जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: लखनऊ और नोएडा में गत वर्ष 15 जनवरी को पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू किया गया था। अब सरकार ने वाराणसी और कानपुर में भी कमिश्नरेट सिस्टम लागू कर दिया गया है। गुरुवार को सीएम योगी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई। यूपी के बड़े शहरों में अपराध और अपराधियों पर अधिक नियंत्रण करने के लिए इस सिस्टम का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा गया था।
पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम के कारण लखनऊ और नोएडा में कानून व्यवस्था, महिला सुरक्षा और यातायात व्यवस्था में पहले की अपेक्षा सुधार देखते हुए इसे धर्म, संस्कृत, कला और पर्यटन की नगरी काशी में भी लागू करने का निर्णय लिया गया है।
डीआईजी/एसएसपी वाराणसी अमित पाठक ने पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम का स्वागत करते हुए कहा कि पुलिसिंग को और बेहतर बनाने के लिए यह एक अच्छी व्यवस्था है। वाराणसी लगभग 40 लाख से ज्यादा की आबादी वाला प्रदेश और देश का एक महत्वपूर्ण जनपद है। पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम का सकारात्मक असर आने वाले दिनों में कानून व्यवस्था के साथ ही यातायात व्यवस्था में भी देखने को मिलेगा। बता दें कि वाराणसी नगर क्षेत्र में 18 और ग्रामीण क्षेत्र में 10 थाने हैं।
लखनऊ के साथ ही नोएडा में प्रयोग के तौर पर पुलिस कमिश्नर को तैनात किया गया था। दोनों जगह पर एक वर्ष से भी अधिक समय से लागू इस सिस्टम से अपराध में नियंत्रण में सफलता भी मिली है। यहां पर भी एडीजी या उनके स्तर के अधिकारी पुलिस कमिश्नर के पद पर तैनात होंगे। लखनऊ और नोएडा में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू करने के बाद से यूपी के बड़े शहरों में भी लागू करने की मांग हो रही थी। कहा जाता है कि कमिश्नरेट सिस्टम से आम लोगों को फायदा होता है।
अभी किसी भी जिले में छह से सात आईपीएस होते हैं। नया सिस्टम लागू होने पर एक जिले में 15 से 20 आईपीएस तैनात होंगे। कमिश्नर प्रणाली लागू होने पर पुलिस के अधिकार काफी हद तक बढ़ जाएंगे। कानून व्यस्था से जुड़े तमाम मुद्दों पर पुलिस कमिश्नर निर्णय ले सकेंगे। जिले में डीएम के पास अटकी रहने वाली तमाम फाइलों को अनुमति लेने का तमाम तरह का झंझट भी खत्म हो जाएगा।
कमिश्नर सिस्टम लागू होते ही एसडीएम और एडीएम को दी गई एग्जीक्यूटिव मैजिस्टेरियल पावर पुलिस को मिल जाएगी। इससे पुलिस शांति भंग की आशंका में निरुद्ध करने से लेकर गुंडा एक्ट, गैंगस्टर एक्ट और रासुका तक लगा सकेगी। इन चीजों को करने के लिए डीएम से अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं होगी, फिलहाल ये सब लगाने के लिए डीएम की सहमति जरूरी होती है।

