Wednesday, March 18, 2026
- Advertisement -

बच्चे की सीख

Amritvani 21

बचपन से ही मुझे अध्यापिका बनने तथा बच्चों को मारने का बड़ा शौक था। अभी मैं पांच साल की ही थी कि छोटे-छोटे बच्चों का स्कूल लगा कर बैठ जाती। उन्हें लिखाती पढ़ाती और जब उन्हें कुछ न आता तो खूब मारती। मैं बड़ी हो कर अध्यापिका बन गई। स्कूल जाने लगी। मैं बहुत प्रसन्न थी कि अब मेरी पढ़ाने और बच्चों को मारने की इच्छा पूरी हो जाएगी। जल्दी ही स्कूल में मैं मारने वाली अध्यापिका के नाम से प्रसिद्ध हो गई। यह जाने बगैर कि मेरी पिटाई पर बच्चे मेरे बारे में क्या रखते होंगे? एक दिन श्रेणी में एक नया बच्चा आया। मैंने बच्चों को सुलेख लिखने के लिए दिया था। बच्चे लिख रहे थे। अचानक ही मेरा ध्यान एक बच्चे पर गया जो उल्टे हाथ से बड़ा ही गंदा हस्तलेख लिख रहा था। मैंने आव देखा न ताव, झट उसके एक चांटा रसीद कर दिया। और कहा, उल्टे हाथ से लिखना तुम्हें किसने सिखाया है और उस पर इतनी गंदी लिखाई! इससे पहले कि बच्चा कुछ जवाब दे, मेरा ध्यान उसके सीधे हाथ की ओर गया, जिसे देख कर मैं वहीं खड़ी की खड़ी रह गयी क्यों कि उस बच्चे का दायां हाथ था ही नहीं। किसी दुर्घटना में कट गया था। यह देख कर मेरी आंखों में बरबस ही आँसू आ गए। मैं उस बच्चे के सामने अपना मुंह न उठा सकी। अपनी इस गलती पर मैंने सारी कक्षा के सामने उस बच्चे से माफी मांगी और यह प्रतिज्ञा की कि कभी भी बच्चों को नहीं मारूंगी। इस घटना ने मुझे ऐसा सबक सिखाया कि मेरा सारा जीवन ही बदल गया।

janwani address 1

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

Bihar News: कॉल पर दी धमकी, फिर पुलिस से भिड़ंत, STF जवान शहीद, दो अपराधी मारे गए

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: पूर्वी चंपारण जिले के चकिया...

UP: गोरखपुर में भाजपा नेता की बेरहमी से हत्या, इलाके में दहशत

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: गोरखपुर के चिलुआताल थाना क्षेत्र...

UP: मुरादाबाद में दर्दनाक सड़क हादसा, ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकराई कार, चार युवकों की मौत

जनवाणी ब्यूरो । नई दिल्ली: भरी ट्रैक्टर-ट्रॉली में जा घुसी।...

सिलेंडर बिन जलाए रोटी बनाने की कला

मैं हफ्ते में एक दिन आफिस जाने वाला हर...
spot_imgspot_img