- सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक कोर्ट ने जारी किये आदेश
- कोर्ट ने कहा सीबीआई के पास पर्याप्त सबूत मौजूद
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: 17 साल पहले हुए एकाउंटेंट डा. निर्मल शर्मा की हत्या के मामले में सुभारती ग्रुप के डा. अतुल कृष्ण की परेशानियां बढ़ने जा रही हैं। सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक कोर्ट ने आदेश जारी करते हुए कहा है कि निर्मल शर्मा हत्याकांड में डा. अतुल कृष्ण के खिलाफ सीबीआई के पास पर्याप्त सबूत हैं। इस कारण आरोपी को मुकदमे का सामना करना होगा। अदालत ने सीबीआई को आदेश दिये कि आरोपी के खिलाफ हत्या के मामले में आरोप तय किये जाएं।
स्पेशल जज एंटी करप्शन सीबीआई ईश्वर सिंह ने सुनवाई करते हुए आदेश दिये कि 14 अगस्त 2006 को डा. निर्मल शर्मा की हत्या हुई और लिखित शिकायत में मृतक के बहनोई तुशीन बिश्नोई ने सदर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। इसमें आरोपी डा. अतुल कृष्ण भटनागर व तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ. वर्तमान मामले में सीबीसीआईडी के बाद जांच शुरू की और अंत में आरोपी अतुल कृष्ण भटनागर और अन्य सहअभियुक्तों के खिलाफ धारा 120 बी 302 आईपीसी के तहत सीबीआई द्वारा आरोप पत्र दायर किया गया।
जांच में खुलासा हुआ है कि डा. अतुल कृष्ण भटनागर ने निर्मल शर्मा को खत्म करने के लिए सह-आरोपी तेजवीर और कुलदीप के साथ साजिश रची थी। उक्त साजिश को अंजाम देने की तैयारी के क्रम में सहआरोपी तेजवीर ने एक अन्य सहआरोपी मुकेश से संपर्क किया, एक परिचित कॉन्टैक्ट किलर सहआरोपी कुलदीप ने हथियार की व्यवस्था करने के लिए एक अनुज उर्फ भूरा से संपर्क किया और दो देशी हथियार और कारतूस खरीदे और कुलदीप को सौंप दिये।

कुलदीप ने आगे अपराध करने के लिए वाहनों की व्यवस्था की। साजिश को अंजाम देना और की हत्या कराने के लिये चार आरोपी मुकेश, कुलदीप, इरफान पहलवान और कुसुमवीर को सरंक्षण दिया। मौका पाकर मुकेश और इरफान ने निर्मल शर्मा पर फायरिंग कर दी, उसकी हत्या करके फरार हो गए। आरोपियों ने अपराध करने के बाद अभियुक्त डा. अतुल कृष्ण भटनागर को मोबाइल के माध्यम से हत्या के बारे में सूचित किया था।
जांच के दौरान सीआरपीसी की धारा 161 के तहत गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे और अभियुक्तों की स्वीकारोक्ति दर्ज की गई थी। आदेश में कहा गया कि जांच के दौरान जांच अधिकारी द्वारा एकत्र किए गए सभी साक्ष्य प्रथम दृष्टया आरोप के बारे में मजबूत संदेह पैदा करते हैं। अपराध का इस प्रकार सीबीआई द्वारा एकत्र किये गए तथ्य प्रथम दृष्टया मजबूत संदेह पैदा करने के लिए पर्याप्त है। चर्चा से यह उभर कर आता है कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री के आधार पर, अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंचती है कि प्रथम दृष्टया पर्याप्त सामग्री है
जो आरोपी आवेदक द्वारा अपराध किए जाने का दृढ़ता से संकेत देती है। रिकॉर्ड पर उपलब्ध सभी साक्ष्यों को उनके अंकित मूल्य पर विचार करने पर प्रथम दृष्टया चार्जशीट में उल्लिखित अपराध के तत्वों के अस्तित्व का पता चलता है। इसलिए, अभियुक्त अतुल कृष्ण भटनागर को आईपीसी की धारा 1208, 302 के तहत दंडनीय अपराधों के लिए दस्तावेजों और चार्जशीट की सामग्री के आलोक में योग्यता के आधार पर मुकदमे के लिए खड़ा होना है।

