- कई मुद्दों पर खुलकर बोले शहरकाजी
- धार्मिक टिप्पणी पर संसद में बने कानून, सजा कम से कम उम्र कैद’
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: आए दिन किसी न किसी स्तर पर एक-दूसरे के धर्मों को लेकर की जाने वाली अमर्यादित टिप्पणियों पर मेरठ के शहर काजी प्रो. जैनुस साजेदीन सिद्दीकी काफी खफा हैं। उन्होंने इस प्रकार के बयानों के खिलाफ जहां सख्त कानून की हिमायत की है
वहीं वो नूपुर शर्मा के खिलाफ की गई पार्टी कार्रवाई पर भी असहमत दिखे। भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था को उसके मूल रुप में ही लागू किए जाने के हिमायती शहर काजी से दैनिक जनवाणी संवाददाता सलीम सिद्दीकी ने विशेष बातचीत की। प्रस्तुत है उनसे हुई बातचीत के प्रमुख अंश…
- प्रश्न: अमर्यादित टिप्पणियां कर कई बार एक-दूसरे के धर्म को निशाना बनाने की कोशिश की जाती है, इसकी जड़ में क्या वजह मानते हैं?
उत्तर: इसकी जड़ में सरकार की मंशा है, क्योंकि बिना सरकार की हिमायत के कोई भी इस तरह की हरकतें नहीं कर सकता। मौजूदा हालात इस मुल्क के लिए सबसे ज्यादा अफसोसनाक हैं। एक वर्ग विशेष को टारगेट किया जा रहा है। फिरकेवाराना हवाएं चल रही हैं। इसकी जड़ में सियासी मफाद (लाभ) हासिल करने के सिवा कुछ नहीं है।
- प्रश्न: अक्सर होने वाली इस प्रकार की बयान बाजियों पर अंकुश लगाने के लिए सरकार को अपने स्तर से क्या कदम उठाने चाहिए?
उत्तर: देखिए सरकार अगर ईमानदार है तो उसे इस प्रकार की बयानबाजियों पर पाबंदी लगाने के लिए खुद पहल करनी होगी। इसके खिलाफ संसद में सख्त कानून बनाना होगा, ताकि कोई भी व्यक्ति किसी भी धर्म के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी न कर सके। बकौल शहर काजी यदि फिर भी कोई ऐसा गुनाह करता है तो उसके कम से कम उम्र कैद की सजा मिलनी चाहिए।
- प्रश्न: नूपुर शर्मा पर सरकार ने जिस स्तर की कार्रवाई की है, क्या आप उससे सहमत हैं? या कार्रवाई का स्तर और बड़ा होना चाहिए था?
उत्तर: सबसे पहली बात तो यह कि निलंबन की कार्रवाई नूपुर शर्मा के लिए कोई सजा नहीं है। जबकि उन्होेंने जो बयान दिया है उसके बाद दुनिया भर में मुल्क की बदनामी हुई है और खुद भारत में लोग एक दूसरे के खून के प्यासे हो रहे हैं। इसी संदर्भ में अब आप हाल ही में हुई हत्याएं देख लीजिए। नूपुर शर्मा ने जो जुर्म किया है वो माफी के काबिल नहीं है उन्हें फौरन गिरफ्तार कर उनके खिलाफ संबधित धाराओं में उचित कार्रवाई करनी चाहिए।
- प्रश्न: वर्तमान समय में भारतीय लोकतंत्र व्यवस्था क्या विश्वस्तरीय है या इसमें भी कुछ और बदलाव किए जाने की जरूरत है?
उत्तर: देखिए भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई झोल नहीं है, लेकिन वर्तमान समय में इस व्यवस्था को फॉलो नहीं किया जा रहा है। संविधान ने हमें जो लोतांत्रिक अधिकार दिए हैं सरकार उनका अतिक्रमण कर रही है। मुल्क डिक्टेटरशिप की तरफ बढ़ रह है। अगर आपको वर्तमान भारतीय संविधान से परहेज है तो आप हिन्दू धर्म की बुनियादों पर नया संविधान गढ़ दीजिए। किसने आपको रोका है?
- प्रश्न: सड़कों पर किसी भी तरह के धार्मिक आयोजनों को लेकर सरकार ने रोक लगा दी है। इस प्रकरण पर आपकी क्या राय है?
उत्तर: सरकार इसमें भी एक वर्ग विशेष के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाए हुए है। मुसलमान दिन में पांच वक्त नमाज अदा करता है लेकिन सभी नमाजें मस्जिद परिसर के अंदर होती हैं। यहां तक जुमे की नमाज भी। सिर्फ रमजानों के दौरान ही अलविदा जुमा व ईद-बकरीद पर मुसलमान सड़कों पर सिर्फ 15 मिनट के लिए ही नमाज अदा करते हैं। इसलिए उन्हें यह हक मिलना चाहिए।
- प्रश्न: विभिन्न संवेदनशील मुस्लिम मुद्दों पर देवबंदी उलेमाओं की चुप्पी को आप किस रुप में देखते हैं?
उत्तर: दारुल उलूम का काम सिर्फ तालीम देना है। इतना जरूर है कि दारुल उलूम से जुड़े बड़े उलेमा किसी भी मुस्लिम मुद्दे पर संस्था के नाम से हटकर अपना कोई निजि बयान दे सकते हैं या उस पर बात कर सकते हैं लेकिन अगर राजनीतिक मुद्दों पर भी वे अपनी राय देने लगे तो फिर हर राजनीतिक दल देवबंद की तरफ देखेगा और इससे बच्चों की तालीम प्रभावित होगी।
- प्रश्न: युवाओं के लिए लाई गई सरकार की ‘अग्निपथ’ योजना को क्या आप सपोर्ट करेंगे?
उत्तर: देखिये सरकार की यह स्कीम ऐसी है कि ‘किसी दुल्हे की शादी हुई और फिर उसे फौरन तलाक भी हो गया’। शहर काजी ने सरकार की ‘अग्निपथ’ योजना को बिल्कुल बेमकसद बताया। उन्होंने कहा कि नौकरी को नौकरी की तरह से किया जाता है जबकि यह युवाओं के साथ एक भद्दा मजाक है। बकौल शहर काजी जब युवा चार साल बाद रिटायर होंगे तो वो मायूसी की दुनिया में भी जा सकते हैं और इससे उनकी जिन्दगी पर गलत असर पड़ेगा।
शहर काजी के साथ पिता का भी सरकार कर चुकी है सम्मान
शहर काजी प्रो. जैनुस साजेदीन सिद्दीकी व उनके पिता स्व. काजी जैनुल आबेदीन को उनकी अरबी भाषा में सेवाओं के लिए सरकार पुरुस्कृत भी कर चुकी है। मेरठ के शहर काजी को तो पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा राष्ट्रपति पुरस्कार भी हासिल है। जहां शहर काजी खुद इस्लाम के बड़े विद्वान हैं वहीं उनके पिता भी जामिया मिलिया इस्लामिया विवि में बतौर प्रोफेसर कार्य कर चुके हैं।
पीएचडी हैं शहर काजी, राज्य मंत्री स्तर का दर्जा भी मिला
शहर काजी प्रो. जैनुस साजेदीन की दीनी शिक्षा तो दारुल उलूम देवबंद से हुई लेकिन आधुनिक शिक्षा के लिए उन्होंने जामिया विवि दिल्ली व एएमयू अलीगढ़ का रुख किया। देवबंद से ‘फाजिल’ की डिग्री हासिल करने के साथ साथ उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विवि से अरबी भाषा में एमए करने के साथ साथ यहीं से पीएचडी भी की। 1942 में मेरठ में ही जन्में शहर काजी अखिलेश सरकार में राज्य मंत्री भी थे। वो उस समय उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड के चेयरमेन थे।
‘कॉमन सिविल कोड किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं’
शहर काजी ने विभिन्न मुद्दों पर खुलकर बात की। इसी कड़ी में उनसे जब कॉमन सिविल कोड को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने उसकी खुलकर मुखालफत की और कहा कि यह कानून हमारे ऊपर थोपने की कोशिश की जा रही है जिसे न तो उलेमा स्वीकार करेंगे और न ही आम मुसलमान।
बकौल शहर काजी शरीयती उसूलों के साथ छेड़खानी की इजाजत तो भारत का संविधान भी नहीं देता क्योंकि इस संविधान ने ही सभी को उनके धर्म के हिसाब से उसे फॉलो करने की आजादी दी है। शहर काजी कहते हैं कि यदि यह कानून लागू होता है तो इसके खिलाफ जंग लड़ने से भी मुसलान पीछे नहीं हटेगा। उन्होंने इस प्रकरण पर दलितों व अन्य वर्गों को भी साथ लेकर लड़ाई लड़ने की बात कही साथ ही साथ यह भी कहा कि यह जंग पूरी तरह से लोकतांत्रिक होगी।

