Sunday, April 5, 2026
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चौधरी का चक्र व्यूह वाला रथ

रामबोल तोमर |

मेरठ: चौधरी का ‘चक्रव्यूह’ वाला रथ वेस्ट यूपी में दौड़ रहा है। पश्चिमी का सियासी दांव रालोद राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी ने चल दिया है। ताबड़तोड़ जिस तरह से जनसभाएं जयंत चौधरी कर रहे हैं, वो भाजपा में बैचेनी पैदा कर रहा है। क्योंकि उसमें अच्छी-खासी भीड़ भी जुट रही हैं, जिसको लेकर भाजपा ने दीपावली के बाद बड़े कार्यक्रम करने का प्लान भी तैयार कर लिया है। विजय श्री का आशीर्वाद रथ जयंत चौधरी लेकर वेस्ट यूपी में किसानों के बीच दस्तक दे रहे हैं।

2022 का संग्राम रालोद के लिए राह कितनी आसान? जयंत का राजनीतिक दृष्टिकोन कितना होगा कामयाब? क्या पक रही गठबंधन की खिचड़ी। विजय श्री का आशीर्वाद पथ पर जयंत की बड़ी अग्नि परीक्षा होगी। क्योंकि भाजपा के लिए भी वेस्ट यूपी अहम हो गया है। भाजपा के कई दिग्गजों की प्रतिष्ठा भी वेस्ट में दांव पर लगी हुई है।

फिर भाजपा के लिए किसान आंदोलन भी बड़ी चुनौती हैं। किसान आंदोलन का ककहरा भाजपा कैसे तोड़ पाती हैं, यह भी बड़ी अहमियत रखता है। क्योंकि जिस तरह से वेस्ट यूपी के गांव की गली-गली तक किसान आंदोलन की आंच पहुंच गई हैं, उसका सामना भाजपा कैसे करेगी? यह भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती हैं।

सिलीगुड़ी के राज्यपाल सत्यपाल मलिक कह भी चुके है कि वेस्ट यूपी के गांव में भाजपा के नेता घूस नहीं पा रहे हैं। भाजपा विधायकों का जगह-जगह विरोध भी हो रहा है। कई जगह मुकदमें भी भाजपा ने दर्ज करा दिये हैं। वेस्ट यूपी में किसान आंदोलन के बाद जो राजनीतिक वातावरण तैयार हुआ है, उसकी शायद भाजपा ने कभी कल्पना भी नहीं की थी। क्योंकि 2013 में मुजफ्फरनगर में हुए दंगे के बाद भाजपा वेस्ट यूपी ही नहीं, बल्कि पूरे देश में छा गई।

भाजपा का विरोध करने वाले भी दंगे की हवा में ऐसे बह गए कि भाजपा के अलावा कुछ दिखाई ही नहीं दिया था। भाजपा के लिए सबकुछ ठीक-ठाक चल रहा था, लेकिन नौ माह पहले आरंभ हुए किसान आंदोलन ने गांवों की राजनीतिक तस्वीर ही बदल दी। अब जिस तरह के हालात पैदा हुए हैं, उसको रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी विजय श्री का आशीर्वाद रथ लेकर जनता के बीच दस्तक दे रहे हैं।

जनता उन्हें स्वीकार करती है या फिर नहीं, यह तो फिलहाल भविष्य के गर्भ में हैं, लेकिन जिस तरह से रालोद की जनसभाओं में भीड़ जुट रही हैं, उसके चलते भाजपा की बैचेनी बढ़ गई है। भाजपा ने अब 29 अक्टूबर को रालोद के चक्रव्यूह को तोड़ने के लिए लखनऊ में बैठक कॉल की हैं, जिसमें भाजपा के तमाम दिग्गज जुटेंगे, जिसमें वेस्ट यूपी को पूरा फोकस किया जा रहा है।

इस मीटिंग के बाद भाजपा के तमाम विधायकों व मंत्रियों को वेस्ट यूपी की कमान सौंपकर चुनावी मैदान में उतार दिया जाएगा। क्योंकि जनता के बीच ये नेता बहस करेंगे, अपना पक्ष रखेंगे तथा किसानों की नाराजगी को दूर करने की कोशिश भी होगी। गन्ना मूल्य 25 रुपये बढ़ाने, बिजली के बिलों की किसानों की माफी की दरकार लेकर किसानों के बीच पहुंचेंगे।

अब इस रणनीति में भाजपा कितनी कामयाब होती है, यह अभी कहना जल्दबाजी होगी, लेकिन भाजपा इतनी आसानी से जयंत चौधरी को वेस्ट यूपी को सौंपने वाली नहीं है। 4 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी मेरठ आ रहे हैं। यहां पर तब बड़ी जनसभा कर चुनावी रण का ऐलान किया जाएगा।

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