- पराली के धुएं से ज्यादा सड़क की धूल और कंस्ट्रक्शन साइट से फैल रहा प्रदूषण, बेकाबू होंगे हालात
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सर्दी के मौसम में तेजी से पैर पसार रहे प्रदूषण के चलते कोरोना के बडे ट्रिपल अटैक की आशंका ही नहीं जतायी जा रही, बल्कि इससे हालातों के बेकाबू होने की बात भी कही जा रही है।
अनियंत्रित प्रदूषण के कारण ही कोरोना की सेकेंड वेव की बात कही जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि सेकेंड वेव का अंदाजा यूरोपियन देशों के हालात से लगाया जा सकता है।
जबकि वहां प्रदूषण की स्थिति भारत से बहुत बेहतर है। भारत में प्रदूषण के हालात पूरी तरह से बेकाबू हैं। बजाय अपनी खामियों को दुरुस्त करने के सिस्टम चलाने वाले प्रदूषण का ठीकरा किसानों पर फोड़ रहे हैं।
किसानों खासतौर से पराली जलाने वाले किसानों की यदि बात की जाए तो वो इतने कुसूरवार नहीं जितना की सड़कों के रखरखाव के लिए जिम्मेदार अफसर और कंस्ट्रक्शन साइटें हैं। धुआं उगलती चिमनियां भी इसके लिए बड़ी कुसूरवार हैं।
कोरोना ट्रिपल अटैक की तैयारी में
प्रदूषण की वजह तमाम हैं, लेकिन इसकी वजह से दिसंबर और जनवरी माह में कोरोना संक्रमण का ट्रिपल अटैक होना तय है। तमाम स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसकी आशंका भी जता रहे हैं। इस दौरान सबसे ज्यादा खतरा दिल के मरीजों को है। इसके अलावा टीबी के मरीजों के लिए भी ये जानलेवा कहा जा रहा है। एक तो प्रदूषण उस पर कोरोना और फिर सर्दी इस तरह कोरोना ट्रिपल अटैक की तैयारी में है।
सावधान रहे दिल और टीबी के मरीज
कोरोना संक्रमण, प्रदूषण और उस पर सर्दी का मौसम ऐसे में सबसे ज्यादा सावधान दिल व टीबी के मरीजों को रहना चाहिए। प्रदूषण और कोरोना का संक्रमण टीबी व दिल के मरीजों के लिए बेहद घातक साबित हो सकता है। आने वाले दो से तीन माह अतिरिक्त सावधानी बरते जाने की जरूरत है। प्रदूषण कम करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।
स्टे होम का दिया नारा
प्रदूषण के बीच कोरोना के ट्रिपल अटैक की आशंका के चलते स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने स्टे एट होम का नारा दिया है। मेडिकल कालेज प्राचार्य डा. ज्ञानेन्द्र कुमार का कहना है कि इससे बचने के लिए बेहतर है कि घर पर ही रुकें। बेहद जरूरी होने पर ही बाहर निकलें।
सावधानी बरती जाए
स्वास्थ्य विभाग के जिला सर्विलांस अधिकारी डा. प्रशांत कुमार का कहना है कि कोरोना का खतरा टला नहीं है। जब तक जरूरी न हो बाहर निकलें। बच्चों और युवाओं को इसका खतरा समझना चाहिए। मास्क व सोशल डिस्टेंसिंग का सख्ती से पालन किया जाए। अन्यथा लेने के देने पड़ सकते हैं।
प्रदूषण पर अंकुश जरूरी
आईएमए के सचिव डा. अनिल नौसरान का कहना है कि कोरोना संक्रमण का बड़ा हमला दिसंबर माह में संभव है। ऐसे में प्रदूषण का होना बेहद घातक है। पानी का छिड़काव कर इसको कुछ कम किया जा सकता है। इसके अलावा प्राकृतिक के करीब रहने का प्रयास करें।
जिला अस्पताल में है व्यवस्था
जिला अस्पताल के सीएमएस डा. हीरा सिंह ने बताया कि टीबी मरीजों को नि:शुल्क इलाज के लिए जिला अस्पताल में समुचित व्यवस्था की गयी है। जो भी मरीज हों वो यहां संपर्क कर सकते हैं। जिन मरीजों का पहले से इलाज चल रहा है आने वाले दो से तीन माह के दौरान वो अतिरिक्त सावधानी बरतें।

