जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: शहर के कूड़ेदानों की हालत पिघल रही है। शहर में लगे इन कूड़ेदानों की हालत नगर निगम के दावे और कार्यशैली को बयां कर रही है। कमिश्नर अनीता सी. मेश्राम के आदेश के बाद नगर निगम सहित सभी 16 विभागों को आदेश के साथ चेतावनी दी गयी है कि शहर में कही भी गंदगी नही रहनी चाहिए।
बावजूद इसके विभागों के अधिकारियों की आराम की करवट अभी तक टूटी नही है और निगम के कर्मचारियों की नजर शहर में जर्जर हो रहे इन कूड़ेदान की तरफ नही पड़ी है। आदेशों के अनुसार डस्टबिन/ कंटेनर के बाहर कूड़ा डालने पर पहली बार पांच सौ रुपए और दूसरी बार एक हजार रुपए का दंड है। लेकिन इन जर्जर कूड़ेदान में कूड़ा डालना न डालना एक समान है।
निगम शहर में टूटे फूटे कूड़ेदान से ही काम चला रहा है। टूटे कूड़ेदान के कारणवश सारा कूड़ा सड़को पर फैल जाता है और उससे दुर्गंध के कारण सांस लेना दूभर हो जाता है। जिस कारण लोगों को बीमारी होने का भी खतरा रहता है।

संक्रमण में भी स्वच्छता के ये हालात
कोरोना संक्रमण अभी तक शहर में अपने पैर पसार रहा है। संक्रमण के मरीज कम होने का नाम नहीं ले रहे हैं। ऐसे में साफ सफाई का खास ध्यान रखने की शुरुआत में हिदायत स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी गई थी, लेकिन नगर निगम की शुरुआत की दहाड़ अब फीकी पड़ती जा रही है।
निगम द्वारा शुरु में जोरों शोरों से सैनिटाइजेशन और सफाई का कार्य किया गया। लेकिन अब शहर में डस्टबिन तक ठीक नहीं लगाए जा रहे हैं। शहर में अधिकत कूड़ेदानों की हालत खस्ता हो चुकी है।

