Thursday, December 9, 2021
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बेलगाम बंदरों ने किया जीना मुहाल

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  • जिला अस्पताल में रोज करीब 100 से ज्यादा लोग कुत्ते और बंदर काटने के पहुंच रहे

जनवाणी ब्यूरो |

मेरठ: बेलगाम बंदरों और कुत्तों ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। बंदर जहां लोगों को काट रहे हैं, वहीं नुकसान भी पहुंचा रहे हैं। जिलेभर में रैबीज के शिकार हो रहे मरीजों की संख्या निरंतर बढ़ती ही जा रही है। जिला अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों में बंदरों और आवारा कुत्तों के शिकार हुए मरीजों की संख्या सबसे अधिक देखी जा रही है।

जिला अस्पताल में इस वक्त बंदर और कुत्तों के काटने से जख्मी हुए करीब सौ लोग रोजाना आ रहे हैं। जिला अस्पताल में सुबह से ही मरीजों की लाइन लग जाती है। रेबीज के इंजेक्शन लगवाने वालोंं की संख्या लगातार बढ़ रही है। एक सप्ताह में 590 लोगों को इंजेक्शन लग चुका है। इसमें कुत्ते काटने से परेशान लोग भी शामिल हैं।

शहर हो या देहात इस वक्त चारों ओर बंदरों का आतंक मचा हुआ है। बता दें, शहर तथा ग्रामीम इलाकों में इन दिनों बंदरों का आतंक थमने का नाम महीं ले रहा है। बंदरों के काटने के अधिकतर मामले बच्चे, बुजुर्ग तथा महिलाओं के सामने आए हैं। बंदर छोटे बच्चे और महिलाओं को आसानी से शिकार बनाकर इन्हें जख्मी कर रहे है। पिछले डेढ़ महीने के भीतर बंदरों और कुत्तों ने करीब 600 से अधिक लोगों को अपना शिकार बनाया है।

इसके चलते लोग भयभीत नजर आ रहे हैं। लोगों ने बताया कि बंदरों का आतंक इस कदर मचा हुआ है कि डर के मारे उन्होंने अपनी छतों पर जाना छोड़ दिया है। बंदर सुबह और शाम को लोगों के घरों में घुस जाते हैं खाने पीने के सामान को बिखेरने के साथ-साथ कई बार बच्चों पर भी हमला कर देते है। इतना ही नहीं कमरों मे घुसकर सामान बिखेर देते हैं और बर्बाद करते है। आए दिन बंदरों और कुत्तों के हमले से कोई न कोई घायल हो जाता है।

बंदरों और कुत्तों के झुंड के सामने से गुजरना खतरे से खाली नहीं होता। बंदर इतने चालाक हैं कि घर के दरवाजे की कुंडी खोलकर फ्रिज में रखा सामान ले जाते हैं। हालात यह है कि लोग बंदरों से बचाव के लिए नए-नए नुस्खे अपना रहे हैं। गढ़ रोड़ स्थित कैलाशपुरी मोहल्ले में बंदरों के बढ़ते आतंक को देखते हुए 11 सदस्यों की कमेटी बनाई गई है। लेकिन उसके बावजूद लोगों को बंदरों से निजात नही मिल पा रही है।

बंदर के कारण लोग छतों पर कपड़े भी नही सुखाते क्योकि बंदर उन कपड़ों को फाड़ देते हैं या फिर लेकर भाग जाते हैं। वहीं, पिछले एक साल से तो बंदरों के काटने के मामले अधिक बढ़ गए हैं। वहीं, लोगों का कहना है कि नगर निगम में कई बार शिकायत करने के बाद भी बंदरों को भगाने के लिए कोई कारगर कदम नहीं उठाए गए हैं। इससे लोगों में रोष है। इसके साथ ही लोगों ने वन विभाग से मांग की है कि बंदरों के आतंक पर काबू पाने के लिए विशेष ध्यान दिया जाए और आवारा कुत्तों को भी पकड़ा जाए।

मेडिकल कॉलेज में भी बंदरों का आतंक

कोरोना काल में मेडिकल कॉलेज परिसर में बंदर लैब टेक्निशियन के हाथों से मरीजों के कोरोना टेस्ट के सैंपल लेकर भाग गया था। बंदर तीन रोगयों से संबंधित परीक्षण नमूने लेकर भाग गया था। बाद में बंदर को सैंपल टेस्ट किट चबाते हुए एक पेड़ के नीचे पाया गया था। वही, वन विभाग और नगर निगम एक दूसरे पर बात टाल देते हैं। उधर, वन विभाग जब भी अभियान चलाते हैं तो बंदरों को पकड़ कर छोड़ देते हैं। जिससे बंदर फिर वापस आ जाते हैं।

छत पर जाने से डरने लगी महिलाएं, 11 सदस्य टीम बारी-बारी से देती है पहरा

बंदरों के आतंक से बचने के लिए कैलाशपुरी मोहल्ले में बनी कमेटी के 11 सदस्य बारी-बारी से पहरा देते हैं और लाठी-डंडों से बंदरों को भगाते हैं। लोग अपना घर का कामकाज छोड़कर बंदरों से रखवाली करन के लिए बारी बारी से डयूटी करते हैं। कैलाशपुरी के अलावा साकेत, सदर, माधवपुरम, ब्रहमपुरी, सदर तहसील, सर्राफा, लाला का बाजार, शास्त्रीनगर, बागपत गेट, सिविल लाइन इलाकों में बंदरों ने आतंक मचा रखा है।

बंदर छतों पर कपड़े डालने जाने वाली महिलाओं को निशाना बना रहे हैं। प्यारेलाल जिला अस्पताल में रेबीज के इंजेक्शन लगवाने वालों की लंबी लाइन लगी हुई है। शुक्रवार एवं शनिवार को यहां 110 लोग इंजेक्शन लगवाने आए थे। बागपत गेट निवासी महिला सोहनवीरी ने बताया कि वह पानी लेने गई थी तभी तीन बंदरों ने हमला करके हाथ और गाल पर काट लिया। सदर तहसील निवासी गौरव ने बताया कि बंदर उनकी फ्रिज से सब्जी और फल निकाल कर खा जाते हैं।

उन्होंने बंदरों को भगाने की कोशिश की तो बंदरों ने उन पर हमला कर घायल कर दिया। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. हीरा सिंह ने बताया कि इन दिनों बंदरों और कुत्तों के काटे लोग ज्यादा आ रहे। अस्पताल में रैबीज के इंजेक्शनों की कमी नहीं है।

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