- जन्म देते ही कलियुगी मां दिल पर पत्थर रखकर कैसे डाल गई अपने कलेजे के टुकड़े को
- 7 डिग्री सेल्सियस के तापमान में भी जीवित मिली नवजात बच्ची
जनवाणी संवाददाता |
दौराला: जाको राखे, साइयां मार सके ना कोय..यह कहावत उस समय चरितार्थ हो गई जब एक नवजात बच्ची रातभर ईख के खेत में पड़ी रही और कड़ाके की ठंड भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकी। इसे कुदरत का करिश्मा ही कहा जाएगा कि उसके तन पर एक कपड़ा तक नहीं था और रातभर वह ठंड में पड़ी रही। जंगली जानवरों से वह बची रही। जिस मां की कोख में वह मासूम 9 महीने तक रही और उसके हाथ नहीं कांपे।
मां जननी होती है, लेकिन मां की ममता इतनी करुणाहीन कैसे हो जाएगी, यह सोचा भी नहीं जा सकता। बच्ची को देखकर आंखों से आंसू आए और उस निष्ठुर महिला के बारे में हर कोई सोच रहा है। यह घटना है क्षेत्र के रुहासा गांव की। जहां एक र्इंख के खेत में एक नवजात बच्ची पड़ी मिली है। सूचना पर पहुंची पुलिस ने उसे अस्पताल में भर्ती करा दिया है। वहां उसका उपचार शुरू कर दिया गया है। उधर, बच्ची को गोद लेने वालों की लाइन लग गई है।
रुहासा गांव में एक र्इंख के खेत में गुरुवार को एक नवजात बच्ची लावारिस हालत में पड़ी मिली। बताया जाता है कि वहां बच्चे खेल रहे थे। उन्हें बच्ची के रोने की आवाज सुनाई दी। जिस पर बच्चों ने इसकी सूचना ग्रामीणों को दी। सूचना पर ग्रामीण वहां पहुंचे और बच्ची की तलाश की। पास में ही एक र्इंख के खेत में बच्ची पड़ी मिली। गांव निवासी अफजाल के खेत में एक बच्ची लावारिस हालत में पड़ी मिली। भूख के कारण बच्ची रो रही थी। महिला रुकसार व शबाना भी वहां पहुंची और बच्ची को चादर में लपेटा।
ग्रामीणों ने मामले की जानकारी पुलिस को दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने उसे सीएचसी पर भर्ती कराया। चिकित्सक ने बच्ची के स्वास्थ्य की जांच की तो उसे स्वस्थ पाया। सीएचसी प्रभारी डा. सचिन के अनुसार बच्ची का जन्म बुधवार की रात हुआ होगा। थाना प्रभारी उत्तम सिंह राठौर का कहना है कि बच्ची पूरी तरह स्वस्थ है और बच्ची को जिला अस्पताल भेज दिया गया है। बच्ची को जन्म देने वाली महिला का पता लगाने के लिए पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
गोद लेने को लगी लाइन
नवजात बच्ची के मिलने की जानकारी पर गांव के ही तीन दंपति बच्ची को गोद लेने पहुंचे, लेकिन पुलिस ने प्रक्रिया के तहत बच्ची को गोद लेने की उन्हें जानकारी दी। बताया कि इसके लिए पूरी प्रक्रिया करनी होगी, तब समिति निर्णय लेती है कि किसे गोद दिया जाना है? बताया कि सीएचसी से स्वास्थ्य की जांच के बाद बच्ची को प्यारेलाल अस्पताल में भेज दिया गया।
आखिर कैसे सूख गई मां की ममता की नदी!
मेरठ: कन्या शिशु की सुरक्षा को लेकर जहां एक ओर बड़े-बड़े दावे किये जा रहे हैं। वहीं, दौराला थाना क्षेत्र के गांव रुहासा में इन्सानियत एक बार फिर शर्मशार हुई है। न जाने क्यों सूख गई एक मां की ममता, गांव में गन्ने के एक खेत में नवजात कन्या शिशु लावारिस हालत में पड़ी मिली। नवजात की बेरहम मां ने उसे न जाने किस कारण से गन्ने के खेत में फेंक दिया, लेकिन इन्सानियत का दम भरने वाले लोगों के सामने कई सवाल खड़े हो गए, जिसका जवाब सभ्य कहे जाने वाले समाज के पास शायद नहीं है।
मां तूने नौ माह मुझे अपनी कोख में रखा, फिर क्यों मरने के लिए फेंक दिया? मैं इतनी ही बुरी थी तो इस दुनिया में क्यों लाई? मुझे अभागी कहने के साथ ही लोग तेरी ममता को भी कोस रहे हैं। बेटी होने के नाते मुझे ठुकरा दिया या कोई और मजबूरी थी? यह उस बेटी का दर्द है, जिसे रुहासा गांव के समीप गन्ने के खेत में एक मां फेंक कर चली गई।
एक ग्रामीण ने उसे उठाकर सीने से लगाया। बच्ची को उपचार के लिए दौराला सीएचसी भेज दिया गया। एक और कलियुगी मां ने जिस ‘अंश’ को नौ माह तक कोख में रखा मगर जन्म देने के बाद उसी अंश को ईख खेत में ऐसे फेंक दिया, मानों वह कोई कचरा हो। एक बार फिर मां की ममता यहां शर्मसार हो गई।
ठंड भी नहीं तोड़ पाई सांसों की डोर
जिस जिगर के टुकड़े को नौ महीने तक अपने पेट में रखा और उसके पैदा होते ही र्इंख के खेत में डालते समय कलयुगी मां को जरा भी दया नहीं आई। यह भी नहीं सोचा कि आखिर दुनिया में आते ही क्यों इसे लावारिस कर रही है? आखिर उस मासूम का गुनाह क्या था? हर कोई उस महिला को कोस रहा था। खेत में पड़ी रोती बिलखती बच्ची को देख ग्रामीणों का दिल पसीज गया
और आंख में आंसू भर आए। अब पता नहीं उस महिला की कौन सी मजबूरी रही कि वह अपनी मासूम नवजात बच्ची को जन्म देते ही कड़कड़ाती ठंड में खेत में डालने पर मजबूर हो गई, लेकिन ईश्वर को कुछ और ही मंजूर था। जिस कारण मासूम बच्ची पर ठंड का असर तक नहीं हुआ और ईश्वर ने उसे बचा लिया।
पैदा होते ही फेंक दिया ईख के खेत में
खेत के पास रुहासा गांव के ही बच्चे खेल रहे थे। वे खेलते-खेलते ईख के खेत के पास पहुंचे तो एक बच्चे के रोने की आवाज सुनाई दी। बहुत देर तक जब बच्चे का रोना बंद नहीं हुआ तो बच्चे जैसे ही ईख के खेत के पास पहुंचे तो ऐसा लगा जैसे उनके पैरों तले से जमीन खिसक गई हो। 7 डिग्री सेल्सियस के तापमान में कड़ाके की ठंड में सुबह-सुबह एक मासूम नवजात बच्ची ईख के खेत के बीचों-बीच पड़ी हुई थी।
जंगली जानवरों से भी बची
खेत में डालते समय उस महिला के हाथ भी नहीं कांपे, उसे जरा भी डर नहीं लगा कि उसकी बच्ची को कोई जंगली जानवर नोंचकर खा जाएगा। रातभर नवजात खेत में पड़ी रही और जंगली जानवरों की भेंट वह नहीं चढ़ी। जबकि कहा जाता है कि जंगली बिल्ली नवजात बच्चों को जल्दी से शिकार कर लेती है। उनके शरीर से आने वाली गंध पर जंगली बिल्ली सबसे ज्यादा आकर्षित होती है, लेकिन यहां कुदरत का करिश्मा ही माना जाएगा कि वह ज्यों की त्यों पड़ी रही।
बच्ची के पेट पर गर्भनाल भी थी मौजूद
लावारिस बच्चे के पेट पर गर्भनाल अब भी मौजूद थीं। ऐसा हृदयविदारक दृश्य देखकर वहां मौजूद सभी लोगों में इस कृत्य के खिलाफ जहां आक्रोश था। वहीं, नन्ही सी जान के लिए सहानुभूति भी। निर्दयी मां को बुरा-भला कहते हुए ग्रामीणों ने बच्चे को गोद में उठाकर तुरंत दौराला सीएचसी पहुंचाया। जहां बच्ची की तमाम जांच करने के बाद चिकित्सकों का कहना था कि नवजात पूरी तरह स्वस्थ हैं एवं जन्म के एक से दो घंटे के भीतर ही बच्चे को ईख के खेत में फेंका गया होगा।
आए दिन सामने आ रही है घटनाएं
ये कोई पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी शहर में एक नवजात बच्ची कचरे ढेर में मिल चुकी है। पिछले कुछ दिनों में ही कई घटनाएं इस तरह की सामने आ चुकी हैं। पिछले दिनों एक बच्ची कूड़े के ढेर में मिली थी। इसके अलावा आसपास के जनपदों से कई खबरें आ चुकी हैं। सवाल यह है कि क्या ममता मर गई है? क्या महिलाएं इतनी निर्दयी हो गई हैं कि जिसे 9 महीने तक पेट में रखती है उसे चंद सेकेंड में दूर करते समय हाथ भी नहीं कांपते। अब हर दिन कहीं न कहीं इस तरह की घटनाएं आना चिंता का विषय है।

