Friday, March 13, 2026
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लॉकडाउन में बंद रहे होटल बार को फीस रियायत में आबकारी की ना

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कोरोना संक्रमण के लॉकडाउन के चलते बंद कर दिए गए होटल व बार को फीस में किसी प्रकार की रियायत देने से शासन के आदेशों को हवाला देते हुए आबकारी विभाग ने किसी प्रकार की रियायत से साफ इनकार कर दिया है। हालांकि हालत यह है कि शहर में कई बार तो अभी भी चालू नहीं किए जा सके हैं। इसके उलट आबकारी अफसरों ने अपनी शराब की बिक्री के लिए एक जून से सरकारी ठेकों पर लगा लॉकडाउन का बैरियर हटा लिया। जबकि होटलों के बार पर लॉकडाउन के ना पर प्रतिबंध बरकरार रहा।

सरकार ने पहले ही भरी जेब

बार लाइसेंस फीस के नाम पर आबकारी विभाग माह फरवरी से ही होटल के बार मालिकों से फीस का तकादा शुरू कर देता है। बार का लाइसेंस रिन्यूअल करने के लिए ज्यादातर होटल बार मालिक फरवरी माह के अंत तक आनलाइन फीस जमा कर देते हैं। ताकि सरकारी लेटलतीफी के चलते काम न रुके।

21 मार्च से लॉकडाउन एक अप्रैल से फीस शुरू

कोरोना संक्रमण के चलते पहला लॉकडाउन जो एक दिनी था 21 मार्च को लागू किया गया था। इसके बाद 25 को बेमियादी के नाम पर लॉकडाउन लगा दिया गया। एक जून को पहला अनलॉक किया गया। उसके बाद एक जुलाई को दूसरा, एक अगस्त को तीसरा, एक सितंबर को तीसरा, एक अक्टूबर को चौथा अनलॉक किया गया। क्रमवार किए लॉकडाउन के दौरान संपूर्ण कारोबारी गतिविधियां शुरू करने की इजाजत नहीं दी गयी थी। बडे होटल व बार सरीखे कारोबारियों की यदि बात की जाए तो उन्हें तो अनलॉक के बाद भी कुछ बडेÞ होटल व बार की स्थिति तो अब भी बंद सरीखी है।

बार संचालकों पर बड़ी मार

शहर में 15 छोटे बडे बार हैं। कुछ शुरू हो गए हैं कुछ अभी शुरू होने की प्रक्रिया में हैं, लेकिन लॉकडाउन के दौरान जब तमाम कारोबार बंद थे, उस अवधि के दौरान फीस में रियायत की मांग बार संचालक कर रहे हैं। उनका कहना है कि बार लाइसेंस फीस में एक भारी भरकम रकम ली जाती है। लॉकडाउन के दौरान जब सरकार ने कारोबार की इजाजत ही नहीं दी तो फिर कम से कम फीस में तो रियायत दी जानी चाहिए।

ये कहना है जिला आबकारी अधिकारी का

जिला आबकारी अधिकारी आलोक कुमार का कहना है कि फीस में रियायत का नीतिगत निर्णय है। ये स्थानीय स्तर पर नहीं लिया जाता है। इस संबंध में कोई भी निर्णय शासन स्तर पर ही लिया जाना है। पहली अप्रैल से आबकारी विभाग की फीस शुरू हो गयी है।

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