Tuesday, March 17, 2026
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फर्जी स्टांप मामलों में तीन बिल्डरों के खिलाफ मुकदमा

  • उपनिबंधक कार्यालय की तहरीर पर थाना सिविल लाइन पुलिस ने की लिखा-पढ़ी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: फर्जी स्टांप घोटाला मामले में उप निबंधक कार्यालय की तहरीर पर बुधवार को थाना सिविल लाइन में तीन बिल्डरों की फर्म के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। जिनके खिलाफ यह मुकदमा दर्ज किया गया है उनमें मैसर्स पर्व एसोसिएटस, वेद एसोसिएटस व वासु एसोसिएटस शामिल हैं। इंस्पेक्टर सिविल लाइन रत्नेश सिंह ने बताया कि उपनिबंधक की तहरीर के आधार पर लिखा पढ़ी की गयी है। यह पूरा मामला फर्जी स्टांप से भूसंपत्ति का बैनामा कराने से जुड़ा है और ऐसा केवल मेरठ ही नहीं बल्कि जनपद गाजियाबाद में ही हुआ है। वहां भी जांच तय है। इससे पूर्व शासन के आदेश पर मंडलायुक्त की अध्यक्षता में गठित एसआईटी ने तीन स्टांप विक्रेताओं के लाइसेंस भी निलंबित कर दिए।

दरअसल, सरकार को राजस्व का चूना लगाने के लिए फर्जी स्टांप के केस लगातार सामने आ रहे हैं। अब तक की जांच में ऐसे 924 केस सामने आए हैं। शातिरों की इन कारगुजारियों से सरकार को अब तक करीब 10 करोड़ से ज्यादा के राजस्व का नुकसान पहुंचाया जा चुका है। जानकारों की मानें तो राजस्व नुकसान के ये आंकड़े और भी ज्यादा हो सकते हैं। ऐसे ही मामलों की जांच के लिए शासन के आदेश पर मंडलायुक्त की अध्यक्षता वाली एसआईटी गठित की गयी है। बताया गया है कि ये एसआईटी केवल मेरठ ही नहीं बल्कि गाजियाबाद में हुए स्टांप घोटाले व घपले की भी जांच करेगी। इस बीच बड़ी कार्रवाई एडीएम वित्त के स्तर से की गयी।

जिसमें फर्जी स्टांप लगाकर कोषागार से भुगतान कराने के संबंध में एडीएम वित्त ने तीन स्टांप विक्रेताओं का लाइसेंस निलंबित कर दिया है। बताया जाता है कि कुछ साल पहले उपनिबंधक कार्यालयों में फर्जी स्टांप लगाने का मामला पकड़ में आया था। जिसके बाद पिछले तीन साल में हुए भूसंपत्ति के बैनामों की विस्तृत रूप से जांच शुरू की गई। जांच के दौरान यह भी तथ्य सामने आया कि सबसे अधिक गड़बड़ी शहर में जो बैनामे हुए उनमें की गयी है। यहां फर्जी स्टांप लगाकर भू-संपत्ति का बैनामा कराया गया। अभी तक हुई जांच में जनपद में 924 राजस्व चोरी के मामले सामने आ चुके हैं। फर्जी स्टांप के प्रकरण की जांच के लिए प्रदेश के राजस्व सचिव डा. संजीव गुप्ता ने कमिश्नर सेल्वा कुमारी जे. की अध्यक्षता में एसआइटी का गठन किया है।

मंडलायुक्त की अध्यक्षता वाली एसआईटी में अपर पुलिस आयुक्त गाजियाबाद, मुख्य विकास अधिकारी गाजियाबाद व मुख्य विकास अधिकारी मेरठ को शामिल किया है। ये भी जानकारी मिली है कि इस मामले में एआइजी स्टांप कार्यालय द्वारा राजस्व चोरी करने वालों की बाकायदा लिस्ट बनाकर उनको नोटिस भी भेजे गए हैं। साथ ही उन्हें राजस्व जमा कराने के लिए एक मौका दिया गया। हैरानी तो इस बात की है कि फर्जी स्टांप मामले में शासन स्तर से कठोर कार्रवाई के बावजूद अभी तक केवल 30 लोगों ने ही जरूरी स्टांप शुल्क जमा कराया है।

फर्जी स्टांप लगाकर रिफंड लेने के प्रकरण में सिविल लाइंस थाने में मुकदमा भी दर्ज हो चुका है। सहायक महानिरीक्षक निबंधक ज्ञानेंद्र सिंह द्वारा की गई जांच में स्टांप विक्रेता शुभम शर्मा, अजय कुमार और आकाश वशिष्ठ की संदिग्धता सामने आई। सहायक महानिरीक्षक निबंधक की संस्तुति पर तीनों स्टांप विक्रेताओं का लाइसेंस एडीएम वित्त ने निलंबित कर दिया। एडीएम वित्त सूर्यकांत त्रिपाठी ने बताया कि अभी तक की जांच में तीन स्टांप विक्रेताओं की भूमिका संदिग्ध होना सामने आने पर उनका लाइसेंस निलंबित कर दिया है।

नकली नोट मामले में चार बैंकों पर एफआईआर

मेरठ: नकली नोट मामले में थाना सिविल लाइन में चार बैंकों के खिलाफ पांच मुकदमे दर्ज हुए हैं। करीब एक माह पूर्व भी दो बैंकों पर थाना सिविल लाइन में मुकदमे दर्ज कराए जा चुके हैं। ये पूरा मामला आरबीआई के कानपुर स्थित चेस्ट में मेरठ के बैंकों से जाने वाले कैश में नकली नोटों के निकलने से जुड़ा हुआ है। कानपुर चेस्ट में पिछले काफी समय से जो नकदी मेरठ से भेजी जा रही है, उसमें नकली नोटों की संख्या में तेजी से इजाफ हो रहा है। एफआईआर की कार्रवाई आरबीआई कानपुर के अफसर की तहरीर पर की गयी है।

आरबीआई अफसरों की चिंता की बड़ी वजह बैंकों के कैश में नकली नोटों को खपाने का प्रयास है। सरकारी व निजी बैंकों में नकली नोटों की जांच व उनको पकड़ने के सभी प्रकार के माकूल इंतजाम किए गए हैं। इसके बावजूद यदि बैंकों से भेजे जा रहे कैश में नकली नोट मिल रहे हैं तो फिर परेशानी का कारण है। इसको लेकर आरबीआई के स्तर से कई बिंदुओं पर जांच की जा रही है। जांच का दायरा बढ़ाया है। उसके बाद ही दो बैंकों के ब्रांच मैनेजर पर एफआईआर लिखी गयी है।

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