Monday, March 16, 2026
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ठेकेदार की मौत का मामला: नगर निगम में दिनभर रही अफरातफरी

  • ठेकेदार दीपेश के डिप्रेशन में सुसाइड के बाद अन्य ठेकेदारों ने भी पेमेंट को अधिकारियों पर बनाया दबाव

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: नगर निगम के ठेकेदार दीपेश के निगम के द्वारा करीब 10 करोड़ रुपये से अधिक के बकाया पेमेंट को लेकर डिप्रेशन में मंगलवार को की गई सुसाइड के बाद बुधवार को नगर निगम में अफरातफरी का माहौल रहा। जिसमें ठेकेदार दीपेश के सुसाइड के बाद मामला गर्म हैं तो ठेकेदारों को लगा कि यदि अब वह नगर निगम के अधिकारियों पर पेमेंट के लिये दबाव बनाये तो शायद पेमेंट हो जाये, इसमें कुछ ठेकेदार पेमेंट के लिये निगम के अधिकारियों के पास पहुंचे, लेकिन उन्हे वहीं टरकाने वाला जवाब मिला।

निर्माण विभाग के एई के कक्ष में कुछ ठेकेदार बैठे हुये थे। इसी बीच उनके बीच ठेकेदार दीपेश की सुसाइड का मामला उठ गया। जिस पर एई बोले दीपेश अपनी जान से गया निगम पर इसका क्या कोई फर्क पड़ने वाला हैं। वहीं ठेकेदार बोले साहब बात तो सही है, उसे ऐसा नहीं करना चाहिए था। एई के द्वारा नगर निगम जो कहा गया कि ठेकेदार अपनी जान से गया निगम पर इसका क्या कोई फक्र पड़ने वाला हैं।

इस दौरान मीडिया कर्मी भी वहीं बैठा हुआ था, उसने एई से कहा कि किसी की मौत पर इस तरह की अमर्यादित भाषा नहीं बोलनी चाहिए, जिस पर एई बोले कि आप किस ठेकेदार के साथ आये हैं। मीडिया कर्मी ने कहा कि वह प्रतिष्ठित समाचार पत्र का रिपोर्टर हैं। बस इतना सुनते ही निर्माण विभाग के एई-टीएन वर्मा हक्के-बक्के रह गये। उन्होने अपनी बात बदलते हुये कहा कि ऐसा नहीं है कि उन्हे ठेकेदार दीपेश की सुसाइड का कोई गम नहीं हैं। उन्हे उसके सुसाइड का सबसे ज्यादा दुख हैं।

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अक्सर जब भी दीपेश नगर निगम में पेमेंट या अन्य किसी कार्य के लिये आता था,तो जब उसकी अधिकारी बात नहीं सुनते थे,तो वह उसे चाय पानी आदि पिलाने के बाद उसे समझाता था। जिसके बाद दीपेश शांत होकर चला जाता था। इसमें उनकी कई बार दीपेश से फोन पर भी बातें होती थी। मीडिया कर्मी के व एई एवं ठेकेदारों के बीच हुई इस वार्तालाप के बाद एई के रवैय्ये में कुछ बदलाव देखने को मिला और उन्होने कई ठेकेदारों से उनकी फाइल ली और उन्हे चेक किया

और तत्काल अपने साथ दूसरे अधिकारियों को साथ लेकर कुछ ठेकेदारों के निर्माण कार्य की मौके पर जाकर जांच करने के लिये निकल गये, ताकि उनके पेमेंट में जांच पूरी होने के कारण हो रही विलम्ब आगे न हो सके। वहीं कुछ ठेकेदारों की बात को इस दौरान अनसुना भी किया गया। वह कभी गुस्से तो कभी मजाक के तौर पर अधिकारियों से यही कहते नजर आये कि क्या उन्हे भी दीपेश अग्रवाल की तरह से ही पेमेंट के डिप्रेशन में इस तरह का कदम उठाना पड़ेगा, लेकिन वह इस तरह का कदम न उठाकर अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोल देंगे।

बुधवार को दिनभर नगर निगम में अफरा तफरी का माहौल रहा। इस दौरान नगर निगम के ठेकेदार अतुल दीक्षित ने कहा कि ठेकेदार शैलेंद्र एवं वेद करीब दो वर्षो से करीब 50 लाख रुपये के पेमेंट को चक्कर काट रहे हैं। उनका मामला कोर्ट तक जा पहुंचा, लेकिन अभी तक भुगतान नहीं हुआ। नगर निगम में यदि किसी ठेकेदार का पेमेंट फंस जाये तो वह यदि लोहे के जूते पहन ले और नगर निगम के चक्कर काटने लगे तो उसके जूते घिस जायेंगे, लेकिन पेमेंट नहीं होगा।

नगर निगम में ठेकेदारों की मीटिंग

नगर निगम में ठेकेदारों की मीटिंग हुई। जिसमें निर्माण विभाग की फाइल देख रहे एई अमित शर्मा ने ठेकेदारों से उनकी लंबित फाइलों पर चर्चा की। इस दौरान ठेकेदारों ने अपनी समस्या बताई की वह कितने दिनों से नगर निगम के चक्कर पेमेंट को लेकर काट रहे हैं। वहीं वर्ष 2018 में स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत कुछ ठेकेदारों ने करोड़ों रुपये के निर्माण कार्य किये।

जिसमें सरधना के ठेकेदार शैलेंद्र व वेद के द्वारा भी करीब पचास लाख रुपये से अधिक के निर्माण कराये गये, लेकिन आज तक पेमेंट नहीं हो सका। जिसका मामला कोर्ट तक चला गया। जिसमें करीब 30 ठेकेदार ऐसे हैं, जिनका मामला हाईकोर्ट में चल रहा हैं। वहीं कुछ ठेकेदार ऐसे हैं। जिनका पेमेंट रुका है, लेकिन वह कोर्ट नहीं गये और केवल अधिकारियों की खुशामद में जुटे हैं,

ताकि उनकी फाइल पास हो जाये। बुधवार को कुछ अधिकारी ठेकेदारों की फाइलों की स्थलीय जांच के लिये मौके पर भी पहुंचे। वहीं ठेकेदारों का कहना है कि उनकी फाइल पास होने के बाद पेमेंट हो जाये तब माना जाये की उनकी समस्या का समाधान हो गया है।

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