- लाखों रुपये की लागत से तैयार किए गए फव्वारे की अनदेखी, अधिकारी मौन
जनवाणी संवाददाता
मेरठ: शहर का सौंदर्यीकरण बढ़ाने के लिए विभिन्न चौराहों व पार्कों में लगाए गए लाखों के फव्वारे इन दिनों लापरवाही के चलते बदहाल स्थिति में है। इसके बाद भी जिम्मेदारों की नींद खुलने का नाम नहीं ले रही है।
लापरवाही भी इस कदर बरती जा रही है कि विभाग के अधिकारी हर दिन इन रास्तों से होकर गुजरते हैं, लेकिन खराब पडे फव्वारे पर इनकी नजर नहीं पड़ रही है। शहर को स्मार्ट सिटी की दिशा में दावे किये जा रहे हैं।

लाखों रुपये फव्वारों पर खर्च किये, फिर बंद पड़े हैं। पहले चलते थे, अब खराब पड़े हैं। इसके लिए जिम्मेदार कौन हैं? आखिर ऐसे क्रांतिधरा स्मार्ट बन जाएगा।
यह मुश्किल लग रहा है। क्योंकि आला अफसरों के स्तर पर गंभीरता व टीम वर्क से काम नहीं हो रहा है, जिसका नतीजा है कि फव्वारे खराब पड़े हैं। इनका मेटीनेंस तक नहीं किया जा रहा है।

यहां लगे हैं फव्वारे
शहर की बीच बच्चापार्क, घंटाघर के सामने, टाउन हाल के बीच दो फव्वारा पार्क के साथ ही कैंट की बात करें तो यहां भी ऐसे कई पार्क है। जिसमें फव्वारे हैं, लेकिन आज वह बदहाल हो चुके हैं।

अधिकारियों का कहना सभी फव्वारे सही
अधिकारियों का कहना है एक-दो फव्वारों को छोड़कर बाकी सभी ठीक है। नगर निगम के पास ही स्थित टाउन हाल जहां अधिकारियों की रोज मीटिंग होती है। यहां पर लगे फव्वारे सालों से खराब पडे हैं, लेकिन आज तक अधिकारी इसे तक ठीक नहीं करा पाए।
जिसे लगभग रोज ही देखते हैं। वहीं, अन्य चौराहों पर बने पार्कों में जो फव्वारे लगे हैं। वहां पर पाइप तक नजर नहीं आते। फव्वारों की दीवार को चारों ओर से पोस्टर लगाकर फव्वारों के सौंदर्यीकरण को बिगाड़ रखा है।

लाखों की लागत, फिर भी फव्वारे बंद
शहर के सौंदर्यीकरण का बढ़ाने के लिए लाखों रुपये खर्च करने के बावजूद फव्वारे बंद पडे हैं। विभाग की ओर से शाम छह बजे से रात 10 बजे तक फव्वारों को चलाया जाता है।
फव्वारों को चालू बंद करने, बिजली, रिपयेंरिग, रखरखाव के लिए हजारों रुपये प्रतिमाह के हिसाब से एक साल के लिए ठेका दिया जाता है। फव्वारे केवल त्योहारों या फिर किसी खास मौके पर ही चालू नजर आते हैं।

