह सीजन तो हाथ से निकल गया। इसकी वजह लॉकडाउन हो या फिर कुछ और लेकिन कारोबार में उतार चढ़ाव आते रहते हैं। कारोबारी के पास केवल संयम और सब्र रखने के अलावा कोई दूसरा रास्ता भी तो नहीं है।

