मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जीरो टोलरेंस पर काम करने की हिदायत दे रखी हैं, लेकिन नगर निगम में भ्रष्टाचार पूरे यौवन पर हैं। रोज भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रही हैं। विजीलेंस की टीम को छापेमारी करनी पड़ रही हैं, लेकिन भ्रष्टाचार रोकने को निगम मुखिया अमित पाल शर्मा मौन साधे हुए हैं। इससे स्पष्ट है कि भ्रष्टाचार को रोकने में निगम मुखिया की पकड़ कमजोर पड़ रही हैं। भ्रष्टाचार की पौध हर रोज उग रही हैं, जिसके सामने नगरायुक्त बेबस हैं या उनकी भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। आखिर इस भ्रष्टाचार के लिए निगम मुखिया नगरायुक्त अमित पाल जिम्मेदारी क्यों नहीं ले रहे हैं।
- गृहकर इंस्पेक्टर ने खुद पैसे न लेकर निगम कर्मी लिपिक मुन्नवर के माध्यम से ले रहा था पैसे-मौके से इंस्पेक्टर हुआ फरार, तलाश जारी
- गृहकर विभाग में इंस्पेक्टर जितेंद्र अग्रवाल द्वारा गृहकर कम करने के नाम पर मांगे जा रहे थे 10 हजार रुपये, पांच हजार में बनी थी बात
- एंटी करप्शन विभाग के सीओ अंशुमन मिश्रा, प्रभारी निरीक्षक दुर्गेश, टीम प्रभारी बसंत सिंह, अमृतपाल सिहं के नेतृत्व में निगम में हुई छापेमारी
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: नगर निगम में बुधवार को एंटी करप्शन की टीम ने गृहकर विभाग के क्लर्क को पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया, जबकि इस मामले में मुख्य आरोपी गृहकर विभाग में गृहकर कम करने के नाम पर इंस्पेक्टर पैसे मांग रहा था, वो फरार होने में कामयाब रहा। इस दौरान निगम में अफरातफरी भी मच गई।
एंटी करप्शन की टीम ने गृहकर विभाग के क्लर्क मुन्नवर एवं इंस्पेक्टर जितेंद्र अग्रवाल के खिलाफ थाना देहली गेट में भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत मुकदमा पंजीकृत कराया। लिखा-पढ़ी के बाद क्लर्क मुन्नवर का लिपिक ने अस्पताल में मेडिकल कराने के बाद उसे जेल भेज दिया, जबकि पुलिस व एंटी करप्शन की टीम इंस्पेक्टर जितेंद्र अग्रवाल की तलाश में संभावित स्थानों पर दबिश दे रही है।
नगर निगम के वार्ड-79 निवासी किदवई नगर निवासी मोहम्मद जफर पुत्र मोहम्मद अय्यूब ने बताया कि उसके मकान का जो टैक्स गृहकर के रूप में आता था वह इस बार कुछ अधिक आया, जिसमें उसने टेक्स को कम करने के लिए गृहकर विभाग के इंस्पेक्टर जितेंंद्र अग्रवाल से संपर्क किया तो आरोप है कि उन्होेंने टैक्स को कम करने के नाम पर 10 हजार रुपये की मांग की थी, लेकिन पांच हजार रुपये देने की बात बन गई।

जिसमें मोहम्मद जफर ने एंटी करप्शन विभाग की टीम से संपर्क किया। जिसमें 15 दिन पूर्व टीम ने रिश्वत रंगेहाथ लेते पकड़ने को लेकर जाल बिछा दिया। जिसमें इस मामले में सीओ अंशुमन मिश्रा, प्रभारी निरीक्षक दुर्गेश, टीम प्रभारी बसंत सिंह के नेतृत्व में टीम गठित की गई। जिसमें इंस्पेक्टर जितेंद्र अग्रवाल से जफर की बातचीत हुई। जिसमें जितेंद्र अग्रवाल ने जफर से कहा कि यदि वह नहीं मिलते तो वह रुपये लिपिक मुन्नवर को दे सकता था।
जिसके बाद टीम ने पूरा जाल बिछा दिया। बुधवार दोपहर जफर पांच हजार रुपये लेकन निगम पहुंचा और मुन्नवर को थमा दिए। टीम ने मुन्नवर को रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ लिया। जबकि चर्चा है कि इसी बीच मौका पाकर इंस्पेक्टर जितेंद्र अग्रवाल वहां से फरार हो गया। इस दौरन निगम में अफरातफरी मच गई। टीम मुन्नवर को पकड़कर थाना देहली गेट ले गई। मुन्नवर ने थाने में जो बयान दिए उसमें उसने बताया कि उसके द्वारा जो पैसे लिए गए।
वह जितेंद्र अग्रवाल के कहने पर लिए गए थे। पुलिस ने दोनों के खिलाफ मामले में लिखापढ़ी कर दी। लिखापढ़ी के बाद मुन्नवर का चिकित्सीय परीक्षण कराने के बाद उसे जेल भेज दिया गया। जबकि एंटी करप्शन विभाग के इंस्पेक्टर दुर्गेश ने बताया कि आरोपी जितेंद्र अग्रवाल जोकि निगम में गृहकर विभाग में निरीक्षक हैं, उनकी तलाश जारी है। निगम में एंटी करप्शन की इस कार्रवाई से हड़कंप मच गया।

