Tuesday, January 18, 2022
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टैक के आसपास विकसित की जाएंगी कालोनियां, अपार्टमेंट

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  • प्रोजेक्ट के आसपास की सरकारी कालोनियां भी दी जाएंगी निजी हाथों में

जनवाणी संवाददाता

मेरठ: देश की पहली रीजनल रैपिड रेल को मुनाफे में रखने के लिए उच्च आय वर्ग, कारोबारी व बच्च वेतन भोगी पेशेवरों को दिल्ली गाजियाबाद मेरठ रैपिड कॉरिडोर के समीप ही सरकार आवास, चिकित्सा व खानपान सरीखी लग्जरी सुविधा देने जा रही है।

यदि सब कुछ ठीकठाक रहा और तय शुदा योजना के तहत चलता रहा तो मेरठ दिल्लीइ रैपिड रेल लाइन के समीप ही लग्जरी कालोनिया व अपार्टमेंट नजर आएंगे।

इतना ही नहीं रैपिड के समीप ही खाने पीने के साथ ही शॉपिंग की सुविधा देने के भी इंतजामों पर काम चल रहा है।

साथ ही दिल्ली मेरठ से सटे नोएडा सरीखे शहरों के अलावा ऐसे ही दूसरे बडे शहरों के लोगों को रैपिड के समीप प्रास्तावित कालोनियों में बसने का न्योता भेजा जाएगा।

मेरठ दिल्ली रैपिड से जुडे एक बडे अधिकारी ने जानकारी दी कि भारत सरकार के नेशनल मोनिटाइजेशन पाइप लाइन के तहत दिल्ली रोड व रुड़की रोड पर विकसित केंद्र की कुछ कालोनियां भी निजी हाथो मे दिए जाने का प्रस्ताव तैयार हो रहा है।

रुड़की रोड की यदि बात की जाए तो यहां सैन्य परिवारों की कई कालोनियां हैं। ये सभी कालोनिया लेखा नगर से सटी हुई हैं।

हालांकि जानकारों का यह भी कहना है कि संभवत सुरक्षा कारणों के चलते रुड़की रोड स्थिति सेना की कालोनियों को निजी हाथों में देने का फैसला संभवत न किया जाए, लेकिन यह भी माना जा रहा है कि जिस प्रकार से रक्षा के क्षेत्र में सरकार की ओर से निजी कंपनियों को मौका दिया गया है।

उसके चलते रुड़की रोड स्थित सैन्य कालोनियों को निजी हाथों में सौंप दिया जाए तो हैरानी नहीं होनी चाहिए। बताया गया है कि नेशनल मोनिटाइजेशन पाइप लाइन में रियल एस्टेट मोनिटाइजेशन का भी प्रावधान रखा गया है।

दरअसाल सारी कवायद के पीछे रैपिड रेल प्रोजेक्ट के लिए भविष्य के लिए धन की व्यवस्था करना है। बताया गया है कि इसके लिए वैल्यू कैप्चर फाइनेंसिंग योजना तैयार की गयी है।

जिसके तहत कुछ प्राइवेट कंपनियों को सरकारी संपत्तियां दी जाएंगी ताकि उनसे नियमित आय अर्जित होती रहे और रैपिड रेल सरीखे प्रोजेक्ट के सामने कभी भी धन की कमी आडे न आए।

बताया गया है कि एशियन डवलपमेंट बैंक के तहत जो पैनल बनाया गया है उसमें रियल एस्टेट के जानकार भी शामिल किए गए हैं।

इन तमाम बातों के चलते ही आने वाले समय में सरकारी कालोनियों को निजी हाथों में दिए जाने की बात निकल कर आयी है। रैपिड रेल के आसपास के इलाके इसके लिए बेहद मुफीद माने जा रहे हैं।

हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगा कि यह काम कब तक जमीनी हकीकत बन सकेंगा, लेकिन प्रोजेक्ट से जुड़े सूत्र बताते हैं कि इस पर कई दौर का मंथन हो चुका है।

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