- कहा, किसान अपने-अपने ट्रेक्टरों पर लिख दें फाईटर
- प्रशासन के आश्वासन के बाद महापंचायत में हुआ धरना समाप्ति का ऐलान
जनवाणी संवाददाता |
मुजफ्फरनगर: किसान महापंचायत के बाद 13 दिनों से मुजफ्फरनगर के जीआईसी ग्राउन्ड में चल रहा किसानों का धरने को समाप्त करने की घोषणा की गयी। इससे पहले महापंचायत में सभी वक्ताओं ने केन्द्र व प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा। पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने मंच पर पहुंचकर किसान नेताओं से वार्ता की और उनकी लगभग सभी मांगों को मानते हुए धरना समाप्त कराया। महापंचायत में 20 मार्च को दिल्ली में कूच करने का ऐलान किया गया है।
महापंचायत में भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता और किसान नेता चौधरी राकेश टिकैत सरकार पर जमकर बरसे। किसान नेता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा, जब 13 महीने तक दिल्ली में किसान धरना कर सकता है तो यहां भी कर सकता है। उन्होंने कहा कि मुद्दे बहुत ज्वलंत हैं। जिला प्रशासन के हाथ में भी कुछ नहीं है, जो भी निर्णय चल रहा है वह नागपुर से चल रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले भाजपा के एजेन्डे में किसानों को बिजली फ्री देने का वायदा किया गया था, परन्तु बिजली फ्री देना तो दूर उल्टे किसानों की ट्यूबवैलों पर बिजली विभाग मीटर लगाने के लिए पीएसी बुला रहा है। उन्होंने कहा कि आप मिलिट्री बुला लो लेकिन 2027 से पहले बिजली का मीटर नहीं लगेगा। मुफ्त बिजली का जिक्र घोषणा पत्र में किया गया है।
यदि बिजली का मीटर चोरी होगा तो किसानों की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। यह बात घोषणा पत्र में आनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि ऊर्जा मंत्री फ्री बिजली की बात करते हैं लेकिन जबरन मीटर लगाते हैं। उन्होंने कहा कि बिजली बिलों से ज्यादा जुमार्ना लगाया जा रहा है। जिन घरों में एक पंखा चल रहा है वहां बिजली विभाग छापेमारी कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि कोई बताए कि 10 साल में ट्रैक्टर, गाड़ियां और जनरेटर कैसे खराब हो जाते हैं। ट्रैक्टर ठीक खड़ा है लेकिन सरकार की नजरों में वह टूट गया है क्योंकि इससे बड़ी कंपनियों को फायदा होगा।
उन्होंने कहा किसानों से उनकी जमीन छीनने की योजना बनाई जा रही है। हाईवे पर किसानों की जमीन लेकर 14 इंच की सीमेंट की दीवार बनाई जाती है। किसानों के जाने के लिए केवल 7.5 फुट की चकरौड होती है और जब दोनों तरफ सीमेंट की दीवारें खड़ी हो जायेंगी, तो किसान कैसे अपने खेतों में बुग्गी या ट्रैक्टर ले जा पायेगा, उसके बाद किसानों की जमीन औने-पौने दामों में ली जाती है। उन्होंने कहा कि किसानों से जमीन लेकर कृषि भूमि का बैनामा कराया जाता है। उसका प्रयोग कमर्शियल में किया जाता है। यदि किसानों से जमीन लेकर खेती नहीं की जाती और कमर्शियल एक्टिविटी की जाती है तो कम से कम 3 फीट जगह छोड़नी पड़ेगी, नहीं तो किसान इन दीवारों को भी गिराने के लिए तैयार रहें।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 15 लाख देने की बात की। सब के खाते खुलवाए। लेकिन सरकार लोगों को 5 किलो अनाज देने पर आ गई। अब लोग यह भी सोच रहे हैं कि अनाज मिलेगा या नहीं मिलेगा।
चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार दस साल पुराने ट्रैक्टरों को बंद करने की बात कर रही है, लेकिन सरकार को यह नहीं पता कि यह ट्रैक्टर नहीं हैं, बल्कि फाइटर हैं। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वह अपने ट्रैक्टरों पर फाइटर लिख दें, उसके बाद देखना उनके फाईटर को कोई भी हाथ लगाने की हिम्मत नहीं करेगा।
महापंचायत को संबोधित करते हुए भाकियू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नरेश टिकैत ने कहा कि आंदोलन को समाप्ति का निर्णय तो कमेटी लेगी, परन्तु इस समय काम का समय है और खेतों में बहुत काम है, यदि प्रशासन मांगें मानता, तो धरना समाप्त कर देना चाहिए। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि सरकार बहुत खतरनाक है और किसानों का नास करना चाहती है।
2013 में जब नरेन्द्र मोदी मेरठ आये थे, तो उन्होंने किसानों की आमदनी दोगुणी करने की बात कही थी, तो उस समय उन्हें लगा था कि यह आदमी जरूर कुछ अच्छा करेगा और इसी धोखे में उन्होंने भी भाजपा को वोट देने व दिलवाने का काम किया था,परन्तु यह सरकार अमीरों की सरकार है और किसानों का कभी भी भला नहीं कर सकती है।

