- कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 13 अप्रैल को सुबह पांच बजकर 46 मिनट से सुबह 10 बजे तक रहेगा
जनवाणी ब्यूरो |
बिजनौर: हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व माना गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि इसी दिन से हिंदू नववर्ष का आरंभ होता है। होली के बाद चैत्र नवरात्रि का प्रारंभ होता है। नवरात्रि में शक्तिस्वरूप मां दुर्गा की उपासना की जाती है।
धार्मिक संस्थान विष्णुलोक के ज्योतिषविद् पंडित ललित शर्मा ने बताया कि इस साल चैत्र नवरात्रि 13 अप्रैल मंगलवार से शुरू हो रहे है व समापन 21 अप्रैल को होगा। इस साल चैत्र नवरात्रि का आरंभ मंगलवार को हो रहा है, इस बार मां दुर्गा का आगमन अश्व पर होगा।
नवरात्रि में मां दुर्गा के वाहन का भी विशेष महत्व माना गया है। चैत्र नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि 12 अप्रैल को सुबह आठ बजकर एक मिनट से शुरू होकर 13 अप्रैल को सुबह 10 बजकर 17 मिनट पर समाप्त हो रही है।
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 13 अप्रैल को सुबह पांच बजकर 46 मिनट से सुबह 10 बजे तक रहेगा और अभिजीत मुहूर्त पूर्वाहन 11 बजकर 42 मिनट से 12 बजकर 33 मिनट तक है। चैत्र शुक्ला प्रतिपदा 13 अप्रैल मंगलवार से राक्षक नामक नया विक्रमी संबत 2078 प्रारंभ होगा।
नये संवत का राजा मंगल तथा मंत्री भी मंगल है। जब राजा और मंत्री के पद एक ही ग्रह के पास हो तो समाज में आवेश और क्रोध के कारण हिंसक एवं उपद्रव की घटनाएं अधिक होगी। राजनेताओं के मध्य टकराव एवं अविश्वास, समाज में रोग भय, भीषण अग्निकांड अधिक होगी। स्वयं राजा स्वयं मत्री जनेषु रोगपीड़ा चौराग्नि, शंका-विग्रह भयं च नृपाणम।

